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हाईकोर्ट ने एसडीएमसी में कर्मचारियों को दिए जा रहे अत्यधिक वेतन पर जताई हैरानी

Wed, 04 Aug 2021 12:28 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 04 Aug 2021 12:28 AM IST
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high court surprizes over salaries paid by sdmc to employees
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) द्वारा कर्मचारियों को दिए जा रहे अत्यधिक वेतन पर हैरानी जताई है। अदालत ने कहा वेतन भुगतान उसके कामकाज के मुकाबले बहुत ज्यादा है और यह बिल्कुल तार्किक नहीं है। पीठ ने कहा कि नगर निगम का काम न केवल वेतन देना है बल्कि स्वच्छता और अन्य विकास कार्य भी करना है। दरअसल निगम ने अदालत को बताया था कि उसके मासिक खर्च में 214 करोड़ रुपये वेतन पर और 30 करोड़ रुपये पेंशन पर खर्च होते हैं।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने निगम से पूछा कि क्या कर्मचारियों की बायो मैट्रिक उपस्थिति उनके आधार कार्ड से लिंक है। पीठ ने कहा कि जब निगम सफाई और विकास के बहुत ज्यादा कार्य नहीं कर रहा है, ऐसे में वह कर्मचारियों को इतना ज्यादा वेतन भुगतान कैसे कर सकता है।
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विदेशों की तुलना में खर्च अधिक
अदालत ने कहा यदि आप देश या विदेश में अन्य लोगों की तुलना में अपना खर्च देखें तो आप वेतन पर असामान्य रूप से अत्यधिक खर्च कर रहे हैं जो स्वच्छता के आपके मुख्य कार्य को देखते हुए न्यायोचित नहीं है। अदालत ने कहा आपको यह देखने की जरूरत है कि क्या आप के पास अधिक कर्मचारी हैं जिन्हें वेतन दे रहे हैं।
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पीठ ने कहा हम चाहते हैं कि आप काम करें, हम आपको लाठी दे रहे हैं लेकिन आपको इसे बैसाखी नहीं बनाना चाहिए। पीठ ने कहा कि सभी को निगम में फर्जी कर्मचारियों के बारे में पता है जो लोग घर बैठे हैं और अपने वेतन का आनंद ले रहे हैं। अदालत ने इसे भयावह बताते हुए कहा कि अदालत को निगम को अपने काम के बारे में बताने की जरूरत नहीं है।
अदालत ने निगम को अपने संसाधनों को बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों और उसकी वित्तीय स्थिति के बारे में हलफनामा दायर करने के अपने 8 जुलाई के आदेश का पालन करने को कहा।
कोर्ट ने पूछा क्या कर्मचारियों की जियो टैगिंग की जा रही
पीठ ने सवाल उठाया कि क्या एमसीडी में बायो मैट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू है? क्या आपने उसे आधार के साथ लिंक किया है? क्या उनके लोकेशन का पता लगाने के लिए जियो टैगिंग की जा रही है?
पीठ के सवाल पर निगम की ओर से पेश वकील दिव्य प्रकाश पांडे ने बताया कि निगम में बायो मैट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू है और उसके आधार से लिंक होने तथा जियो टैगिंग के बारे में वह पता कर अदालत को सूचित करेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस पर हलफनामा दाखिल करेंगे।
अदालत ने इस मामले की सुनवाई 11 अगस्त तय करते हुए कहा कि उसी दिन शिक्षकों, अस्पताल कर्मचारियों, सफाई कर्मचारियों और इंजीनियर आदि के वेतन और पेंशन का भुगतान नहीं होने संबंधी अन्य याचिकाओं पर विचार किया जाएगा।
दिल्ली सरकार ने जताई आपत्ति
वहीं दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि निगम एक मुद्दे को दो मंचों पर नहीं उठा सकता क्योंकि एसडीएमसी की ओर से यही मुद्दा सिंगल जज के समक्ष भी लंबित है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वह दिल्ली सरकार से ये नहीं कह रहे हैं कि वह निगम से अपनी राशि न वसूले बल्कि वे केवल इतना कह रहे हैं कि सरकार को इस मुश्किल समय में राशि की वसूली नहीं करनी चाहिए।

अदालत ने ये भी कहा कर्मचारी चाहे दिल्ली सरकार के हों, निगम के हों या निजी कंपनियों के हों, अगर उन्हें वेतन नहीं मिलता तो वे परेशान होते हैं। इस स्थिति को संभालना हम सब की जिम्मेदारी है जो महामारी के दौरान पैदा हुई है।
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