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दिल्ली: पूर्व एलजी नजीब जंग ने गालिब की उर्दू शायरी का अंग्रेजी में किया अनुवाद
Sat, 09 Oct 2021 08:32 PM IST
प्राची प्रियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sat, 09 Oct 2021 08:32 PM IST
सार
अनुवाद की गई पुस्तक का रेख्ता बुक्स द्वारा दीवान-ए-गालिब: सरीर-ए-खामा नाम से प्रकाशन किया गया है। पु्स्तक में 235 गजलें और एक हजार से अधिक दोहे को शामिल किया गया है।
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नजीब जंग
- फोटो : PTI
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विस्तार
मशूहर उर्दू और फारसी कवी मिर्जा गालिब की शायरी को अब अंग्रेजी में भी पढ़ा जा सकेगा। पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने 18वीं सदी के कवि के काम के संग्रह का अंग्रेजी में अनुवाद किया है। अनुवाद की गई पुस्तक का रेख्ता बुक्स द्वारा दीवान-ए-गालिब: सरीर-ए-खामा नाम से प्रकाशन किया गया है।
इस अवसर पर जंग ने कहा कि गालिब के काम को दर्शकों के सामने लाना 50 साल से उनका सपना था, जो उन्हें और जानने के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग उनकी गजलें सुनते थे, लय को पसंद करते थे, लेकिन शब्दों की सीमाओं के कारण सुंदरता, रहस्यवाद, समृद्धि व प्रतीकवाद को पूरा महसूस नहीं करते थे। पुस्तक में 235 गजलें और एक हजार से अधिक दोहे हैं।
वहीं, रेखता फाउंडेशन के संस्थापक संजीव सराफ ने जंग को साहित्य के प्रति उनके जुनून को लेकर बधाई दी। उन्होंने कहा कि पुस्तक की आय को साहित्य और भाषा के संरक्षण और प्रचार के मिशन का समर्थन करने के लिए रेख्ता फाउंडेशन को दान कर दिया जाएगा।
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इस अवसर पर जंग ने कहा कि गालिब के काम को दर्शकों के सामने लाना 50 साल से उनका सपना था, जो उन्हें और जानने के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग उनकी गजलें सुनते थे, लय को पसंद करते थे, लेकिन शब्दों की सीमाओं के कारण सुंदरता, रहस्यवाद, समृद्धि व प्रतीकवाद को पूरा महसूस नहीं करते थे। पुस्तक में 235 गजलें और एक हजार से अधिक दोहे हैं।
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वहीं, रेखता फाउंडेशन के संस्थापक संजीव सराफ ने जंग को साहित्य के प्रति उनके जुनून को लेकर बधाई दी। उन्होंने कहा कि पुस्तक की आय को साहित्य और भाषा के संरक्षण और प्रचार के मिशन का समर्थन करने के लिए रेख्ता फाउंडेशन को दान कर दिया जाएगा।
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