दिल्ली: श्मशान घाटों में अतिरिक्त चिताओं को रखा जाएगा बरकरार, भविष्य की स्थिति को देखते हुए निगम ने लिया फैसला
उत्तरी निगम महापौर जयप्रकाश ने कहा कि निगम के अंदर सबसे अधिक 150 चिताएं अकेले निगम बोध घाट में ही बनाई गए हैं। इन्हें विशेष रूप से कोरोना संक्रमित शवों के लिए आरक्षित किया गया है।
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कोरोना माहमारी के प्रकोप के बीच राजधानी में इन दिनों मौतें कम होने से राहत है। यही वजह है कि श्मशानों में दिखने वाली भीड़ भी अब कम हो रही है, जिससे कोविड व नॉन कोविड शवों के साथ पहुंचने वाले परिजनों को भी लंबा इंतजार नहीं करना पड़ रहा है।
हालांकि, निगम का दावा है कि बेशक मौत के आंकड़े कम हो गए हैं, लेकिन चिताओं की संख्या में बदलाव नहीं किया जाएगा। क्योंकि, भविष्य में कुछ पता नहीं कोरोना से दिल्ली की स्थिति क्या हो।
तीनों नगर निगम की ओर से दिल्ली के 28 स्थानों पर 1184 चिताओं की व्यवस्था की गई है। इन चिताओं की संख्या बीते अप्रैल-मई में उस समय बढ़ाई गई थी जब दिल्ली में कोरोना के नए मामलों के साथ मौत के आंकड़ों में भी तेज गति से बढ़ोतरी हो रही थी। इसको देखते हुए निगम की पार्किंग से लेकर अन्य खाली जगहों पर भी अतिरिक्त चिताओं को बनाया गया था।
उत्तरी निगम महापौर जयप्रकाश ने कहा कि निगम के अंदर सबसे अधिक 150 चिताएं अकेले निगम बोध घाट में ही बनाई गए हैं। इन्हें विशेष रूप से कोरोना संक्रमित शवों के लिए आरक्षित किया गया है। इसके अलावा पुंचकुइयां रोड व मंगोलपुरी आदि जगहों पर चिताओं को आरक्षित किया गया है। अकेल उत्तरी निगम में ही कुल 560 चिताएं हैं।
महापौर ने कहा कि बेशक दिल्ली में कोरोना से मौतें कम हो गई हैं, लेकिन इसके बाद भी निगम का चिताओं की संख्या कम करने पर विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा निगम अपने यहां सीएनजी चिताओं को बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
पूर्वी निगम महापौर निर्मल जैन ने कहा कि निगम के तहत कुल 400 चिताओं की व्यवस्था की गई है। इसमें से कुल 194 चिताओं को कोविड शवों के लिए समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि निगम ने अभी चिताओं की संख्या में बदलाव न करने का निर्णय लिया है। जब तक दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण(डीडीएमए) की ओर से नए दिशा-निर्देश जारी नहीं होते तब तक बदलाव की संभावना नहीं है।
दक्षिणी निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा कि चूंकि, अभी पहले के मुकाबले कम संख्या में शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंच रहे हैं। इसलिए अब पहले के मुकाबले अधिक चिताएं खाली पड़ी हुई हैं। अप्रैल में मौत की बढ़ती संख्या को देखते हुए चिताओं के बढ़ाने की संभावना थी, लेकिन अब स्थिति सामान्य के रास्ते पर है।