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जेएनयू देशद्रोह मामले में अब अदालत दिल्ली सरकार से करेगी जवाब तलब
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जेएनयू देशद्रोह मामले में मंजूरी न मिलने पर अदालत नाराज
अब अदालत दिल्ली सरकार से करेगी जवाब तलब
- दिल्ली पुलिस ने मामले से जुड़ी अनुरोध फाइल दिल्ली सरकार के पास लंबित होने की दी दलील
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जेएनयू देशद्रोह मामले में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी न मिलने से नाराज अदालत स्वयं सीधे सरकार से जवाब मांगेगी। दरअसल, अदालत के समक्ष पेश दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के डीएसपी प्रमोद कुशवाहा पेश हुए। उन्होंने कहा आरोपियों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की इजाजत संबंधी फाइल दिल्ली सरकार के गृह विभाग के पास अभी भी लंबित है। सरकार को पत्र लिखकर जल्द इजाजत देने का आग्रह किया गया है।
पटियाला हाउस कोर्ट के मुख्य महानगर दंडाधिकारी दीपक सेहरावत ने बिना मंजूरी के आरोपपत्र दायर करने पर उस वक्त यह टिप्पणी जब पुलिस ने बताया कि मंजूरी देना एक प्रशासनिक कार्रवाई थी और उसके बिना भी आरोपपत्र दायर किया जा सकता है। दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा के उपायुक्त प्रमोद कुशवाहा ने अदालत के समक्ष कहा कि एजेंसी ने मंजूरी मांगते हुए पहले ही दिल्ली सरकार को एक अनुरोध पत्र भेजा है, जो कि अभी भी लंबित है। इस पर अदालत ने दिल्ली सरकार से जवाब तलब करने की बात कही। अदालत ने कहा यदि अनुमति नहीं थी तो आरोपपत्र दायर करने की जल्दी क्या थी। फिलहाल अब मंजूरी संबंधी मुद्दा पुलिस का नहीं है। अदालत स्वयं सरकार से जवाब तलब कर पूछेगी कि आखिर मंजूरी कब तक मिलेगी।
इससे पहले अदालत ने उस पुलिस उपायुक्त के पेश नहीं होने पर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी, जिसे 2016 जेएनयू राजद्रोह मामले में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया था। दिल्ली पुलिस ने पहले अदालत को बताया था कि अधिकारियों ने जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और अन्य पर इस मामले में अभियोग चलाने की आवश्यक मंजूरी अभी नहीं दी है। मंजूरी लेने में दो से तीन महीने का समय लगेगा। दरअसल, देशद्रोह के मामले में सीआरपीसी के सेक्शन 196 के तहत जब तक सरकार आरोपपत्र दायर करने की मंजूरी नहीं दे देती, तब तक अदालत आरोपपत्र पर संज्ञान नहीं ले सकती।
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क्या है मामला
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने करीब तीन साल की जांच के बाद जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद व अनिर्बन भट्टाचार्य समेत 10 आरोपियों के खिलाफ देशद्रोह व अन्य धाराओं में मुकदमा चलाने की सरकारी अनुमति के बिना 14 जनवरी 2019 को आरोप पत्र दाखिल किया था। मामला संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की बरसी पर जेएनयू कैंपस में 9 फरवरी 2016 की रात आयोजित कार्यक्रम से जुड़ा है। इस मामले में कन्हैया, उमर खालिद व अनिर्बन भट्टाचार्य को गिरफ्तार गया था और वह फिलहाल जमानत पर हैं। इनके अलावा आरोप पत्र में सात कश्मीरी छात्रों मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, आकिब हुसैन, रईस, बशारत, उमर गुल, खालिद बशीर को भी नामजद किया गया है। इन आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया था।
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अब अदालत दिल्ली सरकार से करेगी जवाब तलब
- दिल्ली पुलिस ने मामले से जुड़ी अनुरोध फाइल दिल्ली सरकार के पास लंबित होने की दी दलील
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जेएनयू देशद्रोह मामले में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी न मिलने से नाराज अदालत स्वयं सीधे सरकार से जवाब मांगेगी। दरअसल, अदालत के समक्ष पेश दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के डीएसपी प्रमोद कुशवाहा पेश हुए। उन्होंने कहा आरोपियों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की इजाजत संबंधी फाइल दिल्ली सरकार के गृह विभाग के पास अभी भी लंबित है। सरकार को पत्र लिखकर जल्द इजाजत देने का आग्रह किया गया है।
पटियाला हाउस कोर्ट के मुख्य महानगर दंडाधिकारी दीपक सेहरावत ने बिना मंजूरी के आरोपपत्र दायर करने पर उस वक्त यह टिप्पणी जब पुलिस ने बताया कि मंजूरी देना एक प्रशासनिक कार्रवाई थी और उसके बिना भी आरोपपत्र दायर किया जा सकता है। दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा के उपायुक्त प्रमोद कुशवाहा ने अदालत के समक्ष कहा कि एजेंसी ने मंजूरी मांगते हुए पहले ही दिल्ली सरकार को एक अनुरोध पत्र भेजा है, जो कि अभी भी लंबित है। इस पर अदालत ने दिल्ली सरकार से जवाब तलब करने की बात कही। अदालत ने कहा यदि अनुमति नहीं थी तो आरोपपत्र दायर करने की जल्दी क्या थी। फिलहाल अब मंजूरी संबंधी मुद्दा पुलिस का नहीं है। अदालत स्वयं सरकार से जवाब तलब कर पूछेगी कि आखिर मंजूरी कब तक मिलेगी।
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इससे पहले अदालत ने उस पुलिस उपायुक्त के पेश नहीं होने पर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी, जिसे 2016 जेएनयू राजद्रोह मामले में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया था। दिल्ली पुलिस ने पहले अदालत को बताया था कि अधिकारियों ने जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और अन्य पर इस मामले में अभियोग चलाने की आवश्यक मंजूरी अभी नहीं दी है। मंजूरी लेने में दो से तीन महीने का समय लगेगा। दरअसल, देशद्रोह के मामले में सीआरपीसी के सेक्शन 196 के तहत जब तक सरकार आरोपपत्र दायर करने की मंजूरी नहीं दे देती, तब तक अदालत आरोपपत्र पर संज्ञान नहीं ले सकती।
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क्या है मामला
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने करीब तीन साल की जांच के बाद जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद व अनिर्बन भट्टाचार्य समेत 10 आरोपियों के खिलाफ देशद्रोह व अन्य धाराओं में मुकदमा चलाने की सरकारी अनुमति के बिना 14 जनवरी 2019 को आरोप पत्र दाखिल किया था। मामला संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की बरसी पर जेएनयू कैंपस में 9 फरवरी 2016 की रात आयोजित कार्यक्रम से जुड़ा है। इस मामले में कन्हैया, उमर खालिद व अनिर्बन भट्टाचार्य को गिरफ्तार गया था और वह फिलहाल जमानत पर हैं। इनके अलावा आरोप पत्र में सात कश्मीरी छात्रों मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, आकिब हुसैन, रईस, बशारत, उमर गुल, खालिद बशीर को भी नामजद किया गया है। इन आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया था।