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दिल्ली: आर्थिक संकट से जूझ रहे डीयू के 12 कॉलेज, शिक्षकों का छलका दर्द, बोले- अमानवीय रवैया अपना रही केजरीवाल सरकार
Fri, 07 Jan 2022 08:41 PM IST
सुशील कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार
Updated Fri, 07 Jan 2022 08:41 PM IST
सार
डूटा अध्यक्ष प्रो. अजय कुमार भागी ने बताया कि दिल्ली सरकार ने जिस तरह से कोरोना संकट के समय में शिक्षकों व कर्मचारियों के प्रति अमानवीय रवैया अपनाए हुए हैं, वह स्वीकार्य नहीं है। सरकार कह रही है कि हमने अनुदान जारी किया है जबकि वो अपर्याप्त है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social Media
विस्तार
दिल्ली विश्वविद्यालय से संबंध और दिल्ली सरकार से सौ फीसदी वित्त पोषित 12 कॉलेज फंड की कमी के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इसके विरोध में दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को डूटा ने ऑनलाइन पढ़ाई किए जाने के बाद शुक्रवार को एक ऑनलाइन जनसुनवाई आयोजित की।
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जनसुनवाई में संसद सदस्य प्रो. मनोज झा, रवनीत बिटटू, दिल्ली भाजपा प्रदेशाध्यक्ष आदेश गुप्ता, डीयू कार्यकारी परिषद सदस्य व अधिवक्ता अशोक अग्रवाल, अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा, आर्यभट्ट कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. मनोज सिन्हा, डीयू प्रिंसिपल एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह भी शामिल हुए। इस सुनवाई के दौरान शिक्षकों ने वेतन न मिलने के अपने दर्द को भी बयां किया।
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लटके हुए हैं भत्ते व पेंशन
डूटा अध्यक्ष प्रो. अजय कुमार भागी ने बताया कि दिल्ली सरकार ने जिस तरह से कोरोना संकट के समय में शिक्षकों व कर्मचारियों के प्रति अमानवीय रवैया अपनाए हुए हैं, वह स्वीकार्य नहीं है। सरकार कह रही है कि हमने अनुदान जारी किया है जबकि वो अपर्याप्त है। सरकार ने इन कॉलेजों को स्वयंपोषित मोड में लाने और इनका नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए अनावश्यक फंड कट लगाया है, जोकि अस्वीकार्य है। 12 कॉलेजों में शिक्षकों कर्मचारियों के दो से चार माह के वेतन लंबित है और अन्य भुगतान चिकित्सा बिलों, विभिन्न भत्ते व पेंशन लटके हुए हैं।
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एलजी के सामने उठाया जाएगा मुद्दा
दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि इस मामले को उपराज्यपाल के समक्ष उठाने की बात कही। संसद सदस्य प्रो. मनोज झा ने सुनवाई में कहा कि डूटा के नेतृत्व को इस समस्या के समाधान के लिए अब एक निर्धारित एक्शन प्लान तैयार कर प्रयास करने की जरूरत है। सांसद रवनीत बिट्टू ने इस मामले को संसद पटल पर रखने की बात कही।
नहीं मिल रही वेतन
दीन दयाल उपाध्याल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. हेमचंद जैन ने बताया कि कॉलेज वेतन तो दूर बिजली, पानी के बिलों का भुगतान तक कर पाने में असमर्थ है। यह हालत उस कॉलेज की है जो एनआईआरएफ की रैकिंग में 13वें स्थान पर आता है। हमारी जरूरत के अनुरूप सरकार अनुदान जारी नहीं कर रही है। डॉ. आंबेडकर कॉलेज के शिक्षक डॉ. सुजीत कुमार ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में वे कोरोना की चपेट में आए और अपनी सारी जमा पूंजी जो 3 से 4 लाख रुपये के आसपास थी, इलाज में खर्च हो गई। सरकार ने इस राशि का भुगतान तो किया नहीं, बल्कि नियमित वेतन भी रोक लिया है।