दिल्ली: एम्स ने सभी संगठनों को दी चेतावनी, सोशल मीडिया से बनाएं दूरी, अवहेलना करने की जाएगी सख्त कार्रवाई
एम्स के छात्रों द्वारा रामलीला मंचन के दौरान अभद्र टिप्पणी करने पर स्टूडेंट एसोसिएशन ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी थी। इस पर संज्ञान लेते हुए एम्स ने सभी संस्थाओं को चेताया है।
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दशहरे पर रामलीला मंचन के दौरान फूहड़ हरकतें करने और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के मामले में दिल्ली एम्स ने सोमवार को संज्ञान लिया। एम्स प्रबंधन ने संस्थान के सभी संगठनों को चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट कहा है कि इस तरह की हरकतों को संस्थान बर्दास्त नहीं कर सकता है। सोशल मीडिया से कर्मचारी, छात्र और अन्य स्टाफ को दूरी रखते हुए काम करना चाहिए। भविष्य में अगर इस तरह का कोई भी मामला सामने आता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अलग अलग संगठन के पदाधिकारियों से यह चेतावनी सभी सदस्यों तक पहुंचाने के लिए भी कहा गया है।
दरअसल एम्स के एमबीबीएस छात्रों ने पिछले सप्ताह हॉस्टल के मैदान में रामलीला का मंचन किया था। इस दौरान धार्मिक भावनाओं को लेकर काफी अभद्र टिप्पणियां की गईं और छात्रों का मंचन भी अश्लीलता से भरा हुआ था। यह वीडियो एम्स के ही कुछ छात्रों ने बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया। जिसके बाद वायरल वीडियो और सख्त कार्रवाई की मांग होने के चलते बाद में एम्स के स्टूडेंट एसोसिएशन ने सार्वजनिक तौर पर माफी भी मांगी।
इस बीच स्टूडेंट्स को यहां तक कहना पड़ा कि इस कार्यक्रम के बारे में एम्स प्रबंधन को जानकारी नहीं थी। जबकि सूत्रों का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान और पहले हॉस्टल वार्डन व सुरक्षा गार्ड की जिम्मेदारी रहती है और इनकी जानकारी में यह कार्यक्रम था लेकिन लिखित तौर पर अनुमति नहीं थी।
इतना ही नहीं इस दौरान यह भी मामला सामने आया कि एम्स के कई छात्र सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए वीडियो पोस्ट करते हैं। हॉस्टल में रहते हुए एम्स के अलग अलग हिस्सों और कार्यक्रम से वीडियो सोशल मीडिया तक पहुंचते हैं जिनमें संस्थान का नाम सीधे तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें रोकने के लिए अब तक एम्स प्रबंधन ने कोई ठोस फैसला भी नहीं लिया है।
सामूहिक हड़ताल से पहले एम्स में कर्मचारियों का ‘शक्ति प्रदर्शन’
लंबित मांगों को लेकर दिल्ली एम्स के कर्मचारी कई महीनों से आगामी 25 अक्तूबर को सामूहिक हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे रहे हैं। हालांकि सोमवार को कर्मचारियों ने अपनी घोषणा को सच बताने और एक तरह से प्रबंधन को शक्ति प्रदर्शन दिखाने के लिए बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया। सुबह से ही निदेशक कार्यालय के बाहर एकत्रित कर्मचारियों ने करीब एक घंटे तक एम्स प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान डॉक्टरों को छोड़ अन्य सभी तरह के कर्मचारी प्रदर्शन में शामिल थे। बताया जा रहा है कि अगर जल्द ही एम्स प्रबंधन ने कर्मचारियों की मांग को लेकर हल नहीं निकाला तो आगामी दिनों में मरीजों का उपचार काफी प्रभावित हो सकता है।
प्रदर्शन के दौरान एम्स नर्सिंग यूनियन के अध्यक्ष हरीश कुमार ने कहा कि प्रबंधन और स्वास्थ्य मंत्री दो साल से आश्वासन दे रहे हैं लेकिन अब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। इसलिए अब 25 अक्तूबर को एम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया जाएगा।
इससे पहले कर्मचारियों ने पिछले साल दिसंबर 2020 में भी हड़ताल करने की घोषणा की थी लेकिन उस दौरान प्रबंधन से मिले आश्वासन के बाद इसे टाल दिया गया था। दिल्ली एम्स के कर्मचारी यूनियन, एम्स नर्सेज यूनियन और ऑफीसर्स एसोसिएशन ऑफ एम्स के करीब 15 हजार कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे। ऑफिसर यूनियन के अध्यक्ष अजीत कुमार ने बताया कि उनकी मांगें कई साल से लंबित हैं जिनकी सुनवाई नहीं हो रही है। एम्स के सभी नर्स, कर्मचारी और ऑफीसर सभी हड़ताल पर जाएंगें। जब तक प्रबंधन से ठोस राहत नहीं मिलेगी तब तक कर्मचारी नहीं मानेंगें। इनके अलावा कर्मचारी यूनियन के उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह रावत ने कहा कि केंद्रीय कर्मचारी होने के बावजूद एनपीएस में चार फीसदी की कम सुविधा दी जा रही है।