कल की दिल्ली : राजधानी में कम होंगी चुनौतियां, बढ़ेंगी सहूलियतें, नई नीति मंजूर
- घर के आसपास ही मिलेगी मेट्रो, बस, मॉल और दफ्तर जैसी बुनियादी सुविधाएं
- डीडीए की बैठक में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट की संशोधित नीति को मंजूरी
- पहले चरण में विकसित किए जाएंगे 12 मल्टी मॉडल हब
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घर से निकलते ही, कुछ दूर ही चलते ही...। दिल्लीवालों को उनकी रिहायश के इर्द-गिर्द ही मेट्रो, बस, मॉल्स, दफ्तर समेत तमाम बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपराज्यपाल ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) प्लान के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत पहले फेज में दिल्ली में 12 मल्टी मॉडल हब विकसित किए जाएंगे, जिससे रिहायश के नजदीक ही लोगों की दैनिक जरूरतें पूरी हो सकें। डीडीए का मानना है कि इस पहल से सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी और विकास की रफ्तार बढ़ेगी। टीओडी लागू होने से प्रदूषण में कमी के साथ-साथ गंतव्य तक पहुंचने के लिए ट्रैफिक जाम की समस्या भी दूर होगी।
उपराज्यपाल और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अध्यक्ष अनिल बैजल की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। इससे पहले मास्टर प्लान-2021 के तहत केंद्र सरकार ने दिसंबर, 2020 में दिल्ली के लिए टीओडी नीति को प्रारंभिक स्वीकृति दे दी थी। इसके बाद डीडीए ने दिल्ली मेट्रो, एनसीआरटीसी, डीआईएमटीएस, रेलवे, डीआईएमटीएस के अलावा दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट डेवलपर्स से परामर्श के बाद संशोधित प्रारूप पेश किया।
संशोधित प्लान के तहत आनंद विहार बस अड्डा, कश्मीरी गेट और सराय काले खां-हजरत निजामुद्दीन पर तीन नए ट्रांजिट हब बनाए जाएंगे। नौ अतिरिक्त ट्रांजिट हब का भी प्रावधान किया जाएगा, ताकि दिल्ली के सभी कोनों तक दिल्लीवासियों को टीओडी का फायदा मिल सके।
रिहायशी क्षेत्रों के नजदीक परिवहन सुविधाओं को एकीकृृत किया जाएगा, ताकि आवागमन में सुविधा बढ़े। दिल्लीवासी अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन विकल्पों को अपनाएं, इसके लिए भी मल्टी मॉडल इंट्रीग्रेशन किया जाएगा। इससे लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए न तो अधिक दूरी तय करनी होगी और न ही देरी की चिंता सताएगी। दिल्ली में जमीन की सीमित उपलब्धता की वजह से भवन निर्माण में उर्ध्वाधार विकास (वर्टिकल) को तवज्जो दी जाएगी।
जाम और प्रदूषण से मिलेगी राहत
टीओडी के लागू करते वक्त इस बात का खास तौर पर ध्यान रखा जाएगा कि मेट्रो स्टेशनों, बस अड्डा के इर्द-गिर्द ही बहुमंजिला इमारत का निर्माण हो। प्रस्तावित भवनों में दफ्तर, आउटलेट्स, वाहनों की पार्किंग समेत तमाम बुनियादी सुविधाओं को इस तरह विकसित किया जाएगा। घर और दफ्तर के बीच दूरी कम रहे, इसे ध्यान में रखते हुए नजदीकी क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा। रिहायशी क्षेत्रों से कम दूरी पर मेट्रो स्टेशन और बस की सुविधा होने की वजह से दिल्लीवासी धीरे-धीरे सार्वजनिक परिवहन को अपनाने लगेंगे। इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी, जिससे न जाम लगेगा और न ही प्रदूषण बढ़ेगा।
मेट्रोलाइट और मेट्रो नियो का बढ़ेगा नेटवर्क
मेट्रो और रेलवे स्टेशनों के अलावा संशोधित टीओडी नीति में बीआरटीएस, एलआरटी, मेट्रो लाइट और नियो मेट्रो के विकास की संभावनाएं और बढ़ जाएंगी। फिलहाल दिल्ली में एक मेट्रोलाइट को मंजूर किया गया है, लेकिन भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ और कॉरिडोर भी विकसित करने की संभावनाएं और बढ़ जाएंगी। कम खर्च में छोटी दूरी के लिए नियो और मेट्रोलाइट परियोजनाओं के विस्तार को भी नई रफ्तार मिलेगी।
20 फीसदी हरित क्षेत्र होगा जरूरी
टीओडी नीति के तहत विकसित किए वाले क्षेत्रों में खुले स्थान होने के साथ-साथ हरित क्षेत्र का भी होना जरूरी होगा। इनके विकास के लिए कुल 30 फीसदी क्षेत्र होगा। इसमें 20 फीसदी ग्रीन स्पेस का होना भी जरूरी है। सार्वजनिक स्थलों को जीवंत बनाए रखने के लिए गैर-मोटर चालित वाहनों (साइकिल, ई वाहन) को बढ़ावा दिया जाएगा। कम दूरी के लिए इन वाहनों के इस्तेमाल से पर्यावरण को भी बेहतर बनाए रखना संभव होगा।
ये हैं 12 मल्टी मॉडल ट्रांजिट हब
- कश्मीरी गेट
- निजामुद्दीन-सराय काले खां
- आनंद विहार
- नई दिल्ली रेलवे स्टेशन
- द्वारका सेक्टर -21 मेट्रो स्टेशन
- द्वारका सेक्टर -8 से सेक्टर-14 मेट्रो स्टेशन कॉरिडोर
- जंगपुरा आरआरटीएस स्टेशन
- हैदरपुर बादली मोड़ मेट्रो स्टेशन (मुकरबा चौक)
- रोहिणी सेक्टर-18 मेट्रो स्टेशन
- मुकुंदपुर मेट्रो स्टेशन
- कड़कड़डूमा( पिंक और ब्लू लाइन) के मेट्रो स्टेशन
- त्रिलोकपुरी मेट्रो स्टेशन