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दिल्ली : मांग के मुताबिक कार चुराने वाला ‘कार राजा’ गिरफ्तार, पांच मिनट में कर देता था गाड़ी गायब
Sun, 16 Jan 2022 03:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 16 Jan 2022 03:51 AM IST
सार
उत्तरी जिला की सिविल लाइंस थाना पुलिस ने आरोपी को दबोचा। चोरी की कारें यूपी, कश्मीर और दूसरे राज्यों में करता था सप्लाई।
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गिरफ्त में आरोपी...
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
उत्तरी जिला पुलिस ने एक ऐसे वाहन चोर को गिरफ्तार किया है जो कार चोरों की दुनिया में ‘कार राजा’ कहलाता है। उसका कार चोरी करने अंदाज दूसरों से अलग है। मांग के अनुसार उसे जिस कार को चुनाना होता है वह उसी मॉडल और कलर की पहले दूसरी गाड़ी की एचएसआरपी नंबर प्लेट चोरी करता है। इसके बाद कार चोरी करके उस पर पहले से चुराई गई नंबर प्लेट लगा देता है। इससे कार आसानी से खरीदने वाले तक पहुंचा दी जाती थी।
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पकड़े गए आरोपी की पहचान संगम विहार दिल्ली निवासी कुणाल उर्फ तनुज उर्फ विजय के रूप में हुई है। उसके पास चार लग्जरी गाड़ियां, भारी मात्रा में नंबर प्लेट, औजार और चाबियां बरामद हुईं। उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त सागर सिंह कलसी ने बताया कि 10 दिसंबर को सिविल लाइंस की हिल लेन निवासी स्वास्तिक अग्रवाल की घर के सामने से फॉरच्यूनर कार चोरी हुई थी। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर थाना प्रभारी अजय कुमार शर्मा ने टीम के साथ छानबीन शुरू कर दी। दो सप्ताह बाद पुलिस को पता चला कि स्वास्तिक की कार अंतरराज्जीय चोर कुणाल ने चुराई है। 11 जनवरी को उसके कश्मीरी गेट के पास मॉनेस्ट्री मार्केट आने का पता चला। पुलिस ने घेराबंदी कर शाम करीब छह बजे आरोपी कुणाल को दबोच लिया। उसकी निशानदेही एक क्रेटा और दो स्विफ्ट कार बरामद हुई।
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महज पांच मिनट में कोई भी कार चोरी कर लेता है कुणाल
पूछताछ में कुणाल ने बताया कि वह वर्ष 2013 से कार चोरी कर रहा है। उसके खिलाफ नौ मामले दर्ज हैं। वह चार बार जेल जा चुका है। आरोपी ने बताया कि घूमने के दौरान वह अपनी पसंद के हिसाब से कार के कलर और मॉडल की लिस्ट बना लेता था। उसके पास जिस कार की मांग आती थी उसी मॉडल और कलर की कार की नंबर प्लेट चोरी करता था।
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इसके बाद दूसरी कार चोरी करके उस पर चोरी की गई नंबर प्लेट लगा देता था। उसे कार चुराने में महज पांच मिनट लगते हैं। वह कार का शीशा तोड़कर उसका ईसीएम बदलकर वारदात को अंजाम देता था। चोरी की गई कार को वह जीपीएस या दूसरे कारणों से अलग-अलग पार्किंग में खड़ी करता था। जब उसे पूरा यकीन हो जाता था कि कोई उसके पीछे नहीं है तब रिसीवर को बुलाकर कार सौंप देता था। एक कार के बदले उसे 80 हजार से 1.15 लाख तक मिल जाते थे।
दक्षिणी दिल्ली के नामचीन कारोबारी थे पिता
कुणाल के दादा और पिता दिल्ली के बड़े कारोबारी थे। वह दक्षिण दिल्ली के एक नामचीन कान्वेंट स्कूल में दसवीं तक पढ़ा है। उसकी एक बेटी है। चोरी का धंधा छोड़ने की जिद करने पर उसने पत्नी को छोड़ दिया। वह छह माह पहले ही जमानत पर जेल छूटा था। देशभर के कार रिसीवरों से उसके संबंध हैं।