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दमघोंटू हवा से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी, बजट में 2,217 करोड़ रुपये का प्रस्ताव

Tue, 02 Feb 2021 02:30 AM IST
नोएडा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Tue, 02 Feb 2021 02:30 AM IST
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Expectation of relief from stifling air increased
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

आम बजट में वायु प्रदूषण से निजात के लिए 2,217 करोड़ रुपये का प्रस्ताव कर केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर समेत देश के बड़े शहरों को दमघोंटू हवा से बचाने का इरादा दिखाया है। इससे वायु प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। इको फ्रेंडली बसों के प्रोत्साहन और स्क्रैपिंग पॉलिसी इसमें मददगार साबित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि नीतिगत बदलावों को बेहतर तरीके से लागू किया गया तो आने वाले दिनों में इसका असर दिल्ली-एनसीआर की हवा पर साफ देखा जा सकेगा।

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बजट भाषण में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उल्लेख किया है कि दस लाख की आबादी वाले 42 शहरों के लिए 2217 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा रहा है। वहीं, पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के लिए स्क्रैपिंग पॉलिसी घोषित की गई। यह 20 साल से पुराने निजी वाहनों और 15 साल से पुराने वाणिज्यिक वाहनों पर लागू होगी। खास बात यह कि नए वाहनों की खरीद के दौरान स्क्रैप पर इंसेटिव की सुविधा मिलेगी।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में लाखों की संख्या में पुराने वाहन सड़क से हटाए जा सकेंगे। इनका निस्तारण होने से प्रदूषण की समस्या से निजात मिलेगी। खास बात यह कि दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ईवी पॉलिसी तैयार करने के साथ-साथ वाहनों के लिए इंसेटिव का भी प्रावधान किया है। इससे लोगों को नए वाहनों की खरीद पर वित्तीय राहत मिलेगी। वहीं, लाखों वाहनों का पर्यावरण स्वच्छता के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निस्तारण किया जा सकेगा।
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इलेक्ट्रिक वाहनों से भी प्रदूषण से मिलेगी राहत
दिल्ली में बसों की संख्या कम है, लेकिन इस साल 1000 लो फ्लोर बसों की खरीदारी को मंजूरी मिलने के बाद 300 इलेक्ट्रिक बसों को भी बेड़े में शामिल किया जाएगा। विशेषज्ञ विवेक चट्टोपाध्याय के मुताबिक बीएस-6वाहनों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे प्रदूषण को नियंत्रित करने में काफी मदद मिलेगी।


विशेषज्ञ की राय
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) के सीनियर प्रोग्रामर विवेक चट्टोपाध्याय का कहना है कि परिवहन व्यवस्था में सुधार के लिए बसों की संख्या बढ़ाने सहित वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की गुणवत्ता भी काफी अहम है। बीएस-6 वाहनों का ही पंजीकरण अनिवार्य किए जाने से भी हर साल लाखों की संख्या में बिकने वाले वाहनों से प्रदूूषण में करीब 80 फीसदी की कटौती होगी। नाइट्रोजन ऑक्साइड, पर्टिकुलेट मैटेरियल(पीएम) जैसे प्रदूषणकारी तत्वों को वाहनों में लगे उपकरणों से नियंत्रित किया जाता है।

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