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दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति का किया बचाव, अदालत में कहा- जनहित में है यह

Fri, 16 Jul 2021 05:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 16 Jul 2021 05:49 AM IST
सार

सरकार ने कहा कि नई आबकारी नीति का उद्देश्य भ्रष्टाचार कम करना और शराब व्यापार में उचित प्रतिस्पर्धा उपलब्ध कराना है

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  Delhi government defended the new excise policy
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

दिल्ली सरकार ने बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय के समक्ष नई आबकारी नीति का बचाव करते हुए इसे जनहित में बताया। सरकार ने कहा नई आबकारी नीति 2021-22 का मकसद भ्रष्टाचार कम करना और शराब व्यापार में उचित प्रतिस्पर्धा उपलब्ध कराना है।

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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने आबकारी नीति को चुनौती देने वाली नई याचिका पर केंद्र सरकार तथा दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने नीति पर रोक लगाने से इंकार करते हुए निविदा के लिए आवेदन की 20 जुलाई की अंतिम तारीख को भी आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया।
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वहीं सरकार ने नीति के खिलाफ दायर याचिका में लगाए गए आरोपों पर कहा कि यह आशंकाएं केवल काल्पनिक हैं। सरकार ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को लेकर नीति पर जारी विरोध पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए  लिखित जवाब दाखिल करेगी।
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नई आबकारी नीति को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दाखिल की गईं है। अदालत ने पहले भी किसी तरह का रोक आदेश पारित करने से इंकार कर दिया था।
बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान नीति का विरोध कर रहे एक वकील ने तर्क रखा कि नई नीति दिल्ली को 32 क्षेत्रों में विभाजित करती है। इसके तहत बाजार में केवल 16 लोगों को ही अनुमति दी जा रही है और यह एकाधिकार को बढ़ावा देगी।

पीठ ने उनके तर्क पर असहमति जताते हुए टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा नियंत्रण लोक कल्याण के लिए है और न कि उनके लिए जो शराब के व्यापार में हैं। पीठ ने कहा नियंत्रण लोक कल्याण के लिए है न कि आपके कारोबार को चलाने के लिए। यह बड़े पैमाने पर जनता के लिए है। यह आपके व्यावसाय चलाने के लिए या आपको मुश्किल में डालने के लिए नहीं है।

दिल्ली सरकार की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि कुछ लोग नीति का लगातार विरोध कर रहे है और वे जल्द ही सरकार का पक्ष रखेंगे। नीति भ्रष्टाचार को कम करने व निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रदान करने के लिए बनाई गई है।

पीठ नई आबकारी नीति को आशियान टावर्स एंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड और राजीव मोर्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से दी गई चुनौती याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में आरोप लगाया है कि यह अवैध, अनुचित, मनमानी और दिल्ली आबकारी कानून 2009 का उल्लंघन करती है।
 

प्रवेश वर्मा को झटका

हाई कोर्ट ने गुरुवार को नई आबकारी नीति 2021-22 के तहत शराब की होम डिलीवरी को भाजपा सांसद परवेश साहिब सिंह वर्मा की चुनौती याचिका पर नोटिस जारी करने से इंकार कर दिया। अदालत ने उन्हें याचिका में आम आदमी पार्टी को पक्ष बनाने पर आपत्ति जताते हुए उसे सूची से हटाने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने आम आदमी पार्टी को पक्ष बनाने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आप किसी राजनीतिक दल में क्यों शामिल हों? अदालत ने कहा इस प्रकार की याचिका पर वे नोटिस जारी नहीं कर रहे हैं। अदालत ने वर्मा को पक्षकारों के संशोधित सूची जारी करने का निर्देश देते हुए सुनवाई नौ अगस्त तक स्थगित कर दी।

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह उनकी पार्टी के घोषणापत्र में था। आप याचिका से उनका नाम हटाए। वर्मा के वकील ने दलील दी कि शराब की होम डिलिवरी संविधान और जन स्वास्थ्य के अनुच्छेद 47 के खिलाफ है। संविधान के अनुच्छेद 47 में कहा गया है कि जन स्वास्थ्य में सुधार करना और मादक पेय पदार्थों के सेवन पर रोक लगाने का प्रयास करना राज्य का कर्तव्य है।

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