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स्वास्थ्य, इलाज और अदालत: दिल्ली HC ने मांगी सोनम वांगचुक की हेल्थ रिपोर्ट, एम्स-सफदरजंग के डॉक्टर होंगे पेश

Mon, 20 Jul 2026 04:01 PM IST
विकास कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Mon, 20 Jul 2026 04:01 PM IST
सार

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और आशीष दीक्षित पक्ष रख रहे हैं, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल दलीलें पेश कर रहे हैं।

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Delhi High Court hears Gitanjali plea in Sonam Wangchuk case
दिल्ली हाईकोर्ट में हुई सोनम वांगचुक के मेडिकल रिपोर्ट पर सुनवाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो द्वारा दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और स्टैंडिंग काउंसिल आशीष दीक्षित ने पक्ष रखा, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने जिरह की।

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वांगचुक को जबरन ले गए अस्पताल, परिवार को नहीं दी रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान अखिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि 17 जुलाई तक सोनम वांगचुक के पोटेशियम का स्तर सामान्य रेंज में था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि बिना परिवार की सहमति के वांगचुक को जबरन सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया और उनकी जांच रिपोर्ट परिजनों के साथ साझा नहीं की गई। मांग करने के बावजूद डिजिटल या फिजिकल रूप से रिपोर्ट देने से मना कर दिया गया।

इस पर हाईकोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि वांगचुक के सभी मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट परिजनों से साझा की जाएगी, हालांकि अदालत विशेषज्ञ राय (एक्सपर्ट ऑपिनियन) पर टिप्पणी नहीं कर सकती।

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अस्पताल बदलाव और जबरन इलाज का आरोप
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को सूचित किया कि वांगचुक इस समय आईसीयू में नहीं हैं, पूर्ण होश में हैं और पत्र भी लिख रहे हैं। उन्होंने मांग रखी कि वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल (जैसे मेदांता) में जाने दिया जाए। वकील ने कहा कि बिना उनकी पसंद के चिकित्सकों द्वारा जबरन मेडिकल हस्तक्षेप किया गया।

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केंद्र सरकार का रुख: सार्वजनिक सुरक्षा का हवाला
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सामान्य परिस्थितियों में इलाज चुनना या मना करना व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन जब विरोध प्रदर्शन (प्रोटेस्ट) के दौरान किसी व्यक्ति के कदम से अन्य लोगों की जान प्रभावित होने का जोखिम हो, तो यह अधिकार लागू नहीं रहता। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति अगर प्रदर्शन स्थल पर जान जोखिम में डाल रहा है जिससे व्यापक प्रभाव पड़ सकता है, तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

कोर्ट का निर्देश: रिपोर्ट सौंपने और डॉक्टरों की पेशी के आदेश
पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से वांगचुक की वर्तमान हेल्थ रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने को कहा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि सफदरजंग और एम्स अस्पतालों की लैब में कराई गई सभी पैथोलॉजी रिपोर्ट याचिकाकर्ता को तुरंत उपलब्ध कराई जाएं।

एम्स के निदेशक और वांगचुक का इलाज कर रही टीम के प्रमुख डॉ. अक्षय कल व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हों। मामले की अगली सुनवाई कल होगी।

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