फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi: Diesel cars are dissolving poison in Delhi air within six years

Air Pollution in Delhi : छह साल में ही दिल्ली की हवा में जहर घोल रही हैं डीजल कारें, अध्ययन में खुलासा

Wed, 31 Aug 2022 04:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 31 Aug 2022 04:23 AM IST
सार

Delhi:  हालांकि, अपनी उम्र सीमा के पूरा होने से पहले सिर्फ छह सालों में ही कारें वातावरण में जहर घोलना शुरू कर देती हैं। यह बात हाल ही में दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आई है। 

विज्ञापन
Delhi: Diesel cars are dissolving poison in Delhi air within six years
demo pic

विस्तार

राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार ने डीजल वाहनों के लिए 10 वर्ष की उम्र तय की है। हालांकि, अपनी उम्र सीमा के पूरा होने से पहले सिर्फ छह सालों में ही कारें वातावरण में जहर घोलना शुरू कर देती हैं। यह बात हाल ही में दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आई है। यह अध्ययन स्प्रींजर के पर्यावरण विज्ञान और प्रदूषण अनुसंधान(ईएसपीआर) जर्नल में प्रकाशित हुआ है। 

विज्ञापन


डीटीयू के पर्यावरणीय अभियांत्रिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राजीव कुमार मिश्रा ने बताया कि अध्ययन के लिए गाड़ियों की उम्र, माइलेज व रखरखाव को आधार बनाया गया था। साथ ही इसमें देश में कारें बेच रही पांच प्रमुख कंपनियों की डीजल गाड़ियों को शामिल किया गया। 
विज्ञापन


 इसमें वे सभी कारें थी, जो दिल्ली की अलग-अलग अथारिटी में पंजीकृत थीं। पता चला कि जिन गाड़ियों की उम्र छह साल से अधिक हो गई थी, वे कारें अधिक प्रदूषण कर रही थी। गाड़ियों की माइलेज भी प्रदूषण को लेकर प्रमुख जिम्मेदार पाई गई। जिन गाड़ियों की अच्छी देखभाल की गई थी, वे कारें कम प्रदूषण कर रही थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


अध्ययन में शामिल अभिनव पांडेय ने कहा कि अध्ययन में देखा गया कि भारत स्टेज-4 की गाड़ियां, जिनका रखरखाव अधिक रखा गया था, वे बीएस-3 की खराब श्रेणियां में रखी गई गाड़ियों से कम वातावरण को प्रदूषित कर रही थी। बीएस-4 श्रेणी के वाहन साढ़े सात साल पूरा होने के बाद मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे, जबकि बीएस-3 श्रेणी में नौ साल बाद वाहन मानकों को पूरा करने में विफल हो रहे थे।

इसी प्रकार बीएस-4 श्रेणी में वाहन 95 हजार किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद मानकों पर खरे नहीं उतरे। जबकि बीएस-3 श्रेणी में 1 लाख 25 हजार किलोमीटर चलने के बाद वाहन मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे। 


460 गाड़ियों पर किया गया था अध्ययन
डीटीयू के पर्यावरणीय विभाग ने अध्ययन के लिए दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों से पांच ब्रांड कंपनियों की डीजल की 460 गाड़ियों को शामिल किया गया था। करीब छह माह तक चले इस अध्ययन में गाड़ियों की उम्र, माइलेज व रखरखाव श्रेणी में डाटा इकट्ठा किया गया। वहीं, प्रदूषण के प्रमाणीकरण के लिए पहुंचने वाली गाड़ियों के पहुंचने के दौरान धुआं छोड़ने वाली वाहन चालकों से जानकारी ली गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed