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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi news: not admitted even after the symptoms of corona

दिल्ली का हाल : कोरोना के लक्षण होने पर भी नहीं किया जाता भर्ती, पुष्टि होने पर ही शरण

Fri, 14 May 2021 06:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा विनोद डबास, नई दिल्ली
विनोद डबास, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 14 May 2021 06:10 AM IST
सार

  • जांच में संक्रमण की पुष्टि होने पर ही सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में शरण मिली
  • कोरोना जांच की रिपोर्ट आने तक जमीन पर लेटा रहना पड़ा

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Delhi news: not admitted even after the symptoms of corona
राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में एक मरीज... - फोटो : amar ujala

विस्तार

आप में कोरोना के तमाम लक्षण हैं और आपकी तबीयत बेहद ही गंभीर है, मगर आपके पास कोरोना होने की रिपोर्ट नहीं है तो आपको कोरोना का इलाज करने के लिए तय किए गए अस्पताल में भर्ती नहीं किया जाएगा। ऐसे अस्पतालों में मरीजों को जांच में कोरोना होने के पुष्टि होने पर ही भर्ती किया जाएगा।

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इतना ही नहीं, कोरोना जांच रिपोर्ट आने तक मरीज को अस्पताल परिसर में जमीन पर भी बैठना या फिर लेटना होगा। इस दौरान आपके आसपास से काफी लोग गुजरेंगे और आप को कोरोना होने की पुष्टि होती है तो आपके कारण अस्पताल में कई लोगों के संक्रमित होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। यह नजारा नरेला स्थित सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में देखा जा सकता है।
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होलंबी कलां में रहने वाली करीब 14 साल की सुजाता में कोरोना के तमाम लक्षण होने और उसकी तबीयत खराब होने पर उसके परिजन बृहस्पतिवार को उसे सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में भर्ती कराने के लिए आए, लेकिन इमरजेंसी में कार्यरत डॉक्टरों ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया। इतना ही नहीं, उसको तत्काल राहत देने के लिए कोई उपचार भी नहीं दिया। डॉक्टरों ने उसके परिजनों को फरमान दिया कि वे पहले कोरोना जांच कराए, जांच में कोरोना की पुष्टि होने पर ही उसे उनके पास लेकर आए।
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सुजाता के परिजन डॉक्टरों के निर्देश पर ओपीडी में उसकी कोरोना जांच कराने चले गए। यहां करीब आधा घंटे बाद उसकी कोरोना जांच हुई और लगभग एक घंटे बाद उसकी रिपोर्ट आई। उसकी स्थिति देखकर साफ लग रहा था कि वह कोरोना की चपेट में आई हुई है और जांच रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हो गई। इसके बाद उसके परिजन उसे इमरजेंसी में लेकर गए।

हालांकि इमरजेंसी में जाते ही उसे भर्ती कर लिया गया, लेकिन सुजाता एवं उसके परिजनों ने करीब डेढ़ घंटे का समय बड़े ही कष्ट के साथ काटा। सुजाता कोरोना जांच कराने के बाद ओपीडी के सामने अस्पताल परिसर में जमीन पर लेटी रही, वहीं उसके परिजन उसके पास जमीन में बैठकर ओपीडी की ओर से उसकी जांच रिपोर्ट के इंतजार में नजर लगाए रहे। इस दौरान सुजाता के पास से काफी लोग गुजरे और उसके आसपास कुछ लोग भी बैठे हुए थे।

अस्पताल में सुजाता ही अकेली ऐसी नहीं थी जो कोरोना जांच रिपोर्ट के इंतजार में जमीन पर लेटी हुई थी, यहां 20-25 युवक एवं युवतिया भी कोरोना जांच के इंतजार में जमीन, सीढिय़ों एवं रैलिंग पर बैठे हुए थे। उन्होंने एंटीजन जांच कराई थी और उन्हें एक घंटे बाद जांच रिपोर्ट मिली। इनके आसपास से भी लोगों को आवगमन लगा रहा। लिहाजा उनके संक्रमित होने पर अन्य लोगों के भी कोरोना की चपेट में आने की आशंका हो गई है। खास तौर पर सुजाता के मामले में इसकी संभावना काफी अधिक है।


15 से अधिक गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में किया जाता है स्थानांतरित
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में कोरोना के आने वाले समस्त गंभीर मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। यहां आईसीयू युक्त 15 ही बेड है और ये बेड नियमित तौर पर भरे रहते है। इससे अधिक मरीज गंभीर होने पर उन्हें दूसरे अस्पतालों में भेजा जाता है। ऐसे मरीजों को दूसरे अस्पतालों में ले जाने के लिए यहां एंबुलेंस तैनात रहती है। एंबुलेंस कर्मचारियों के अनुसार अस्पताल से रोजाना चार-पांच मरीजों को दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित किया जाता है।
 

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