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दिल्ली: कमांडर अजीत कुमार को मिली जमानत, अदालत ने कहा- सीबीआई ने दायर किया अधूरा आरोप-पत्र
Mon, 22 Nov 2021 06:09 PM IST
प्रशांत कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Mon, 22 Nov 2021 06:09 PM IST
सार
सीबीआई को नौसेना में खरीद को लेकर एक बैठक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों के लीक होने की सूचना मिली थी जिसके बाद दो सितंबर को सेनानिवृत्त नौसैन्य अधिकारी कमोडोर रणदीप सिंह और कमांडर सतविंदर जीत सिंह के यहां छापेमारी की गई थी। दोनों को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
अदालत ने सीबीआई द्वारा दायर आरोप-पत्र में खामियों के आधार पर नौसेना के उपकरणों की खरीद और उनकी देखरेख से संबंधित गोपनीय सूचना कथित तौर पर लीक करने के मामले में नौसेना के सेवारत कमांडर अजीत कुमार पांडेय को जमानत दे दी है। इसी आधार पर दो अन्य आरोपी भी जमानत पा चुके हैं।
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पांडेय को तीन सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई ने सरकारी गोपनीयता कानून के तहत जांच करते हुए पांडेय और अन्य के खिलाफ अधूरा आरोप-पत्र दायर किया था, जिसके बाद अदालत ने पांडेय को जमानत दे दी। विशेष न्यायाधीश अनुराधा शुक्ला भारद्वाज ने आदेश में कहा कि अदालत में दायर आरोप-पत्र अधूरा है, इसमें सरकारी गोपनीयता कानून के तहत की गई जांच का कोई जिक्र नहीं है जबकि इस मामले में यह जांच हुई है।
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अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की स्वत: जमानत से संबंधित धारा 167 (2) के तहत आरोप-पत्र अधूरा है। अदालत इसी आधार पर अन्य आरोपी सेवानिवृत्त नौसैन्य अधिकारी रणदीप सिंह और सतविंदर जीत सिंह को पहले ही जमानत दे चुकी है। जांच एजेंसी 60 दिन अथवा 90 दिन की तय अवधि के भीतर आरोप-पत्र दायर नहीं करती है तो आरोपी वैधानिक रूप से जमानत का अधिकारी हो जाता है।
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बचाव पक्ष के वकीलों ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए दलील दी थी कि सरकारी गोपनीयता कानून के तहत आरोप-पत्र 90 दिन में नहीं बल्कि 60 दिन के भीतर दायर होना चाहिए। अदालत ने कहा हालांकि एजेंसी ने 60 दिन के भीतर दो नवंबर को आरोप-पत्र दायर किया लेकिन वह अधूरा है क्योंकि इसमें सरकारी गोपनीयता कानून के तहत जांच का कोई जिक्र नहीं किया गया, अत: गिरफ्तार आरोपी जमानत पाने का अधिकारी बन जाता है।