फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi: 85% cancer patients are taking ayurvedic medicines

खुलासा : दिल्ली में कैंसर ग्रस्त 85 फीसदी रोगी ले रहे आयुर्वेदिक दवाओं का सहारा

Mon, 06 Sep 2021 05:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 06 Sep 2021 05:13 AM IST
सार

  • 39 प्रतिशत मरीज अपना रहे हैं प्राकृतिक चिकित्सा
  • दिल्ली में कैंसर रोगियों पर अध्ययन से हुआ खुलासा
  • एलोपैथिक दवा से इलाज कराने के बाद भी आयुर्वेदिक पर अधिक भरोसा

विज्ञापन
Delhi: 85% cancer patients are taking ayurvedic medicines
सांकेतिक चित्र

विस्तार

कैंसर का इलाज करा रहे 85 फीसदी लोग अपनी सामान्य दवाओं के अलावा आयुर्वेदिक उपचार का भी सहारा ले रहे हैं। 39 फीसदी रोगी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति अपना रहे हैं। रोगियों का मानना है कि इन उपचारों से उन्हें कोई दुष्प्रभाव नहीं हो रहा है। कैंसर के इलाज के लिए अस्पताल में आने से पहले और उसके बाद भी वह आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से खुद को स्वस्थ रख रहे हैं।

विज्ञापन


दिल्ली के राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं रिसर्च सेंटर में भर्ती मरीजों पर हुए शोध में यह बात सामने आई है। अस्पताल में कैंसर का इलाज करा रहे 15 से 88 वर्ष की आयु के 303 रोगियों को शोध में शामिल किया गया। इसमें पता चला कि इन मरीजों में से एक तिहाई से अधिक (104) उपचार के लिए एक्यूपंचर और नैचुरोपैथी का सहारा ले रहे हैं। इनमें से 61 फीसदी ने अस्पताल आने से पहले इन उपचारों को अपनाया था और 39 प्रतिशत अभी भी अपना रहे हैं। इन दोनों तरह के लोगों में 85 प्रतिशत ने आयुर्वेद को वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में चुना है।
विज्ञापन


अस्पताल के ओन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. विनीत तलवार ने बताया कि कैंसर का इलाज करा रहे यह मरीज एक्यूपंचर और नैचुरोपैथी जैसी चिकित्सा प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। मानक इलाज से पहले इन उपचारों का सहारा लेना भी कई बार कैंसर की जांच में देरी की वजह बनता है। यह दवाएं भारतीय लोगों के बीच उपचार के लोकप्रिय विकल्प हैं और कुछ प्रमुख अध्ययनों में इसका प्रमाण सामने आया है। हालांकि, इस तरह के उपचारों के उपयोग के लिए ओन्कोलॉजी के क्षेत्र में अधिक शोध की जरूरत है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


दुनियाभर में ऐसे उपचारों की स्वीकार्यता
दुनियाभर में इन उपचारों की लोकप्रियता में काफी वृद्धि हुई है। यूके में 2010 में किए गए इसी तरह के एक अन्य स्वास्थ्य सर्वेक्षण में पाया गया कि एक तिहाई से अधिक रोगियों ने निर्धारित दवाओं का उपयोग करते हुए किसी न किसी रूप में पूरक चिकित्सा का उपयोग किया। 

मनोवैज्ञानिक पहलू समझने की जरूरत
डॉ. तलवार ने बताया कि जो लोग कैंसर से पीड़ित थे और आयुर्वेदिक या प्राकृतिक चिकित्सा का सहारा ले रहे थे उनमें से 79 प्रतिशत तनाव और मनोवैज्ञानिक दबाव भी झेल रहे थे। कैंसर मरीज अपने परिवार या रिश्तेदारों के सुझाव और टीवी या इंटरनेट के माध्यम से मिल रही जानकारी से भी आयुर्वेदिक इलाज की तरफ बढ़ता है, लेकिन आधे लोग ही इससे संतुष्ट होते हैं।


कैंसर का रूप... 

  • दिल्ली में प्रति लाख 100 से ज्यादा महिलाएं कैंसर ग्रस्त हैं। इनकी मृत्युदर 54.2 फीसदी है। प्रति लाख 95 पुरुष कैंसर पीड़ित हैं। इनकी मृत्यु दर सर्वाधिक 63.7 फीसदी है। दिल्ली की महिलाओं में स्तन तो पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर सबसे ज्यादा मिला है।
  • 26 तरह का कैंसर भारतीय महिलाओं में मिला।
  • 25 तरह का कैंसर भारतीय पुरुषों में आ रहा सामने।
  • 1990 में कैंसर से मरीजों की मृत्युदर थी 4.5 फीसदी, जो अब बढ़कर दो गुना हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed