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Hindi News ›   Delhi ›   High Court directed to lower court judges on hearing criminal cases against MPs and MLAs, for speedy disposal of cases

हाईकोर्ट का आदेश: माननीयों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई में तेजी लाएं

Thu, 28 Apr 2022 05:28 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 28 Apr 2022 05:28 AM IST
सार

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला ने विशेष न्यायालयों और एसीएमएम को मौजूदा और पूर्व सांसद व विधायकों से संबंधित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया है।

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High Court directed to lower court judges on hearing criminal cases against MPs and MLAs, for speedy disposal of cases
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उच्च न्यायालय ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई कर रहे निचली अदालत के जजों को मुकदमों के तेजी से निस्तारण के निर्देश दिए हैं। अदालत की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी को न्याय मित्र बनाया है।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला ने विशेष न्यायालयों और एसीएमएम को मौजूदा और पूर्व सांसद व विधायकों से संबंधित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी ऐसे मामलों को जल्द निपटाने के लिए 10 सितंबर 2020 और 16 सितंबर 2020 को आदेश दिया था। अदालत ने उक्त आदेश की प्रतियां संबंधित अदालत को भेजने का भी निर्देश दिया है।
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पीठ ने कहा कि मार्च 2020 के महीने की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार पूर्व और मौजूदा सांसदों और विधायकों से जुड़े चार मामलों का निपटारा विशेष न्यायाधीशों द्वारा किया गया है, जबकि एक मामले का निपटारा एसीएमएम द्वारा किया गया है।
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पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी को एमिकस क्यूरी के रूप में कार्य करने, अदालत की सहायता करने और आगे के उपायों का सुझाव देने का निर्देश दिया है। ताकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल व दिल्ली सरकार के वकीलों को अगली सुनवाई 2 मई को उपस्थित रहने के लिए कहा है।

पुलिस आयुक्त को पुलिस उपायुक्त के रैंक के एक अधिकारी को नामित करने का निर्देश दिया, जो एक नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेगा और सुनवाई की प्रत्येक तिथि पर अदालत के समक्ष पेश होगा।

सैनिक फार्म को नियमित करने के मुद्दे पर उच्च न्यायालय ने दिल्ली से मांगा जवाब
उच्च न्यायालय ने दक्षिणी दिल्ली की पॉश सैनिक फार्म हाउस कॉलोनी को नियमित करना है या नहीं इस मुद्दे पर निर्णय न लेने पर दिल्ली सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा जब सरकार पूरी दिल्ली में अनाधिकृत कॉलोनियों को नियमित कर रही है। ऐसे में सैनिक फार्म को अवैध निर्माण की प्रकृति का सर्वे किए बगैर नियमित नहीं किया जाना वहां रहने वाले लोगों के साथ-साथ भेदभाव है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने सुनवाई के दौरान के पूछा कि क्या कॉलोनी निवासी सरकारी भूमि, वन भूमि या कृषि भूमि पर कब्जा कर रहे हैं, यदि सरकारी भूमि पर कोई अनधिकृत कब्जा है तो अलग बात है। पीठ ने उक्त टिप्पणी जहांगीर पुरी में तोड़फोड़ के मुद्दे पर की।  


दरअसल वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने पीठ को बताया कि सरकार गरीबों को निशाना बनाते हुए जहांगीरपुरी इलाके में तोड़फोड़ कर रही है जबकि सैनिक फार्म जैसे कॉलोनियों में अवैध निर्माण के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

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