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नई मुसीबत : कोरोना मरीजों में मिला नया संक्रमण, पेट में होता है दर्द, कारणों का पता नहीं
Wed, 30 Jun 2021 07:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 30 Jun 2021 07:11 AM IST
सार
- देश में मिले साइटोमेगालों वायरस के पांच मरीज, एक की मौत
- दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती, कोरोना मरीजों में मल के रास्ते हो रही ब्लीडिंग
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- फोटो : iStock
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विस्तार
फंगस के बाद दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ने अब कोरोना मरीजों में साइटोमेगालो वायरस (सीएमवी) मिलने का खुलासा किया है। अब तक देश के पहले पांच मरीज यहां भर्ती हो चुके हैं। कोरोना का इलाज लेने के बाद इन मरीजों को पेट में दर्द और मल में खून बहने की परेशानी को लेकर भर्ती किया गया है। इनमें से एक मरीज की मौत भी हो चुकी है।
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डॉक्टरों के अनुसार कोरोना संक्रमण के चलते जिन मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता कम है उनमें फंगस के काफी मामले अब तक देखने को मिल चुके हैं। यह सिलसिला लगातार जारी है लेकिन अब कम प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में सीएमवी संक्रमण भी मिल रहा है। हालांकि अभी तक इसके कारणों का पता नहीं चल पाया है।
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अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. अनिल अरोड़ा ने बताया कि दूसरी लहर के दौरान संक्रमितों में सीएमवी के मामले अचानक से सामने आने लगे हैं। यह स्थिति पिछले 45 दिन में ही सामने आई है। उपचार के 20 से 30 दिन बाद मरीज पेट में दर्द और मल में खून बहने की परेशानियों के साथ पहुंचे हैं। ऐसे पांच मरीजों में फिलहाल कोरोना का संकेत नहीं है। उन्होंने बताया कि इन मरीजों को लेकर जब चिकित्सीय अध्ययनों को देखा गया तो देश में अब तक ऐसे मामले सामने नहीं आए हैं। पहली बार इन मरीजों का पता चला है। यह सभी मरीज दिल्ली और आसपास के राज्यों से हैं।
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कमजोर इम्यून सिस्टम वालों के लिए खतरा
उन्होंने कहा कि फंगस की तरह इसमें भी स्टेरॉयड युक्त दवाओं का अधिक इस्तेमाल बड़ी वजह मिल सकता है क्योंकि ये दवाएं प्रतिरोधक क्षमता को दबा देती हैं और उन्हें असामान्य संक्रमणों के लिए अतिसंवेदनशील बनाती हैं। साइटोमेगालो वायरस 80 से 90 फीसदी भारतीय आबादी में बिना कोई नुकसान पहुंचाए मौजूद रहते है, क्योंकि हमारी प्रतिरक्षा इतनी मजबूत है कि इसे चिकित्सकीय रूप से महत्वहीन बना सकती है।
एंटीवायरल थैरेपी के जरिए सफल रहा उपचार
गंगाराम अस्पताल में भर्ती इन पांचों मरीजों की आयु 30 से 70 वर्ष के बीच है। इनमें से चार मरीजों को मल में खून आने की परेशानी है और एक मरीज को आंतों में रुकावट की समस्या है। डॉक्टरों ने यहां तक बताया है कि दो मरीजों की हालत काफी नाजुक है क्योंकि अत्यधिक खून बह रहा है। एक मरीज को दाहिने तरफ कोलन की इमरजेंसी सर्जरी की तुरंत आवश्यकता थी। जबकि दूसरे मरीज की मौत हो गई। हालांकि राहत की बात यह भी है कि चार में से तीन मरीजों को एंटीवायरल थेरेपी के जरिए उपचार सफल रहा है।