दिल्ली का दर्द : ठंड आते ही जहरीली होने लगती हैं हवाएं, घुटने लगता है दम
वातावरण में इस बड़े बदलाव के पीछे कई वजह हैं। सबसे बड़ा कारण यह है कि तापमान कम होने के साथ अलग-अलग स्रोतों से निकलने वाली धूल और धुआं धरती की सतह के नजदीक जमा होने लगता है। जैसे ही कड़ाके की ठंड पड़ने लगती हैं तो हवा दमघोंटू हो जाती है।
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ठंड की दस्तक होते ही राजधानी की वायु गुणवत्ता खराब होने लगती है। बारिश के दौरान जो स्वच्छ हवा मखमली अहसास कराती है वही, सर्दी में दम घोंटने को तैयार रहती है। धूल, धुआं और हवा का ऐसा जहरीला ‘कॉकटेल’ बनता है कि लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो जाते हैं। खासकर, अस्थमा रोगी।
वातावरण में इस बड़े बदलाव के पीछे कई वजह हैं। सबसे बड़ा कारण यह है कि तापमान कम होने के साथ अलग-अलग स्रोतों से निकलने वाली धूल और धुआं धरती की सतह के नजदीक जमा होने लगता है। जैसे ही कड़ाके की ठंड पड़ने लगती हैं तो हवा दमघोंटू हो जाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली की हवा को सबसे अधिक वाहनों से निकलने धुआं प्रदूषित करता है। इसका ज्यादातर हिस्सा पीएम2.5 (धूल के महीन कण) के तौर पर आता है। हवा को प्रदूषित करने में इसकी हिस्सेदारी 41 फीसदी है। यह आसानी से सांस द्वारा लोगों के शरीर में पहुंच जाता है और बीमार बना देता है। 45 फीसदी प्रदूषण के लिए सड़कों पर उड़ने वाली धूल यानी पीएम10 है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली में कई ऐसी जगह हैं, जहां सड़क किनारे कच्चे रास्ते हैं। जाम से बचने के लिए कई बार दुपहिया वाहन चालक कच्चे रास्ते पर वाहनों को उतार लेते हैं और उनके चलने पर सड़क से अधिक मात्रा में धूल उड़ती है।
सफर इंडिया के संस्थापक परियोजना निदेशक गुरफान बेग के मुताबिक, तीन साल पहले उद्योगों से धूल के महीन कणों पीएम2.5 का हिस्सा 18 फीसदी था। 2021 में यह 14 फीसदी हो गया है। इसका प्रमुख कारण उद्योगों का पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) में परिवर्तित होना है।
हालांकि, तीन साल के भीतर जैव ईंधन की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2018 में जैव ईंधन की हिस्सेदारी तीन फीसदी तक थी, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 10 फीसदी तक पहुंच गई है। इसके अलावा 35 फीसदी प्रदूषण अन्य कारणों से होता है।
वाहनों से होने वाला प्रदूषण
- वाहनों से निकलने वाले धुएं से पीएम2.5 का हिस्सा 41 फीसदी
- दुपहिया वाहन : 24 फीसदी
- स्कूटर : 10 फीसदी
- बाइक : 14 फीसदी
- बस, ट्रक और कार : 17 फीसदी
विशेषज्ञों ने शीतकालीन कार्य योजना को सराहा
हर वर्ष दिल्ली में पराली, वाहनों के धुएं और अन्य कारणों की वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। ऐसे में सिर्फ सीजनल नहीं बल्कि लंबे समय के लिए समस्या का हल करना चाहिए। दिल्ली के लिए शीतकालीन कार्य योजना बेहतर है।
- आशीष चंचल, कैंपेनर, ग्रीनपीस इंडिया के क्लाईमेट
दिल्ली के लिए शीतकालीन कार्य योजना बेहतर है, लेकिन यह योजना क्षेत्रीय स्तर पर भी लागू होनी चाहिए।
- वी विनोज, प्रोफेसर, आईआईटी भुवनेश्वर
अन्य विकल्प भी चाहिए : गांगुली
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवार्योमेंट एंड वॉटर के कार्यक्रम का नेतृत्व कर रही तनुश्री गांगुली ने कहा कि दिल्ली में गरीब तबके के पास जैव ईंधन के अलावा अन्य विकल्प होना चाहिए। इससे भी प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।