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बस में घूम कर टिकट बांटे कंडक्टर तय करे सरकार: हाईकोर्ट
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बस में घूमकर टिकट काटें कंडक्टर : हाईकोर्ट
जनहित याचिका का निबटारा करते हुए सरकार को दिया निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) से करार के बावजूद कंडक्टर डीटीसी और क्लस्टर बसों में घूम-घूम कर टिकट नहीं काटते। इस मुद्दे को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार व डीटीसी से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने कहा कि सरकार व बस मालिकों के करार में कंडक्टर के घूम-घूम कर टिकट काटने की बात कही गई है, ताकि सभी यात्रियों को टिकट मिले। इसके बावजूद, कंडक्टर एक जगह बैठकर टिकट काटता रहता है। सरकार नियम बनाकर सुनिश्चित करे कि कंडक्टर घूम-घूम कर टिकट काटें। वह इसे लेकर दिशा-निर्देश तय करे और उसे लागू करे। कोर्ट ने यह निर्देश संतोष कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जोस अब्राह्म ने कोर्ट से कहा कि करार के बावजूद कंडक्टर बस के एक से दूसरे छोर तक घूम-घूम कर टिकट नहीं काटते हैं और अपनी सीट पर बैठकर टिकट काटते हैं। इससे दूसरे राज्यों से आए व्यक्ति टिकट नहीं ले पाते हैं और उन्हें जुर्माना भरना पड़ता है।
याची ने कहा कि दूसरे राज्य के लोगों को यह पता नहीं होता कि कंडक्टर के पास जाकर टिकट लें। इस वजह से वह टिकट नहीं ले पाते और जुर्माना भरना पड़ता है। इससे बजुर्ग, महिला व बच्चों वाली महिला एवं दिव्यांगों को भी काफी दिक्कत होती है। उन्हें भीड़ में बस के एक से दूसरे छोर आकर टिकट लेना पड़ता है। दूसरे राज्यों में कंडक्टर सभी यात्रियों के पास जाकर टिकट देते हैं, लेकिन दिल्ली में ऐसा नहीं है। कंटक्टर अपनी सीट पर बैठा रहता है और यात्री उसके पास आकर टिकट लेते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए कोर्ट सरकार को निर्देश दे कि वह कंडक्टरों से कहे कि वह घूमकर सभी यात्रियों के टिकट काटना सुनिश्चित करे।
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सेनासरकार के विवाद
में फंसा स्कूल निर्माण
नई दिल्ली। दिल्ली कैंट इलाके के 99 वर्ष पुराने स्कूल को कहीं और स्थानांतरित किए जाने के मामले में हाईकोर्ट 17 जनवरी को सुनवाई करेगा। स्कूल का भवन दयनीय स्थिति में है, लेकिन केंद्र व राज्य सरकार के बीच विवाद के कारण स्कूल कहीं और स्थानांतरित नहीं हो पा रहा है। इसे लेकर एक संस्था सोशल ज्यूरिस्ट ने याचिका दाखिल की है।
याचिका में कहा गया है कि केंद्र ने दिल्ली सरकार से कहा है कि दिल्ली कैंट के राजपुताना राइफल्स हीरोज मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल का भवन काफी जर्जर स्थिति में है। इससे बच्चों की सुरक्षा को खतरा है। दिल्ली सरकार इस स्कूल को कहीं और स्थानांतरित करे। दिल्ली सरकार ने रक्षा मंत्रालय से कहा है कि वह स्कूल के लिये वैकल्पिक जमीन मुहैया कराए या उसी जमीन पर उसे भवन निर्माण की अनुमति दे, ताकि छात्रों को कोई दिक्कत न हो। याचिकाकर्ता ने कहा कि दो सरकारों के बीच विवाद के कारण छात्रों का भविष्य खतरे में हैं। कोर्ट इसे देखते हुए उचित दिशा-निर्देश जारी करे। दिल्ली कैंट में स्कूल को रक्षा मंत्रालय की जमीन पर बनाया गया था, जिसे अगस्त 1975 में दिल्ली प्रशासन ने अपने हाथ में ले लिया था। राज्य सरकार उसे पूरी सहायता देती थी।
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जनहित याचिका का निबटारा करते हुए सरकार को दिया निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) से करार के बावजूद कंडक्टर डीटीसी और क्लस्टर बसों में घूम-घूम कर टिकट नहीं काटते। इस मुद्दे को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार व डीटीसी से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने कहा कि सरकार व बस मालिकों के करार में कंडक्टर के घूम-घूम कर टिकट काटने की बात कही गई है, ताकि सभी यात्रियों को टिकट मिले। इसके बावजूद, कंडक्टर एक जगह बैठकर टिकट काटता रहता है। सरकार नियम बनाकर सुनिश्चित करे कि कंडक्टर घूम-घूम कर टिकट काटें। वह इसे लेकर दिशा-निर्देश तय करे और उसे लागू करे। कोर्ट ने यह निर्देश संतोष कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जोस अब्राह्म ने कोर्ट से कहा कि करार के बावजूद कंडक्टर बस के एक से दूसरे छोर तक घूम-घूम कर टिकट नहीं काटते हैं और अपनी सीट पर बैठकर टिकट काटते हैं। इससे दूसरे राज्यों से आए व्यक्ति टिकट नहीं ले पाते हैं और उन्हें जुर्माना भरना पड़ता है।
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याची ने कहा कि दूसरे राज्य के लोगों को यह पता नहीं होता कि कंडक्टर के पास जाकर टिकट लें। इस वजह से वह टिकट नहीं ले पाते और जुर्माना भरना पड़ता है। इससे बजुर्ग, महिला व बच्चों वाली महिला एवं दिव्यांगों को भी काफी दिक्कत होती है। उन्हें भीड़ में बस के एक से दूसरे छोर आकर टिकट लेना पड़ता है। दूसरे राज्यों में कंडक्टर सभी यात्रियों के पास जाकर टिकट देते हैं, लेकिन दिल्ली में ऐसा नहीं है। कंटक्टर अपनी सीट पर बैठा रहता है और यात्री उसके पास आकर टिकट लेते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए कोर्ट सरकार को निर्देश दे कि वह कंडक्टरों से कहे कि वह घूमकर सभी यात्रियों के टिकट काटना सुनिश्चित करे।
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सेनासरकार के विवाद
में फंसा स्कूल निर्माण
नई दिल्ली। दिल्ली कैंट इलाके के 99 वर्ष पुराने स्कूल को कहीं और स्थानांतरित किए जाने के मामले में हाईकोर्ट 17 जनवरी को सुनवाई करेगा। स्कूल का भवन दयनीय स्थिति में है, लेकिन केंद्र व राज्य सरकार के बीच विवाद के कारण स्कूल कहीं और स्थानांतरित नहीं हो पा रहा है। इसे लेकर एक संस्था सोशल ज्यूरिस्ट ने याचिका दाखिल की है।
याचिका में कहा गया है कि केंद्र ने दिल्ली सरकार से कहा है कि दिल्ली कैंट के राजपुताना राइफल्स हीरोज मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल का भवन काफी जर्जर स्थिति में है। इससे बच्चों की सुरक्षा को खतरा है। दिल्ली सरकार इस स्कूल को कहीं और स्थानांतरित करे। दिल्ली सरकार ने रक्षा मंत्रालय से कहा है कि वह स्कूल के लिये वैकल्पिक जमीन मुहैया कराए या उसी जमीन पर उसे भवन निर्माण की अनुमति दे, ताकि छात्रों को कोई दिक्कत न हो। याचिकाकर्ता ने कहा कि दो सरकारों के बीच विवाद के कारण छात्रों का भविष्य खतरे में हैं। कोर्ट इसे देखते हुए उचित दिशा-निर्देश जारी करे। दिल्ली कैंट में स्कूल को रक्षा मंत्रालय की जमीन पर बनाया गया था, जिसे अगस्त 1975 में दिल्ली प्रशासन ने अपने हाथ में ले लिया था। राज्य सरकार उसे पूरी सहायता देती थी।