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Hindi News ›   Delhi ›   13 years old boy gets back his voice after seven years surgery done in Delhi hospital

Good News: सर्जरी से सात साल बाद लौटी किशोर की आवाज, दिल्ली के अस्पताल में हुआ इलाज

Sun, 05 Jun 2022 02:13 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Sun, 05 Jun 2022 02:13 PM IST
सार

बच्चे ने पिछले सात वर्षों से न तो सामान्य रूप से बात की थी और न ही कुछ खाया था। लेकिन अब बच्चा बात करने के साथ खाद्य वस्तुओं का सेवन भी कर रहा है। अस्पताल ने बच्चे को छुट्टी दे दी है।

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13 years old boy gets back his voice after seven years surgery done in Delhi hospital
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

राजधानी दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में एक 13 वर्षीय किशोर की दुर्लभ सर्जरी से सात साल बाद आवाज लौट आई है। वहीं, अब बच्चा बात करने के साथ खाद्य वस्तुओं का सेवन भी कर रहा है। अस्पताल ने बच्चे को छुट्टी दे दी है। 

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जानकारी के मुताबिक, श्रीकांत (बदला हुआ नाम) राजस्थान से दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल के थोरैसिक सर्जरी और ईएनटी विभाग में इलाज के लिए पहुंचा था। मरीज की श्वांस नली में 10 से अधिक वर्षों से ट्रेकोस्टोमी ट्यूब डाली गई थी। ट्रेकोस्टोमी की लंबी अवधि और वायु पाइप के एक हिस्से के नहीं होने के कारण, उसके लिए सामान्य रूप से सांस लेना मुश्किल था। 
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वहीं, बच्चे ने पिछले सात वर्षों से न तो सामान्य रूप से बात की थी और न ही कुछ खाया था। अस्पताल के डॉ. मनीष मुंजाल के अनुसार, बच्चे को वायु पाइप  का पूर्ण 100 फीसदी हिस्सा ब्लॉक था। इस बड़ी जटिलता के कारण फिर से सर्जरी संभव नहीं थी। थोरैसिक सर्जरी विभाग के डॉ. सब्यसाची बाल ने कहा कि हमने कई विभागों की टीमों ने साथ मिलकर साढ़े छह घंटे तक ऑपरेशन किया। 
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वहीं, डॉ मुंजाल ने कहा कि चूंकि, वॉयस बॉक्स के पास चार सेंटीमीटर एयरवे पाइप पूरी तरह से नष्ट हो चुकी थी और इसे फिर से प्राप्त नहीं किया जा सकता था, इसलिए हमारी पहली चुनौती एयरवे के ऊपरी और निचले हिस्सों को जितना संभव हो सके पास लाकर इस अंतर को कम करने की थी। इसके लिए वॉयस बॉक्स को उसकी सामान्य स्थिति से नीचे लाने के लिए लेरिंजियल ड्रॉप प्रक्रिया की गई। 

इस दौरान बुरी तरह से अवरुद्ध क्रिकॉइड हड्डी का ऑपरेशन किया। यह वॉयस बॉक्स के नीचे एक घोड़े की नाल के आकार की हड्डी है, जिसमें दोनों तरफ मिनट वॉइस नर्वस होती है और यह मुख्य रूप से आवाज और एयरवे की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होती है। डॉक्टरों ने क्रिकोइड्स की हड्डी वाले हिस्से को चौड़ा करने के लिए ड्रिल की एक प्रणाली का इस्तेमाल किया। 


अंत में एयरवे के ऊपरी और निचले दोनों किनारों के हिस्सों को एक साथ लाया गया और वापस जोड़ा गया। पीडीऐट्रिक्स इंटेंसिव केयर से डॉ अनिल सचदेव ने कहा कि बच्चे की छाती में एयरवे के रिसाव का बहुत अधिक जोखिम था, जो कि भयावह हो सकता था। इसलिए बच्चे को तीन दिनों तक गर्दन के बल (ठोड़ी को छाती की ओर बंद करके) रखा गया। साथ ही उसे निम्न दाब ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया,  ताकि उसे किसी तरह का ट्रॉमेटिक एयर लीक न हो। बच्चे को अब छुट्टी दे दी गई है और उसकी हालत स्थिर है।

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