Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने चीनी वीजा घोटाले में कार्ति चिदंबरम के मुकदमे पर सुनवाई टाली, जानें पूरा मामला
दिल्ली हाई कोर्ट ने कथित चीनी वीज़ा घोटाले मामले में सबूत दर्ज करने की प्रक्रिया टालने का निर्देश दिया है। इस मामले में कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम पर भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप हैं।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने कथित चीनी वीज़ा घोटाले मामले में सबूत दर्ज करने की प्रक्रिया टालने का निर्देश दिया है। इस मामले में कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम पर भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। न्यायाधीश मनोज जैन ने ट्रायल कोर्ट को 8 अक्तूबर तक गवाहों के बयान दर्ज न करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने सीबीआई , कार्ति चिदंबरम और अन्य आरोपियों की अलग-अलग याचिकाओं पर यह आदेश दिया। इन याचिकाओं में मामले में आरोप तय किए जाने को चुनौती दी गई थी। कार्ति और अन्य आरोपियों ने आरोपों को इस आधार पर चुनौती दी कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। वहीं, सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त आरोप तय करने की मांग की है।
सुनवाई के दौरान, सीबीआई के वकील ने मुकदमे को चलने देने की अनुमति मांगी। उन्होंने जांच एजेंसी को कुछ बुजुर्ग गवाहों के बयान दर्ज करने की अनुमति देने का आग्रह किया। कार्ति के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने याचिकाओं पर सुनवाई तक मुकदमे पर रोक लगाने का आग्रह किया। हाईकोर्ट ने पहले ही कार्ति की याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा था। सांसद के वकील ने कहा था कि 50 लाख रुपये की रिश्वत के बावजूद कोई लोक सेवक आरोपी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरा मामला एक सरकारी गवाह के बयान पर आधारित है।
आरोपों का आधार
23 दिसंबर, 2025 को ट्रायल कोर्ट ने कार्ति चिदंबरम और छह अन्य के खिलाफ आरोप तय किए थे। इसमें आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल थीं। कार्ति ने अपनी याचिका में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर न्यायिक दिमाग नहीं लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि कोई रिश्वत या साजिश नहीं थी, जैसा जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है।
सीबीआई की जांच
वकील अक्षत गुप्ता के माध्यम से दायर याचिका में रिश्वत के सबूत न होने की बात कही गई। इसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता द्वारा 50 लाख रुपये की मांग का कोई आरोप या सबूत नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया कि वीज़ा का 'पुन: उपयोग' एक मौजूदा प्रक्रिया थी। सीबीआई ने 2022 में प्राथमिकी दर्ज कर दो साल बाद आरोप पत्र दायर किया था। सीबीआई ने आरोप लगाया कि पंजाब स्थित टीएसपीएल ने चीनी कंपनी शेडोंग इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्प को ताप विद्युत संयंत्र परियोजना का काम बाह्य स्रोत से कराया था।