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डीयू: दाखिले से पहले आरक्षित वर्ग के आंकड़ों की जांच की मांग, कुलपति को लिखा गया पत्र

Mon, 09 May 2022 05:57 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Mon, 09 May 2022 05:57 AM IST
सार

फोरम के अध्यक्ष और दिल्ली विश्वविद्यालय की दाखिला कमेटी के पूर्व सदस्य डॉ. हंसराज सुमन ने पत्र में लिखा है कि डीयू कॉलेजों में हर साल स्वीकृत सीटों से 10 फीसदी ज्यादा दाखिला होते हैं। कॉलेज अपने स्तर पर 10 फीसदी सीटें बढ़ा लेते हैं।

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DU: Demand to check the data of reserved category before admission
दिल्ली विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह को पत्र लिखा है। पत्र में शैक्षिक सत्र 2022-23 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में आरक्षित कोटे में दाखिला प्रक्रिया शुरू करने से पहले पिछले पांच वर्षों के आंकड़े मंगवाकर उनकी जांच करवाने की मांग की है। फोरम का आरोप है कि हर साल आरक्षित वर्गों की सीटें खाली रह जाती हैं, जिसे बाद में सामान्य वर्गों के छात्रों से भर लिया जाता है, जबकि केंद्र सरकार की आरक्षण नीति के अनुसार एससी /एसटी सीटों में बदलाव किया जा सकता है।

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फोरम के अध्यक्ष और दिल्ली विश्वविद्यालय की दाखिला कमेटी के पूर्व सदस्य डॉ. हंसराज सुमन ने पत्र में लिखा है कि डीयू कॉलेजों में हर साल स्वीकृत सीटों से 10 फीसदी ज्यादा दाखिला होते हैं। कॉलेज अपने स्तर पर 10 फीसदी सीटें बढ़ा लेते हैं। बढ़ी हुई सीटों पर अधिकांश कॉलेज आरक्षित वर्गों की सीटें नहीं भरते। उन्होंने यह भी कहा है कि पिछले तीन साल से सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए 10 फीसदी आरक्षण दिया गया है। इन वर्गों के छात्रों की सीटें भी खाली रह जाती हैं।
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डॉ. सुमन ने कहा कि इस बार यदि विश्वविद्यालय प्रशासन प्रवेश परीक्षा से पहले पूर्व कॉलेजों से स्वीकृत सीटों के आंकड़े मंगवा ले और हर सूची के बाद सीटों का ब्यौरा रखे तो काफी हद तक समस्या का समाधान हो सकता है। उनका कहना है कि यदि संभव हो तो दिल्ली विश्वविद्यालय अपने स्तर पर कॉलेजों के लिए एक निगरानी कमेटी गठित करे। इस कमेटी में आरक्षित वर्गों के शिक्षकों को ही रखा जाए।

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