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दिल्ली: भारत में बच्चे को गोद लेने वाले अमेरिकी ईसाई दंपती को सुरक्षा प्रदान
Fri, 19 Mar 2021 06:29 AM IST
योगेश जोशी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: योगेश जोशी
Updated Fri, 19 Mar 2021 06:29 AM IST
सार
कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्र व कारा को नोटिस जारी कर जवाब तलब।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में भारत में बच्चे को गोद लेने वाले अमेरिका स्थित एक भारतीय ईसाई दंपती को सुरक्षा प्रदान की है। याची ने अपने खिलाफ हिंदू एडोप्शन एवं मेनटेंनेस अधिनियम1956 के तहत कानूनी कार्रवाई की आशंका जताई है। अदालत ने केंद्र व सेंट्रल एडोप्शन रिसोर्स अथारिटी (कारा) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि 2016 में किशोर न्याय मॉडल नियमों के लागू होने से पहले, ईसाई माता-पिता द्वारा बच्चे को गोद लेने में सक्षम वाला कोई कानून नहीं था। याचिकाकर्ता के वकील द्वारा पेश तर्को को स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि ईसाई बच्चे को गोद लेने में सक्षम बनाने के लिए एक तंत्र होना चाहिए। वर्तमान याचिका में अत्यधिक महत्व का मुद्दा उठाया गया है। यह किशोर न्याय (देखभाल और बच्चों की सुरक्षा) मॉडल नियमों के लागू होने से पहले किए गए गोद प्रक्रिया के संबंध में एक कानूनी मुददा है।
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अदालत ने कहा ऐसे मामलों में बच्चे का कल्याण सर्वोपरि है और कारा द्वारा एनओसी रद करने की वैधता की जांच अदालत द्वारा की जाना जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं, बच्चे, उनके रिश्तेदारों के खिलाफ कोई भी ठोस कार्रवाई न की जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 22 अप्रैल तय की है।
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पेश मामले के अनुसार याची ने दिसंबर 2014 को पंजाब के फिरोजपुरी जिला इलाके में बच्चे के गोद लिया था और कारा से बच्चे का पास्पोर्ट बनाने के लिए अनापत्तिपत्र मांगा था। कारा ने उनके आवेदन को खारिज कर उनके व गोद प्रक्रिया में सहायता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का नोटिस जारी कर दिया। वर्तमान में बच्चा व उसे गोद लेने वाले माता-पिता केरल में रह रहे है। फिरोजपुर अदालत ने भी गोद प्रक्रिया को गलत ठहराया था।
याची के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि बच्चे के गोद लेने के बाद पंजीकरण करवाया गया था ऐसे में उसे गैरकानूनी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि बच्चा उनके मुवक्किलों के साथ खुशी से रह रहा है।