Delhi: घाटों में उमड़ा आस्था का सैलाब, छठ व्रतियों ने यमुना में दिया अस्तांचलगामी सूर्य को अर्घ्य
छठ महापर्व के तीसरे दिन रविवार को दोपहर से ही छठव्रती यमुना किनारे आईटीओ (यमुना घाट), कश्मीरी गेट (यमुना बाजार घाट) व अन्य जगह पर बनाए गए कृत्रिम घाट पर जुटने शुरू हो गए। धीरे-धीरे घाटों पर भारी भीड़ उमड़ी, जिस कारण प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम घाटों पर जगह नहीं बची और लोग अर्घ्य देने के लिए यमुना में उतर गए।
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कोरोना महामारी के बाद पूरे उत्साह के साथ मनाए जा रहे महापर्व छठ के अवसर पर व्रतियों की भीड़ के सामने प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम घाट छोटे पड़ गए। मजबूरन व्रतियों को यमुना में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देना पड़ा। भीड़ के चलते प्रशासन भी बेबस नजर आया।
छठ महापर्व के तीसरे दिन रविवार को दोपहर से ही छठव्रती यमुना किनारे आईटीओ (यमुना घाट), कश्मीरी गेट (यमुना बाजार घाट) व अन्य जगह पर बनाए गए कृत्रिम घाट पर जुटने शुरू हो गए। धीरे-धीरे घाटों पर भारी भीड़ उमड़ी, जिस कारण प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम घाटों पर जगह नहीं बची और लोग अर्घ्य देने के लिए यमुना में उतर गए।
हालांकि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यमुना में छठ पर्व बनाने के लिए प्रतिबंध लगा रखा है। बावजूद इसके भीड़ यमुना में आने लगी, हालांकि पुलिस व प्रशासन ने रोकने की कोशिश जरूर की, लेकिन भीड़ के सामने फेल हो गए। छठव्रतियों की माने तो आईटीओ स्थित यमुना घाट पर शाम करीब चार बजे से लोग जुटना शुरू हो गए थे। अस्त होते सूर्य से पूर्व व्रतियों ने पूजा शुरू कर दी थी, जबकि कई लोग बनाए गए कृत्रिम घाट में उतरकर पूजा करने लगे।
कुछ ही देर में कृत्रिम घाट पूरी तरह से भर गया और बड़ी संख्या में लोगों को बाहर ही खड़ा रहना पड़े, जबकि समय निकला जा रहा था, ऐसे में लोगों ने यमुना किनारे लगाए गए बांस के बाड़ों को तोड़ दिया और यमुना के तट पर पहुंच गए। व्रतियों ने कहा कि अस्त हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यदि समय पर यमुना के तट पर नहीं आते हो पर्व का महत्व खत्म हो जाता। वहीं कश्मीरी गेट स्थित यमुना बाजार घाट पर भी कुछ ऐसा ही हुआ। वहां भी बनाया गया कृत्रिम घाट छोटा पड़ गया और लोग बाड़ों को तोड़कर यमुना में अर्घ्य देने के लिए उतर गए ।