जंतर-मंतर भड़काऊ भाषण मामला: आरोपी बोला- हिंदू राष्ट्र की मांग करने का मतलब धार्मिक समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ाना नहीं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Wed, 15 Sep 2021 06:18 PM IST

सार

जंतर-मंतर पर हुए कार्यक्रम के आयोजकों में से एक प्रीत सिंह ने अदालत में कहा कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में, हिंदू राष्ट्र की मांग का मतलब धार्मिक समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना नहीं है।
 
दिल्ली उच्च न्यायालय
दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : ANI
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विस्तार

जंतर मंतर पर एक कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ भाषण मामले में आरोपी प्रीत सिंह ने अपनी हिन्दू राष्ट्र की मांग को उचित ठहराया है। प्रीत सिंह ने कहा कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंदू राष्ट्र की मांग धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के बराबर नहीं है। हाईकोर्ट के समक्ष अपनी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोपी ने कहा कि वो अपनी मांग पर अडिग है और यदि अदालत का रवैया उनकी मांग के विपरीत है तो वह जमानत नहीं मांगेंगे। वहीं दिल्ली पुलिस ने जमानत पर आपत्ति जताई है।
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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत आवेदन पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। प्रीत सिंह कार्यक्रम के आयोजकों में से एक है। प्रीत सिंह की ओर से पेश अधिवक्ता विष्णु शंकर ने अपने मुवक्किल को जमानत प्रदान करने का आग्रह करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फंसाया गया है और उसने ऐसा कोई बयान नहीं दिया जिससे दो समुदायों के बीच दुश्मनी हो।


उन्होंने कहा मैं जिम्मेदारी की भावना के साथ कहता हूं अगर अदालत यह मानती है कि हिंदू राष्ट्र की मांग आईपीसी की धारा 153 के तहत आती है तो वे जमानत अर्जी पर दबाव नहीं डालेंगे। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में अगर यह मांग किसी भी हालत में दुश्मनी को बढ़ावा नहीं देती।

उन्होंने अपने मुवक्किल द्वारा हिन्दू राष्ट्र के संबंध में मीडिया को दिए साक्षात्कार वाले आरोप को स्वीकार करते हुए तर्क दिया कि वह कथित रूप से सांप्रदायिक नारेबाजी का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा मेरे मुवक्किल ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जो आईपीसी की धारा 153ए के तहत आता हो। पुलिस आईपीसी की धारा 34 (सामान्य इरादा) का मामला बना रही है लेकिन कार्यक्रम सुबह 11:45 बजे समाप्त हुआ और दोपहर 3:45 बजे नारेबाजी हुई। मेरे मुवक्किल उस समय मौजूद नहीं था।

उन्होंने कहा मामले में मुख्य आयोजक वकील अश्विनी उपाध्याय को पहले ही जमानत मिल चुकी है। प्राथमिकी नारेबाजी को लेकर है उस समय उनका मुवक्किल वहां नहीं था। वहीं दिल्ली पुलिस की और से पेश अधिवक्ता तरंग श्रीवास्तव ने कहा कि सभी आरोपियों ने एक साथ काम किया और कथित रूप से सांप्रदायिक नारे लगाने के समय प्रीत सिंह की अनुपस्थिति उन्हें किसी भी दायित्व से मुक्त नहीं करेगी। इतना ही नहीं उसने अपने साक्षात्कार में भी एक विशिष्ट समुदाय का उल्लेख किया, जो एक ही मामले का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि मुख्य आयोजक और आरोपी ने एक एक समान साक्षात्कार दिया और यह आईपीसी की धारा 153ए के तहत आता है। रही बात धारा 34 की है, इसके बाद एक सह-आरोपी ने दूसरा इंटरव्यू दिया। दूसरा फेसबुक लाइव अपलोड करता है। यह सामान इरादे को स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा कि उपाध्याय को छोड़कर सभी आरोपी हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है। कोर्ट ने तीन सितंबर को प्रीत सिंह की जमानत अर्जी पर नोटिस जारी किया था और पुलिस को अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
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