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खुशखबरी: दिल्ली सरकार ने घटाईं कोरोना आरटी पीसीआर की दरें, घर बैठे जांच कराना पड़ सकता है महंगा
Wed, 04 Aug 2021 06:28 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 04 Aug 2021 06:28 PM IST
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : ANI
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कोरोना वायरस की जांच कराने के लिए सरकार ने एक बार फिर इसकी कीमतों को कम किया है। इससे पहले दिल्ली सरकार ने फरवरी माह में कोविड-19 की जांच को मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाया था।
बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नई कीमतों का आधिकारिक आदेश पत्र सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सरकार ने आम आदमी के लिए कोरोना वायरस की जांच कीमतों को कम किया है। अब प्राइवेट अस्पताल या किसी जांच केंद्र पर अधिकतम 500 रुपये प्रति आरटी पीसीआर जांच के लिए जा सकते हैं।
वहीं अगर कोई घर बैठे जांच कराना चाहता है तो उसके लिए प्राइवेट जांच केंद्र अधिकतम 700 रुपये का शुल्क ले सकते हैं। इनके अलावा सरकार ने अपने अस्पतालों को लेकर भी प्राइवेट केंद्रों की कीमतें तय की हैं। क्षमता से अधिक सैंपल हो जाने पर अस्पतालों के नजदीक प्राइवेट केंद्रों पर जांच के लिए भेजा जाता है। इसके लिए सरकार प्रति सैंपल 300 रुपये देगी। यह सभी शुल्क आरटी पीसीआर जांच को लेकर तय किए गए हैं।
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इनके अलावा अगर रैपिड एंटीजन जांच की बात करें तो इसके लिए सरकार ने आम आदमी या फिर अस्पताल सभी के लिए अधिकतम 300 रुपये तय किए हैं। हालांकि रैपिड एंटीजन जांच का इस्तेमाल चिकित्सीय तौर पर नहीं किया जाता है लेकिन हर दिन हजारों की तादाद में सैंपल बढ़ने की वजह से दिल्ली सरकार एंटीजन जांच का भी 50 फीसदी तक इस्तेमाल कर रही है।
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बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नई कीमतों का आधिकारिक आदेश पत्र सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सरकार ने आम आदमी के लिए कोरोना वायरस की जांच कीमतों को कम किया है। अब प्राइवेट अस्पताल या किसी जांच केंद्र पर अधिकतम 500 रुपये प्रति आरटी पीसीआर जांच के लिए जा सकते हैं।
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वहीं अगर कोई घर बैठे जांच कराना चाहता है तो उसके लिए प्राइवेट जांच केंद्र अधिकतम 700 रुपये का शुल्क ले सकते हैं। इनके अलावा सरकार ने अपने अस्पतालों को लेकर भी प्राइवेट केंद्रों की कीमतें तय की हैं। क्षमता से अधिक सैंपल हो जाने पर अस्पतालों के नजदीक प्राइवेट केंद्रों पर जांच के लिए भेजा जाता है। इसके लिए सरकार प्रति सैंपल 300 रुपये देगी। यह सभी शुल्क आरटी पीसीआर जांच को लेकर तय किए गए हैं।
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इनके अलावा अगर रैपिड एंटीजन जांच की बात करें तो इसके लिए सरकार ने आम आदमी या फिर अस्पताल सभी के लिए अधिकतम 300 रुपये तय किए हैं। हालांकि रैपिड एंटीजन जांच का इस्तेमाल चिकित्सीय तौर पर नहीं किया जाता है लेकिन हर दिन हजारों की तादाद में सैंपल बढ़ने की वजह से दिल्ली सरकार एंटीजन जांच का भी 50 फीसदी तक इस्तेमाल कर रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भूपिंदर सिंह भल्ला ने सभी जिला प्रशासन और अस्पताल निदेशक को यह पत्र लिखते हुए 24 घंटे के अंदर नए कीमतें लागू होने और इस बारे में आईसीएमआर की वेबसाइट पर भी जानकारी अपडेट होने के निर्देश जारी किए हैं।
500 रुपये फिर भी बहुत ज्यादा
स्वस्थ्य भारत अभियान के संयोजक आशुतोष कुमार सिंह का कहना है कि कोरोना महामारी की शुरूआत में आरटी पीसीआर जांच के लिए 2400 रुपये शुल्क लिया जाता था लेकिन जब अस्पतालों में लैब की संख्या और स्टाफ बढ़ा। साथ ही जांच किट्स का उत्पादन घरेलु स्तर पर बढ़ता गया तो नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने सभी राज्यों को कीमतें कम करने की सलाह दी थी ताकि लोगों पर फिजुलखर्च का भार न आ सके।
इसके बाद अलग अलग राज्यों ने अपने अनुसार कीमतें तय कीं। बाद में दिल्ली सरकार ने 800 रुपये इसका शुल्क रखा लेकिन कई ऑनलाइन साइट पर एक हजार रुपये तक में यह जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि अभी लाखों की तादाद में किट्स भारत में ही बन रही हैं। ऐसे में 500 रुपये भी एक व्यक्ति के लिए काफी ज्यादा हैं। सरकार को इसे 200 से 300 रुपये तक अधिकतम रखना चाहिए।
500 रुपये फिर भी बहुत ज्यादा
स्वस्थ्य भारत अभियान के संयोजक आशुतोष कुमार सिंह का कहना है कि कोरोना महामारी की शुरूआत में आरटी पीसीआर जांच के लिए 2400 रुपये शुल्क लिया जाता था लेकिन जब अस्पतालों में लैब की संख्या और स्टाफ बढ़ा। साथ ही जांच किट्स का उत्पादन घरेलु स्तर पर बढ़ता गया तो नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने सभी राज्यों को कीमतें कम करने की सलाह दी थी ताकि लोगों पर फिजुलखर्च का भार न आ सके।
इसके बाद अलग अलग राज्यों ने अपने अनुसार कीमतें तय कीं। बाद में दिल्ली सरकार ने 800 रुपये इसका शुल्क रखा लेकिन कई ऑनलाइन साइट पर एक हजार रुपये तक में यह जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि अभी लाखों की तादाद में किट्स भारत में ही बन रही हैं। ऐसे में 500 रुपये भी एक व्यक्ति के लिए काफी ज्यादा हैं। सरकार को इसे 200 से 300 रुपये तक अधिकतम रखना चाहिए।