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Delhi : वीडियो यूडीएस जांच से बचेंगे मरीज के गुर्दे, उत्तर भारत का पहला अस्पताल बना सफदरजंग, मुफ्त होगी जांच

Tue, 20 Dec 2022 06:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा राकेश शर्मा, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Tue, 20 Dec 2022 06:01 AM IST
सार

रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से अनियंत्रित हुए पेशाब या मूत्र संबंधी बीमारी से परेशान मरीजों के गुर्दे अब खराब होने से बच सकते हैं। रीढ़ की हड्डी में चोट या महिलाओं में होने वाले मूत्र संबंधी बीमारी के उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल में वीडियो यूडीएस जांच की सुविधा शुरू हुई है।

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Delhi: Video UDS test will save the patient's kidney
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विस्तार

रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से अनियंत्रित हुए पेशाब या मूत्र संबंधी बीमारी से परेशान मरीजों के गुर्दे अब खराब होने से बच सकते हैं। रीढ़ की हड्डी में चोट या महिलाओं में होने वाले मूत्र संबंधी बीमारी के उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल में वीडियो यूडीएस जांच की सुविधा शुरू हुई है। इस आधुनिक जांच की मदद से बीमारी को आसानी से पकड़ा जा सकता है। साथ ही डॉक्टर बीमारी के स्तर व कारण को जान कर उस आधार पर उपचार दे पाएगा। सफदरजंग अस्पताल में 22 साल के एक मरीज पर इसका सफल ट्रायल भी किया गया। 

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करीब छह साल पहले ट्रेन दुर्घटना में इस मरीज के दोनों पैर लगवा ग्रस्त हो गए थे। यह अनियंत्रित पेशाब की समस्या से पीड़ित था। जांच से बीमारी के कारण का पता चल गया है और अब उसका सफल इलाज हो सकेगा। इससे भविष्य में उसके गुर्दे खराब होने से बचाए जा सकेंगे। सफदरजंग अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग में यूनिट 2 के प्रमुख डॉ. पवन वासुदेव ने बताया कि अभी तक महिलाओं में मूत्र संबंधी रोग और रीढ़ की हड्डी की चोट से जुड़े रोगी के लिए कोई समर्पित शाखा नहीं थी। 
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इस शाखा के तहत सफदरजंग में समर्पित रूप से इन मरीजों के लिए वीडियो यूडीएस निशुल्क जांच शुरू की है। यह नॉर्थ इंडिया का पहला सरकारी अस्पताल होगा। साथ ही देशभर के यूरोलाॅजी के डॉक्टर आपस में चर्चा करके उपचार विधियों का आदान-प्रदान करेंगे। इससे देशभर के मरीजों को फायदा होगा। अस्पताल में हर साल इस तरह के करीब तीन हजार मरीजों का इलाज होता है। अब तक यह सुविधा एक ही जगह न होने के कारण मरीजो को इलाज के लिए यहां-वहां भटकना पड़ता था। अब ऐसा नहीं होगा। 
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क्या है यूडीएस जांच 
यूडीएस जांच विशेष जांच हैं जिसमें आधुनिक कैमरे की मदद से देखा जाता है कि मरीज के पेशाब की थैली कैसे काम कर रही है। ब्लैडर का प्रेशर कैसा है। इस जांच के बाद सटीक बीमारी का पता लगाया जा सकता है, जो अभी तक नहीं हो पाता था। 

मरीजों को दी जा सकेगी सलाह 
जांच के बाद बीमारी का कारण पता चलने के बाद मरीजों को उचित सलाह दी जा सकेगी। जिसमें पेशाब करने सहित अन्य सलाह शामिल होंगी। इससे मरीज की जिंदगी में सुधार होगा। साथ ही आत्मविश्वास भी जागेगा। जांच के बाद बीमारी आगे चलकर बड़ा रूप नहीं ले पाएगी। 

तीन क्षेत्रों में काम करेगी सोसाइटी
यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (यूएसआई) तीन क्षेत्रों से जुड़े मरीजों पर काम करेगी। इसमें स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के मरीज, बाल रोग विभाग में जन्मजात रीढ़ की हड्डी की दिक्कत या पेशाब की थैली में दिक्कत और महिलाओं में होने वाले पेशाब संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए समर्पित रूप से काम किया जाएगा।

डॉ. रणदीप गुलेरिया ने ज्वाइन किया मेदांता अस्पताल

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने मेदांता अस्पताल ज्वाइन किया है। वे यहां पर इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनल मेडिसिन एंड रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन के चेयरमैन और मेडिकल एजुकेशन के निदेशक होंगे। 

डॉ. गुलेरिया को फेफड़ों के कैंसर, अस्थमा, सीओपीडी, सांस की मांसपेशियों के कार्यों और नींद संबंधी विकारों के लिए जाना जाता है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय और भारतीय पत्रिकाओं में उनके 400 से अधिक प्रकाशन हैं, और विभिन्न प्रमुख पुस्तकों में 49 अध्याय हैं। डॉ. गुलेरिया ने 2011 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में पल्मोनरी मेडिसिन एंड स्लीप डिसऑर्डर का एक समर्पित विभाग स्थापित करने में भूमिका निभाई थी। ब्यूरो

स्टोर अधिकारी निलंबित 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने कथित भ्रष्टाचार के आरोप में अस्पताल के स्टोर अधिकारी को निलंबित कर दिया है। निदेशक ने कहा कि स्टोर अधिकारी कमल सिंह को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जा रहा है। इस दौरान आरोपी जांच चलने तक मुख्यालय को छोड़कर नहीं जा सकता। बता दें कि कुछ दिनों पहले एम्स निदेशक ने सभी कर्मचारियों के लिए सतर्कता जांच अनिवार्य कर दी है।

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