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Hindi News ›   Delhi ›   AIIMS director Randeep Guleria said People with low immunity are infected with mucormycosis infections 

एम्स निदेशक बोले : तीसरी लहर का बच्चों पर असर पड़ने के सबूत नहीं, ठीक हुए लोगों को ज्यादा देखभाल की जरूरत

Mon, 24 May 2021 05:13 PM IST
सुशील कुमार कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Mon, 24 May 2021 05:13 PM IST
सार

डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि बाल रोग संघ ने भी कहा है कि यह तथ्यों पर आधारित नहीं है। तीसरी लहर बच्चों को प्रभावित नहीं कर सकता है, इसलिए लोगों को डरना नहीं चाहिए।

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AIIMS director Randeep Guleria said People with low immunity are infected with mucormycosis infections 
डॉ. रणदीप गुलेरिया - फोटो : एएनआई

विस्तार

एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया ने सोमवार को कहा कि ऐसा बताया जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे सबसे ज्यादा संक्रमित होंगे। लेकिन, इस बात का सबूत नहीं है कि कोरोना की तीसरी लहर का बच्चों पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बाल रोग संघ ने भी कहा है कि यह तथ्यों पर आधारित नहीं है। तीसरी लहर बच्चों को प्रभावित नहीं कर सकता है, इसलिए लोगों को डरना नहीं चाहिए।

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वहीं, ब्लैक फंगस को लेकर डॉ. गुलेरिया ने कहा कि कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग म्यूकरमाइकोसिस, कैंडिड और एस्पोरोजेनस संक्रमण से संक्रमित होते हैं। ये फंगस मुख्य रूप से नसें, नाक, आंखों के आसपास की हड्डी में पाए जाते हैं और मस्तिष्क में प्रवेश कर सकते हैं। कभी-कभी फेफड़ों (पल्मोनरी म्यूकरमाइकोसिस) या जठरांत्र संबंधी मार्ग में पाया जाता है। 
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डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि कुछ लक्षण हैं जो कोरोना संक्रमण के बाद देखे जाते हैं। यदि लक्षण 4-12 सप्ताह तक देखे जाते हैं, तो इसे ऑनगोइंग सिम्प्टोमैटिक कोविड या पोस्ट-एक्यूट कोविड सिंड्रोम कहा जाता है। यदि लक्षण 12 सप्ताह से अधिक समय तक दिखाई देते हैं, तो इसे पोस्ट-कोविड सिंड्रोम कहा जाता है।


एम्स निदेशक ने कहा कि कुछ लोगों में क्रोनिक फटीग सिंड्रोम देखा जाता है, जिसके लिए सिम्प्टोमैटिक उपचार की आवश्यकता होती है। आम तौर पर सोशल मीडिया पर 'ब्रेन फॉग' के रूप में एक और लक्षण, जो कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में देखा गया है। जो एकाग्रता, अनिद्रा और अवसाद से पीड़ित हैं। 

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