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नौकरी का झांसा दे युवाओं को ठगने वाले 7 गिरफ्तार
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नई दिल्ली। पश्चिम जिले की साइबर सेल ने देश और विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह के 7 आरोपियों सोनिया विहार निवासी शैलेंद्र, रोहिणी निवासी हिमांशु कोहली, वजीराबाद निवासी मोहम्मद शादाब अनीस, उत्तम नगर निवासी अमित कुमार कर्ण, पालम कॉलोनी निवासी सुनीता, तिहाड़ गांव निवासी स्वाति व उत्तम नगर निवासी पारुल को गिरफ्तार किया है। इनके पास से छह कंप्यूटर और 17 मोबाइल के अलावा भारी मात्रा में दस्तावेज बरामद किए गए हैं। ये खुद को ‘ग्रुप नौकरी डॉट कॉम’ से बताकर बेरोजगारों से मोटी रकम अपने खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करा लेते थे।
पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त उर्विजा गोयल ने बताया कि 8 मार्च को जिले की साइबर सेल को जनकपुरी के कम्युनिटी सेंटर में फर्जी कॉल सेंटर की सूचना मिली थी। यहां देश और विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से ठगी की जाती थी। पुलिस ने कम्युनिटी सेंटर में छापा मारकर चार पुरुषों और तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया। ठगी में इस्तेमाल किया जाने वाला सामान यहां से भारी मात्रा में बरामद हुआ। इनके कंप्यूटरों से करीब सौ बेरोजगारों का डाटा भी बरामद किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, सरगना शैलेंद्र है। ठगों ने ‘ग्रुप नौकरी डॉट कॉम’ नाम से फर्जी वेबसाइट बना रखी है। ये बेरोजगारों का डाटा जुटाकर उनको कॉल करते थे। इन्हें देश और विदेश, खासकर खाड़ी देशों में एक सप्ताह के भीतर नौकरी दिलाने का झांसा दिया जाता। युवा तैयार हो जाते तो उनसे विभिन्न खर्चों के नाम पर एक बार 52 हजार और दूसरी बार 40 हजार रुपये अपने खाते में जमा करा लिए जाते। इसके बाद ये उस युवा का फोन नंबर ब्लॉक कर देते थे। फिलहाल पश्चिम जिला पुलिस को ठगी की दो शिकायतें मिली थीं। आरोपियों ने कबूल किया कि वे अब तक 200 से अधिक लोगों से ठगी कर चुके हैं।
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पुलिस और आसपास के लोगों से बचने के लिए ठग पूरी सावधानी रखते थे। इन्हें यह भी डर रहता था कि कहीं कोई युवा इनके दफ्तर में न पहुंच जाए। इसीलिए ये हर 3-4 महीने में अपना दफ्तर बदल देते थे।
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पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त उर्विजा गोयल ने बताया कि 8 मार्च को जिले की साइबर सेल को जनकपुरी के कम्युनिटी सेंटर में फर्जी कॉल सेंटर की सूचना मिली थी। यहां देश और विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से ठगी की जाती थी। पुलिस ने कम्युनिटी सेंटर में छापा मारकर चार पुरुषों और तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया। ठगी में इस्तेमाल किया जाने वाला सामान यहां से भारी मात्रा में बरामद हुआ। इनके कंप्यूटरों से करीब सौ बेरोजगारों का डाटा भी बरामद किया गया है।
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पुलिस के मुताबिक, सरगना शैलेंद्र है। ठगों ने ‘ग्रुप नौकरी डॉट कॉम’ नाम से फर्जी वेबसाइट बना रखी है। ये बेरोजगारों का डाटा जुटाकर उनको कॉल करते थे। इन्हें देश और विदेश, खासकर खाड़ी देशों में एक सप्ताह के भीतर नौकरी दिलाने का झांसा दिया जाता। युवा तैयार हो जाते तो उनसे विभिन्न खर्चों के नाम पर एक बार 52 हजार और दूसरी बार 40 हजार रुपये अपने खाते में जमा करा लिए जाते। इसके बाद ये उस युवा का फोन नंबर ब्लॉक कर देते थे। फिलहाल पश्चिम जिला पुलिस को ठगी की दो शिकायतें मिली थीं। आरोपियों ने कबूल किया कि वे अब तक 200 से अधिक लोगों से ठगी कर चुके हैं।
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पुलिस और आसपास के लोगों से बचने के लिए ठग पूरी सावधानी रखते थे। इन्हें यह भी डर रहता था कि कहीं कोई युवा इनके दफ्तर में न पहुंच जाए। इसीलिए ये हर 3-4 महीने में अपना दफ्तर बदल देते थे।