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हाईकोर्ट ने कहा : सब्सिडी वाला खाद्यान्न आसानी से मिले, दिल्ली सरकार को हिदायत
Thu, 21 Oct 2021 06:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 21 Oct 2021 06:30 AM IST
सार
सरकार को उन इलाकों में उचित मूल्य की दुकानें खोलने की आवश्यकाता की जांच करने का निर्देश जहां से निकटतम आउटलेट ढ़ाई किमी दूर है।
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दिल्ली उच्च न्यायालय
- फोटो : ANI
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विस्तार
उच्च न्यायालय ने कहा कि यह सुनिश्चित करना राज्य के हित में है कि नागरिकों को सब्सिडी वाला खाद्यान्न आसानी से मिले। अदालत ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह उन इलाकों में उचित मूल्य की दुकानें खोलने की आवश्यकाता की जांच करे जहां से निकटतम आउटलेट ढ़ाई किमी दूर है।
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न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने क्षेत्र में उचित मूल्य की दुकान (एफपीएस) खोलने के संबंध में राजीव रतन आवास योजना फेज-2, बापोला के निवासियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यह उचित है कि एक एफपीएस या तो इलाके में ही खोला जाए या उसके तुरंत आसपास के क्षेत्र में ताकि राज्य में गरीब से गरीब व्यक्ति की अच्छी सेवा की जा सके।
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दिल्ली सरकार ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि चूंकि इस क्षेत्र में केवल 320 राशन कार्ड धारक हैं, इसलिए एफपीएस लाइसेंसधारक के लिए वहां एक दुकान को चलाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा 2 रुपये प्रति किलोग्राम अनाज की छोटी राशि यानि मार्जिन-मनी की काफी कम है क्योंकि प्रत्येक एफपीएस लगभग एक हजार राशन कार्ड धारकों को आपूर्ति करता है।
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अदालत ने कहा कि एफपीएस आउटलेट के आवंटन के लिए दिल्ली सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत, कुछ विशेष परिस्थितियों में जैसे कि समाज के गरीब वर्गों में बसे क्षेत्रों के लिए, एक एफपीएस कम संख्या के लिए भी खोला जा सकता है।
अदालत ने 12 अक्तूबर को दिए निर्देश में कहा विशेष तथ्यों और परिस्थितियों में यह उचित है कि दिल्ली सरकार उपरोक्त स्थान पर या तत्काल आसपास के क्षेत्र में एक एफपीएस खोलें ताकि राज्य द्वारा निर्धनतम लोगों की अच्छी सेवा की जा सके। अदालत ने अपने आदेश में कहा यह सुनिश्चित करना राज्य के हित में है कि नागरिकों को दुर्गम क्षेत्रों के माध्यम से अपने तरीके से केवल रियायती मूल्यों पर खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए चार्ट न लगाना पड़े।
अदालत ने कहा सरकार इस मामले की नए सिरे से जांच करें क्योंकि उन्होंने इस मुद्दे पर 30 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी हुई है। इलाके के लोगों ने इस साल की शुरुआत में अदालत में याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्हें उनकी आवासीय कॉलोनी के आसपास एफपीएस उपलब्ध कराया जाना था, लेकिन दो साल से अधिक समय में इस दिशा में कुछ नहीं हुआ।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि कॉलोनी में रहने वाले 800 से अधिक परिवार एफपीएस की मांग कर रहे है और क्षेत्र में सामुदायिक केंद्र का एक हिस्सा पहले ही इसके लिए निर्धारित किया जा चुका है।
अदालत को बताया गया कि एफपीएस खोलने की मांग करने वाले क्षेत्रीय लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के है और उन्हें लगभग 2.5 किमी दूर स्थित आउटलेट से राशन लाने के लिए सुनसान हिस्सों और वन क्षेत्रों से होकर जाना पड़ता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर तय की है।