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Hindi News ›   Delhi ›   Four international level urban forests to be built in Delhi and Research facility will also be available

पहल : दिल्ली में बनेंगे अंतरराष्ट्रीय स्तर के चार शहरी वन, अनुसंधान की भी मिलेगी सुविधा 

Wed, 27 Apr 2022 03:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 27 Apr 2022 03:41 AM IST
सार

‘प्रकृति के पास, परिवार के साथ’ थीम पर शहरी वनों को किया जाएगा विकसित। यहां घूमने के साथ-साथ अनुसंधान भी कर सकेंगे लोग।

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Four international level urban forests to be built in Delhi and Research facility will also be available
demo pic... - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दिल्ली सरकार राजधानी के अलग-अलग इलाकों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के चार शहरी वन विकसित करेगी। ‘शहरी वन प्रकृति के पास, परिवार के साथ’ की थीम पर बनाए जाएंगे। यहां लोग सुबह-शाम की सैर के साथ-साथ अनुसंधान भी कर सकेंगे, जिसका इस्तेमाल वनों को और बेहतर करने में किया जाएगा। इसके लिए गढ़ी मांडू गांव, मितरांव, अलीपुर और जौनापुर की जगह को चुना गया है।

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दिल्ली सचिवालय में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया कि सरकार द्वारा उठाए गए तमाम उपायों के परिणामस्वरूप दिल्ली में हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) में काफी इजाफा देखा गया है। दिल्ली में साल 2013 में हरित क्षेत्र 20 फीसदी था, वह सरकार के प्रयासों के कारण साल 2021 में बढ़कर 23.06 फीसदी हो गया है। शहरों के प्रति व्यक्ति वन कवर के मामले में दिल्ली देश में नंबर एक पर है। 
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उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकालीन कार्ययोजना के सभी 14 बिंदुओं में से एक दिल्ली के शहरी वनों को विकसित करना है। दिल्ली के चारों कोनों में मौजूद मुख्य चार शहरी वनों को पहले प्रारंभिक फेज में विकसित करने का लक्ष्य तय किया गया हैं। इनमें दक्षिण पश्चिम दिल्ली का मितरांव शहरी वन, उत्तरी दिल्ली का अलीपुर शहरी वन, पूर्वी दिल्ली का गढ़ी मांडू शहरी वन और दक्षिण दिल्ली का जौनापुर शहरी वन शामिल है। 
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यह चारों शहरी वन लगभग 286 एकड़ में फैले हुए हैं। इस परियोजना के तहत मितरांव शहरी वन के पॉकेट ए और बी का 98 एकड़,  अलीपुर का 48 एकड़, गढ़ी मांडू का 42 एकड़ और जौनापुर में 98 एकड़ में शहरी वन विकसित किया जाएगा।

ये हैं विशेषताएं
पर्यावरण मंत्री ने बताया कि शहरी वनों का विकास पर्यावरण के अनुकूल किया जाएगा। इसके तहत उनकी भौतिक संरचना के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। आम आदमी के लिए मुरम पाथ, पेयजल, सार्वजनिक सुविधाएं, ध्यान हट, एम्फीथियेटर जैसी सुविधाएं के साथ ही अनुसंधान करने के लिए व इसके आधार पर शहरी वनों को और बेहतर बनाने के लिए ओपन म्यूजियम या लिविंग लैब के रूप में विकसित किया जाएगा।

शहरी वनों में छोटी-छोटी नर्सरी के द्वारा सभी लोगों को मुफ्त में पौधे भी वितरित किए जाएंगे। बाहरी गतिविधियां जैसे बर्ड वाचिंग, जंगल वॉक भी इसमें शामिल हैं। वन में गतिविधियां करने वाले तथा कराने वालों को एक सह मंच उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा।


प्रकृति का आनंद ले सकेंगे लोग
गोपाल राय ने बताया कि सरकार शहरी वन को विश्व स्तरीय बनाने के लिए सबसे पहले एक डिजाइन/विचार प्रतियोगिता कराएगी। इसके लिए विभाग द्वारा एक स्टेयरिंग कमेटी का गठन किया जा रहा है, जिसके मार्गदर्शन में यह कार्य होगा। इस परियोजना की मुख्य थीम ‘प्रकृति के पास, परिवार के साथ’ है, जिसके अनुसार दिल्ली सरकार सभी लोगों को प्रकृति के साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। सरकार दिल्ली के लोगों को ऐसी जगह देना चाहती है, जहां लोग प्रकृति का आनंद ले सकें और आने वाली पीढ़ी को भी प्रकृति के बारे में जागरूक कर सकें।

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