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दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के एक आरोपी को अदालत ने रिहा किया

Thu, 09 Sep 2021 05:36 PM IST
Trainee Trainee पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Thu, 09 Sep 2021 05:36 PM IST
सार

आरोपी जावेद के खिलाफ चार लोगों ने याचिका दायर कर आरोप लगाए थे कि 25 फरवरी 2020 को उसने दंगाइयों की भीड़ में शामिल होकर उनके घरों-दुकानों और गोदामों में तोड़फोड़ और लूटपाट की।

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delhi court discharged a man involved in the north-east Delhi riots
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : गूगल

विस्तार

पिछले साल उत्तर-पूर्वी दंगों के एक आरोपी को रिहा करते हुए अदालत ने कहा कि भले ही सांप्रदायिक दंगों के मामलों पर अत्यंत संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए, लेकिन सामान्य सूझबूझ को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अतिरिक्त सेशन जज विनोद यादव ने बृहस्पतिवार, 9 सितंबर को सुनवाई के बाद दंगों के दौरान विस्फोटक पदार्थों से आग लगाकर क्षति पहुंचाने के आरोपी जावेद को रिहा करते कहा कि शिकायतकर्ताओं के बयान यह साबित नहीं करते कि आरोपी ने यह कृत्य किया था।

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जज ने कहा कि अदालत यह जानती है कि सांप्रदायिक दंगों को अत्यंत संवदेनशीलता के साथ लेना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम सामान्य ज्ञान को नजरअंदाज कर दें। यहां तक कि इस स्थिति में हमें रिकार्ड में उपलब्ध तथ्यों पर विचार कर विवेक का इस्तेमाल करना होगा।

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आरोपी जावेद के खिलाफ चार लोगों ने याचिका दायर कर आरोप लगाए थे कि 25 फरवरी 2020 को उसने दंगाइयों की भीड़ में शामिल होकर उनके घरों-दुकानों और गोदामों में तोड़फोड़ और लूटपाट की। अदालत ने इस तथ्य पर गौर किया कि घटना का न तो कोई चश्मदीद गवाह है, सीसीटीवी फुटेज न कोई फोटो। उन्होंने इस पर भी ध्यान दिया कि शिकायत में कहीं भी यह शब्द नहीं है कि भीड़ ने विस्फोटक पदार्थों से आग लगाकर क्षति पहुंचाई।

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जज ने कहा कि यदि प्राथिमक शिकायत में आग से क्षति (धारा 436) पहुंचाने की शिकायत नहीं है तो जांच एजेंसी शिकायतकर्ताओं के पूरक बयान दर्ज करके दोष को छिपा नहीं सकती है। जांच एजेंसी ने अदालत में जो  रिकार्ड पेश किया है, उसमें धारा 436 के आरोप कहीं साबित नहीं होते। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस धारा को छोड़कर अन्य सभी अपराधों में अदालती कार्यवाही की जा सकती है। गौरतलब है कि संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में फरवरी, 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे हुए थे, जिनमें  53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक घायल हो गए थे। 

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