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दिल्ली : निकलने से पहले ही पता कीजिए घर से दफ्तर के बीच कहां, कितना है प्रदूषण, पांच हजार में मिलेगा उपकरण
Sun, 10 Oct 2021 04:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सीमा शर्मा, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 10 Oct 2021 04:29 AM IST
सार
आईआईटी दिल्ली के आंत्रप्रिन्योर स्टार्टअप में वैज्ञानिकों की टीम ने तैयार किया प्रदूषण मापने वाला सस्ता उपकरण।
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दिल्ली वायु प्रदूषण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एनसीआर में दमघोंटू प्रदूषण से खुद को बचाना मुश्किल है। ऐसे में आईआईटी के वैज्ञानिकों ने इंजियोटैग 2.5 नामक प्रदूषण मापने की तकनीक वाली डिवाइस ईजाद की है। यह घर से लेकर ऑफिस के रास्ते के प्रदूषण की जानकारी तो मोबाइल के माध्यम से देगी ही, यह भी बता देगी कि दिनभर में कितना पीएम2.5 और कार्बन डाईऑक्साइड शरीर में गया। यह डिवाइस इतनी छोटी है कि इसे आसानी से अपने पर्स में रखकर कहीं भी ले जा सकते हैं।
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डॉ. सरिता के मुताबिक, इंजियोटैग एक मोबाइल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग डिवाइस है, जो वास्तविक समय पर आसपास मौजूद पीएम2.5 को मापती है। मोबाइल एप के जरिये आसपास के प्रदूषकों की जानकारी मिलती है। ब्लूटूथ लो एनर्जी पर काम करने वाले इस उपकरण से तापमान और आर्द्रता की गणना भी की जा सकती है। आकार में छोटे इस उपकरण को आसानी से पर्स में रखकर कहीं भी ले जा सकते हैं। यह डिवाइस महज पांच हजार रुपये में उपलब्ध है।
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आईआईटी दिल्ली, दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ मिलकर एयरोग्राम स्टार्टअप ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली में 13 बसों में जीपीएस युक्त इजियोमोटिव मोबाइल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग डिवाइस लगाई है। शहर के विभिन्न रूट पर चलने वाली बसों में इस डिवाइस से वायु प्रदूषण की सटीक जानकारी मिलेगी। इससे दिल्ली के वायु प्रदूषण के हॉटस्पाट भी चिह्नित किए जा सकेंगे। आगे चलकर इस डिवाइस को 70 से 300 बसों में लगाया जाएगा। फिलहाल शहर में जो वायु प्रदूषण मापक लगे हैं, वे महज सौ मीटर तक का ही स्तर बता सकते हैं।
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सर्वाधिक कार्बन डाईऑक्साइड सांसों में घोल रहा एसी रूम
शोध के मुताबिक, घरों का प्रदूषण बाहरी से 10 गुना अधिक हानिकारक है। यहां कार्बन डाईऑक्साइड की अधिक मात्रा हमारे मस्तिष्क और कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करती है। इसका ध्यान रखते हुए डॉ. अहलावत की टीम ने सीओ2 मीटर विकसित किया है। इसे घरों में एसी पर लगाया जा सकता है। वास्तविक समय में यह पीएम 2.5, कार्बन डाईऑक्साइड, आर्द्रता को मापेगा। हर घर में एसी लगा होता है और अधिकतर में क्रॉस-वेंटिलेशन (हवा पास होने के लिए रास्ता) नहीं होता। प्रदूषण तो कम हो जाता है, पर सीओ2 बढ़ जाता है। एसी में अभी बाहर से हवा लेने का कोई तकनीक नहीं है। यह डिवाइस सीओ2 की मात्रा 600 पीपीएम से अधिक होने पर वेंटिलेशन के लिए अलार्म करेगी।
सेंसर से काम करती है डिवाइस
ये सभी डिवाइस सेंसर आधारित हैं। इन डिवाइस में लेजर स्रोत लगे हैं। जैसे ही डिवाइस में हवा अंदर आती है तो लाइट स्कैटरिंग मिजरिंग कैविटी से होकर गुजरती है। इलेक्ट्रिक सिग्नल से फिल्टर एंपिल फायर सर्किट से दोबारा इलेक्ट्रिक सिग्नल से माइक्रो प्रोसेसर और फिजिटल सिग्नल से पूरी जानकारी मिलती है।
हर साल वायु प्रदूषण से होती है सात लाख लोगों की मौत
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, बीमारियों से अधिक प्रदूषण सांसों पर भारी पड़ रहा है। हर साल करीब 7 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण से होती है। इसमें पीएम2.5 सबसे बड़ा कारक है। एक मिनट में वयस्क व्यक्ति 12 से 20 बार सांस लेता है। दिनभर में वह 20 से 22 हजार सांस लेता और छोड़ता है। प्राकृतिक संरचना में छेड़छाड़ से वायु प्रदूषण होता है। वायु हमेशा चलती है, इसलिए हर घंटे प्रदूषण केे स्तर में बदलाव देखने को मिलता है। वायुमंडल में नाइट्रोजन 78 फीसदी, ऑक्सीजन 21 फीसदी, कार्बन डाईऑक्साइड 0.04 फीसदी, अन्य गैसें 0.96 फीसदी होती हैं।
छह श्रेणी में होता है एक्यूआई
एक्यूआई : श्रेणियां
0-50 : अच्छा
51-100 : संतोषजनक
101-200 : मध्यम
201-300 : खराब
301-400 : बहुत खराब
401- 500 : गंभीर
इन आठ प्रदूषकों की होती है गणना
पीएम-2.5, पीएम10, ओजान-ओ3, सल्फर डाईऑक्साइड-एसओ2, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड-एनओ2, कार्बन मोनोऑक्साइड-सीओ, शीशा-पीबी, अमोनिया-एनएच3
प्रदूषण मापकर सही मायने में बचा सकते हैं लोगों का जीवन
आज बीमारियों से अधिक लोग प्रदूषण के चलते जान गंवा रहे हैं। प्रदूषण आज सबसे बड़ी दिक्कत है। इस स्टार्टअप के माध्यम से प्रदूषण कम करने के साथ-साथ आम लोगों को इससे बचने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसमें अलग-अलग तरह से तकनीक का प्रयोग करके रियल टाइम मॉनिटरिग पर आधारित डिवाइस बनाई गई हैं। घर के अंदर, ऑफिस और सफर के दौरान हम खुद प्रदूषण के स्तर को माप सकेंगे। एक्यूआई मॉनिटरिंग टावर की सीमित संख्या (अत्यधिक महंगे होने के कारण) के चलते कम लागत वाली पोर्टेबल डिवाइस बनाई हैं, ताकि आम लोग खुद अपनी सांसों में घुलते जहर को रोकने पर काम करें।
- डॉ. सरिता अहलावत, एयरोग्राम स्टार्टअप संस्थापक, वैज्ञानिक, आंत्रप्रिन्योर आईआईटी दिल्ली।