Delhi Metro : पक्षियों और पतंगों की डोर...मेट्रो की राह में मुश्किलें हर ओर
पक्षियों की तार से टक्कर, पतंग की डोर या तेज हवा के झोंके से मेट्रो की रफ्तार पर ब्रेक लग रहा है। जून में छह बार यात्रियों को सिर्फ इसलिए परेशान होना पड़ा कि इन वजहों से मेट्रो जहां-तहां थम गईं। ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) या तारों के क्षतिग्रस्त होने के कारण मेट्रो प्रबंधन भी चिंतित है। हालांकि, इन अड़चनों से पार पाने के लिए मेट्रो नेटवर्क पर 10 हजार बर्ड स्पाइक्स लगाए जाएंगे, जबकि ओएचई पर लगे पुराने कॉपर पिन को भी स्टेनलेस स्टील में बदला जा रहा है। अब तक 22,000 पिनों को बदला गया है। ब्लू और येलो लाइन पर पूर्ण वर्चुअल सिग्नलिंग प्रणाली को लागू करने के लिए दिल्ली मेट्रो अग्रसर है...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) का मानना है कि पक्षियों की ओएचई या तार से टक्कर, पतंग की डोर और तेज हवा के कारण संपर्क में आए तारों की वजह से पिछले दिनों सेवाएं प्रभावित हुईं।
जून में छह बार सेवाएं प्रभावित होने के बाद अब इन खामियों को दूर किया जा रहा है। पिछले दिनों ब्लू लाइन पर ओएचई के एक हिस्से से पक्षी के टकराने के कारण सेवाएं एक दिन में दो घंटे से अधिक देर तक प्रभावित रही थी। अन्य दिनों में ब्लू और येलो लाइन पर 15 मिनट से एक घंटे तक सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
कई बार तेज हवा के झोंके से कुछ चीजें उड़कर तार तक पहुंच जाती हैं और स्पार्किंग के कारण भी सेवाएं गड़बड़ा जाती हैं। दूसरी लाइनों पर भी चंद मिनटों के लिए जून में तीन बार सेवाएं प्रभावित रही हैं।
अक्सर इन वजहों से नेटवर्क होता है प्रभावित
- पक्षियों के ओएचई पर बैठने या टकराने से भी तार संपर्क में आते हैं
- पक्षी ओएचई पर बैठकर अपने लिए खाने की तलाश करते हैं। उनके उड़ान भरने पर कुछ चीजें गिरकर तारों के संपर्क में आ जाती हैं और इससे होने वाली स्पार्किंग से सेवाएं प्रभावित हो जाती हैं
- पतंगों के मांझे के कारण भी दो तारों के बीच बिजली का सीधा प्रवाह हो जाता है, जिससे स्पार्किंग होकर सेवाएं गड़बड़ा जाती हैं
- तेज हवा के झोंके के साथ कई बार अन्य अड़चनें आ जाती हैं
- सिग्नलिंग की समस्या के कारण भी समस्या उत्पन्न हो जाती है
खराबी आने के बाद ये होती हैं व्यवस्थाएं
- सेवाएं प्रभावित होने पर मेट्रो ट्रेनों का लूप में परिचालन किया जाता है
- इससे जिन दो स्टेशनों के बीच खराबी है, मेट्रो को शिफ्ट कर दिया जाता है
- मरम्मत होने तक अप और डाउन मेट्रो का सिंगल लाइन पर परिचालन होता है
- ओएचई में खराबी होने पर मरम्मत के लिए नजदीकी डिपो से टीमें बुलाई जाती हैं। अमूमन, ओएचई में खराबी होने पर आधे से एक घंटे का वक्त लगता है
- ओएचई में खराबी आने पर मेट्रो की आवाजाही को कुछ देर तक रोककर यात्रियों को नजदीकी स्टेशनों तक पहुंचाया जाता है। दो स्टेशनों को छोड़कर शेेष हिस्से पर सबसे पहले मेट्रो सेवाएं शुरू की जाती हैं
28 इंटरचेंज से पहुंच सकते हैं गंतव्य तक
सेवाएं प्रभावित होने पर यात्रियों को डीएमआरसी अपने ट्विटर हैंडल, मोबाइल के जरिये जानकारी साझा करता है। एप और वेबसाइट पर वास्तविक समय में यात्रियों को अपडेट किया जाता है, ताकि जरूरत होने पर दूसरे विकल्पों का चयन कर सकें। इस दौरान 28 इंटरचेंज स्टेशनों की सुविधा का उपयोग करके भी यात्री अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं।
समय की पाबंदी के मामले में मेट्रो अग्रणी
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन दुनिया के सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्कों में से एक है। समय की पाबंदी के लिहाज से 99.9 फीसदी के साथ दिल्ली मेट्रो का नाम दुनिया की अग्रणी मेट्रो में शुमार है। कॉमेट (2020-21) रिपोर्ट के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक सेवा की विश्वसनीयता के दृष्टिकोण से भी दिल्ली मेट्रो अग्रणी है।
लगाए जाएंगे 10 हजार बर्ड स्पाइक्स
- मेट्रो नेटवर्क में पक्षियों की अधिक मौजूदगी वाले 5000 बिंदुओं की पहचान कर ली गई है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए 10 हजार बर्ड स्पाइक्स लगाए जाएंगे
- अगले कुछ महीनों में 12,000 जगहों पर 30,000 और बर्ड स्पाइक्स लगेंगे
- ब्लू और वॉयलेट लाइन पर वर्चुअल सिग्नलिंग को किया जा रहा है अपग्रेड
- विद्युत प्रणाली को स्थायित्व देने के लिए ओएचई तारों पर कॉपर स्प्लिट पिन के बजाय स्टेनलेस स्टील पिन से बदला जा रहा है
- सिग्नलिंग केबल चोरी को रोकने के लिए किए जा रहे हैं उपाय
- तारों को तकनीकी तौर पर अनुकूल बनाने के लिए 1250 जगहों पर लगाए जा रहे हैं इंसुलेटर
- मेट्रो सेवाएं खराब होने पर शॉर्ट लूप में मेट्रो का संचालन किया जाता है। इसके लिए रेड और ब्लू लाइन पर 26 अतिरिक्त ओएचई स्विचिंग स्थान हैं
प्राकृतिक या बाहरी कारणों से पड़ा अधिक असर
डीएमआरसी के प्रधान कार्यकारी निदेशक (कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन) अनुज दयाल के मुताबिक, जून में मेट्रो सेवाओं में आई खराबी से यात्रियों को हुई परेशानी को दूर करने के सभी उपाय किए जा रहे हैं। हालांकि, छह में से तीन बार प्राकृतिक या बाहरी कारणों से सेवाएं प्रभावित रहीं। इस दौरान कुछ को छोड़कर लाइन के शेष हिस्से पर यात्रियों के लिए मेट्रो की सुविधा उपलब्ध रही। ओएचई में आई खराबी को दूर करने में थोड़ा अधिक वक्त लगता है।