दिल्ली: प्रदूषण के खिलाफ युद्ध का हुआ शंखनाद, अमेरिकी तकनीक से बना टावर, सीएम केजरीवाल ने किया उद्घाटनc
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण से लड़ने के लिए दिल्ली में देश का सबसे पहला स्मॉग टावर शुरू किया जा रहा है। यह अपने आप में एक नई तरह की तकनीक है।
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण से लड़ने के लिए दिल्ली में देश का सबसे पहला स्मॉग टावर शुरू किया जा रहा है। यह अपने आप में एक नई तरह की तकनीक है। आज तक देश में ऐसा टावर कभी नहीं लगाया गया। इस तरह से हवा साफ करने का प्रयास कभी नहीं किया गया। इस तकनीक को अमेरिका से आयात किया है। यह 24 मीटर ऊंचा टावर है।
यह स्मॉग टॉवर ऊपर से आसपास के एक किलोमीटर के दायरे की हवा को खींचेगा। इसके बाद इसमें नीचे जो पंखे लगे हैं, वहां से शुद्ध हवा निकलेगी। इसकी क्षमता लगभग एक हजार घन मीटर प्रति सेकेंड है। यानि यह स्मॉग टॉवर एक हजार घन मीटर हवा प्रति सेकेंड साफ करके बाहर छोडेगा। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि आसपास के एक किलोमीटर के दायरे के अंदर की हवा को यह साफ कर पाएगा।
अरविंद केजरीवाल के मुताबिक, अपनी तरह की नई तकनीक को अभी प्रायोगिक तौर पर देखा जा रहा है। इसकी लगातार निगरानी होगी। आईआईटी दिल्ली और आईआईटी बॉम्बे के विशेषज्ञ इस डाटा का विश्लेषण करेंगे। इससे पता चलेगा कि स्मॉग टावर हवा साफ करने में कितना कारगर है। अगर यह प्रयोग काफी प्रभावी होता है, तो फिर इस तरह के कई अन्य स्मॉग टावर पूरे दिल्ली के अंदर लगाए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि दो साल तक इसका विश्लेषण करेंगे। लेकिन प्रारंभिक ट्रैंड एक महीने बाद आने शुरू हो जाएंगे। टाटा प्रोजेक्ट्स ने इसको बनाया है और एनबीसीसी ने कंसल्टेंसी दिया है।
बारिश खत्म होते ही स्मॉग टावर को पूरी क्षमता के साथ चालू कर दिया जाएगा
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि बारिश खत्म होते ही स्मॉग टावर को पूरी क्षमता के साथ चालू कर दिया जाएगा। उसके बाद आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञ इसका विश्लेषण करेंगे और उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे। दिल्ली सरकार प्रदूषण के खिलाफ बहुत सारे मोर्चों पर काम कर रही है। लेकिन इसकी सफलता के आंकलन के बाद हमें एक तकनीकी सपोर्ट मिलेगा। इसके आधार पर दिल्ली के अन्य जगहों पर भी हम इस तरह के टॉवर लगा सकेंगे।
पूरी दिल्ली में टावर लगाने की है योजना
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए आजमाया जाने वाला यह पहला पायलट प्रोजेक्ट है। दोनों आईआईटी हवा के प्रवाह और पीएम-2.5 कणों में आई कमी के साथ संबंधित क्षेत्र में मौसमी दशाओं व भौगोलिक परिस्थितियों की मॉडलिंग कर रहा है। इससे मिलने वाले नतीजे के आधार पर आगे इस तरह के टावर पूरी दिल्ली में लगाने की सरकार की योजना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 में जितना प्रदूषण होता था, वह काफी घट गया है। पीएम-2.5 ही 2014 में 150 के करीब था और अब घट कर 100 के करीब आ गया है। उसी तरह, पीएम-10 भी 300 के करीब था और अब घट कर 150 के करीब आ गया है। इस तरह, पीएम-10 और पीएम-2.5 पहले से काफी कम हुआ है।
स्मॉग टावर की विशेषताएं
- जमीन से स्मॉग टावर की ऊंचाई 24.2 मीटर।
-स्मॉग टावर का प्लान एरिया 784.5 वर्ग मीटर। इसका प्रभाव करीब एक किमी के दायरे में होगा।
- टॉवर आरसीसी और स्टील संरचना से बना है।
-टावर ऊपर से हवा खींचेगा और रफ़ल्टर्ड हवा छोड़ेगा।
- पंखे के माध्यम से एक हजार घन मीटर प्रति सेकेंड फिल्टर हवा जमीन के पास छोड़ेगा।
- इसमें कुल 40 पंखे लगे हैं। 960 आरपीएम (रोटेशन प्रति मिनट) पंखे की गति।
- 16.1 मीटर प्रति सेकंड फैन की आउटलेट वेलोसिटी
- कुल फिल्टर की संख्या 5000 है।
- ईएसएस की क्षमता 1250 केवीए है।
- 25 घन मीटर प्रति सेकंड वायु प्रवाह दर है।
-कनॉट प्लेस के बाबा खड़गसिंह मार्ग पर लगाया गया है कि टावर।