दिल्लीः लकी ड्रॉ में महंगा सामान जीतने का झांसा देकर 800 लोगों से ठगी, दो गिरफ्तार
दोनों आरोपी कॉल कर लकी ड्रॉ में महंगे मोबाइल या अन्य सामान निकलने का झांसा देते थे। लोगों का भरोसा जीतने के लिए पोस्ट ऑफिस जाकर तीन से चार हजार रुपये में पार्सल छुड़ाने की बात कही जाती थी। इतने रुपयों में महंगा सामान मिलने की बात पर अधिकतर लोग तैयार हो जाते थे। पुलिस के अनुसार देशभर के 800 से अधिक लोग ठगी के शिकार हो चुके हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास से एक कंप्यूटर, नौ मोबाइल, पांच पार्सल, 10 खाली डिब्बेे और बैंक की चेकबुक व पासबुक बरामद की है। गैंग सरगना सन्नी डीयू से ग्रेजुएट है। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
मध्य जिला पुलिस उपायुक्त संजय भाटिया ने बताया कि छह अगस्त को रमेश पांडेय नामक शख्स ने पटेल नगर थाने में ठगी की शिकायत दी थी। रमेश ने बताया कि उनके पास एक अज्ञात शख्स का कॉल आया। कॉलर ने बताया कि उनका नंबर लकी ड्रा में सलेक्ट हुआ है। ड्रा में उनका 25 हजार रुपये कीमत का मोबाइल निकला है। लेकिन मोबाइल लेने के लिए उन्हें 3995 रुपये चुकाने होंगे।
गिफ्ट को पार्सल के जरिये नजदीकी पोस्ट ऑफिस में स्पीड पोस्ट से भेजा जाएगा। रुपये भी पोस्ट ऑफिस में जमा कराने होंगे। रमेश उनकी बातों में आ गया। कुछ दिनों बाद रमेश का पार्सल पोस्ट ऑफिस आ गया। वहां उसने रुपये देकर पार्सल छुड़ाया तो उसमें एक कंपनी की गिलोय निकली।
इसके बाद उसे ठगी का पता चला। पुलिस ने मामला दर्ज छानबीन शुरू की। पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस से पड़ताल की तो पता चला कि ठगों का नंबर रोहिणी सेक्टर-7 में चल रहा है। पुलिस ने छापामारी कर पहले सज्जन को रोहिणी और बाद में सन्नी को उत्तम नगर से दबोच लिया।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
पूछताछ के दौरान सन्नी ने बताया कि उसने पढ़ाई के बाद ठगी का धंधा शुरू कर दिया। उसने प्राइम डील के नाम से एक फर्जी कंपनी बनाई। आरोपी देशभर के लोगों के मोबाइल नंबर और पता गूगल की मदद से निकलकर उनको लकी ड्रा में महंगा सामान निकलने का झांसा देते थे। पोस्ट ऑफिस में तीन-चार हजार रुपये चुकाकर पार्सल लेने की बात की जाती थी। पार्सल में महंगे सामान की जगह गिलोय, पर्स या बांधने वाली बेल्ट रख दी जाती थी। आरोपियों ने आठ सौ से अधिक लोगों के साथ इसकी तरह धोखाधड़ी की बात कबूली है।
ग्राहक के मोबाइल में एप डाल खाते से निकाल ली रकम
दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर सेल ने एक जालसाज को गिरफ्तार कर धोखाधड़ी के अनोखे तरीके का पर्दाफाश किया है। ग्राहकों के मोबाइल में आरोपी रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड कर देता था और फिर पीड़ित के एकाउंट से पैसे अपने एकाउंट में ट्रांसफर कर लेता था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी अब तक कितने लोगों के साथ ठगी कर चुका है और जालसाजी में कौन-कौन शामिल हैं।
दक्षिण-पश्चिमी जिला डीसीपी देवेंद्र आर्या के अनुसार पीड़ित राजेश राजपूत ने दिल्ली कैंट थाने में नौ सितंबर को ठगी की शिकायत दी थी। राजेश ने कहा था कि किसी ने उसके सिटी बैंक के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर उसके खाते से 69334 रुपये निकाल लिए है, जबकि उसने किसी को बैंक से संबंधित किसी तरह की जानकारी नहीं दी थी। मामले की जांच जिले की साइबर सेल को सौंपी गई। साइबर सेल प्रभारी राजेश मालिक की देखरेख में एसआई नीरज व एसआई संदीप की टीम ने जांच शुरू की। बैंक से डिटेल लेने पर पता लगा कि राजेश के बैंक खाते से पेटीएम व मोबिकविक के जरिये रकम ट्रांसफर की गई है।
यह भी पता लगा कि रकम बंगलूरू निवासी मुकेश ओखेडा के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई। पुलिस ने मुकेश के बारे में पता किया तो वह अपना घर बार-बार बदल रहा था। आखिरकार एसआई नीरज की टीम ने मुकेश को बापरौला विहार, दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन बरामद कर लिए गए।
आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह फरवरी-मार्च, 20 महीने में सिटी बैंक के क्रेडिट कार्ड विभाग में काम करता था। पीड़ित जब उसके पास बैंक का क्रेडिट कार्ड लेने आया तो आरोपी ने धोखे से उसका मोबाइल लेकर उसमें रिमोट एक्सेस एप लोड कर दी। इस एप के जरिये वह राजेश की डिटेल लेता रहा। इस एप के जरिए ही उसने राजेश के बैंक खाते से पैसे अपने बैंक खाते में ट्रांसफर किए थे।