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दिल्ली: नई आबकारी नीति पर रोक लगाने से हाईकोर्ट का इनकार, खुदरा शराब विक्रेताओं की याचिका पर हुई सुनवाई

Tue, 13 Jul 2021 12:01 AM IST
सुशील कुमार कुमार पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Tue, 13 Jul 2021 12:01 AM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए अधिकारियों से इसका जवाब देने को कहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए थे।

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High Court refuses to stay new excise policy hearing on the petition of retail liquor sellers
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति 2021-22 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। खुदरा दुकान मालिकों ने यह कहते हुए नीति के खिलाफ याचिका दायर की है कि इससे बाजार में इकाइयों के बीच गुटबंदी (कार्टेल) को बढ़ावा मिलेगा।

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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए अधिकारियों से इसका जवाब देने को कहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए थे।
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पीठ ने कहा कि मुकुल रोहतगी हम आज रोक लगाने का आदेश पारित नहीं कर रहे हैं। हम इसे अगली तारीख पर देखेंगे। हम इस समय कोई अंतरिम राहत नहीं दे रहे हैं। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई नौ अगस्त के लिए तय कर दी है।
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पीठ खुदरा शराब विक्रेताओं के एक समूह- रेडीमेड प्लाजा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि वे पिछले 15 वर्षों से दिल्ली में शराब की खुदरा बिक्री करते आए हैं।

रोहतगी ने कहा कि नयी आबकारी नीति के तहत दिल्ली को 32 जोन में बांट दिया जाएगा और एक व्यक्ति दो जोन के लिए निविदा दे सकता है। इस नीति से कुछ बड़ी इकाइयों का पूरी तरह से एकाधिकार हो जाएगा।


उन्होंने कहा कि सभी छोटे खुदरा विक्रेताओं को नजरअंदाज कर दिया गया है। दिल्ली सरकार बड़े लोगों के लिए पूरे कारोबार के एकाधिकार की व्यवस्था कर रही है। छोटे लोगों को पूरी तरह से बाहर रखा जा रहा है जिनके पास पिछले कई वर्षों से शराब बेचने का लाइसेंस है। गुटबंदी साफ दिख रही है। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और स्थायी वकील संतोष कुमार त्रिपाठी मामले में दिल्ली सरकार की पैरवी कर रहे थे।

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