Delhi: डीएमआरसी ने हाईकोर्ट से कहा; 'प्रतिकूल आदेश से संचालन पूरी तरह से हो जाएगा ठप', जानिए क्या है मामला
डीएमआरसी ने कहा कि यदि इस समय दिल्ली मेट्रो के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित किया जाता है, तो लाखों यात्रियों को आसानी से कहा जाएगा कि आप दिल्ली मेट्रो का उपयोग नहीं कर सकते।
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दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि उसने अपने दो इक्विटी भागीदारों केंद्र व दिल्ली सरकार से रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर-प्रमोटेड दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट को शेष राशि का भुगतान करने के लिए धन का प्रबंध करने का आग्रह किया है। दिल्ली मेट्रो ने कहा कि उसके खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित होने पर लाखों यात्रियों को नुकसान होगा। ऐसे में उन्हें राशि के भुगतान के कुछ समय प्रदान किया जाए।
डीएमआरसी द्वारा दायर अतिरिक्त हलफनामे के अनुसार यदि वर्तमान स्तर पर कंपनी के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित किया जाता है, तो इसका संचालन पूरी तरह से ठप हो जाएगा जो कि जनहित पर प्रतिकूल प्रभाव यह देखते हुए कि लगभग 48 लाख यात्रा दैनिक आधार पर उपयोग करते है। डीएएमईपीएल 2017 के मध्यस्थ पुरस्कार के संदर्भ में डीएमआरसी के अनुसार 06 सितंबर तक रिलायंस की सहायक कंपनी का 7,010.08 करोड़ रुपये बकाया है। अब तक डीएएमईपीएल को 2,599.17 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव के समक्ष डीएमआरसी की और से पेश महान्यायवादी आर. वेंकटरमानी ने कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार से 3500 करोड़ रुपये की मांग की है। उन्होंने कहा चूंकि इक्विटी साझेदार इस मुद्दे पर विचार कर रहे है यह चीजों की फिटनेस में होगा कि रखरखाव पर कोई प्रतिकूल आदेश न हो। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कि दिल्ली मेट्रो की गतिविधियों और संचालन के संबंध में जो कुछ भी किया जाता है, उसके वर्तमान संचालन के लिए गंभीर परिणाम होंगे। यदि इस समय दिल्ली मेट्रो के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित किया जाता है, तो लाखों यात्रियों को आसानी से कहा जाएगा कि आप दिल्ली मेट्रो का उपयोग नहीं कर सकते।
इसके अलावा एजी ने डीएमआरसी द्वारा दायर एक अतिरिक्त हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि अगर कंपनी कोई ऋण लेने का प्रयास करती है तो वह वित्तीय जाल में पड़ सकती है। उन्होंने कहा पहले भी मेट्रो अन्य विकल्प तलाश रही थी और अपनी चिंताओं को दो इक्विटी भागीदारों को लिख चुकी है।एजी ने पुरस्कार के संदर्भ में डीएएमईपीएल को किए जाने वाले भुगतान के संबंध में तौर-तरीकों को अदालत के समक्ष पेश करने के लिए दो सप्ताह की अवधि मांगी। अदालत ने उनके आग्रह को स्वीकार कर मामले की सुनवाई 31 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी।
हलफनामे में कहा गया है डीएमआरसी ने डिक्री धारक को लगभग 2600 करोड़ रुपये की राशि पहले ही दे दी है और अपने शेयरधारकों से धन की उम्मीद कर रही है ताकि मध्यस्थ पुरस्कार की शेष राडशि के भुगतान को पूरा किया जा सके।
6 सितंबर को अदालत ने डीएमआरसी को चार सप्ताह की अवधि के भीतर डीएएमईपीएल को शेष भुगतान करने का निर्देश दिया था जिसमें विफल रहने पर इसके प्रबंध निदेशक को तलब करने को कहा था। एजी सोमवार को पहली बार इस मामले में पेश हुए।
अदालत डीएएमईपीएल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें 11 मई, 2017 को मध्यस्थता पुरस्कार को लागू करने की मांग की गई है। 2008 में डीएमआरसी ने लाइन के डिजाइन, स्थापना, कमीशन, संचालन और रखरखाव से संबंधित डीएएमईपीएल के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि कुछ विवादों के कारण, मामला 2012 में मध्यस्थता में चला गया। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने डीएएमईपीएल के पक्ष में दिए गए पुरस्कार को बरकरार रखा था।