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सृष्टि के सिद्धांत ईश्वर,जीव और प्रकृति
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माई सिटी रिपोर्टर
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गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद द्वारा महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा प्रतिपादित "त्रैतवाद" सिद्धान्त पर गोष्ठी की गई। इस दौरान डॉ हरिओम शास्त्री ने कहा कि सृष्टि के सिद्धांत ईश्वर, जीव और प्रकृति हैं। महर्षि दयानन्द ने वेद, वेदांग, उपांग,उपनिषद सहित समस्त उपलब्ध प्राचीन साहित्य का अध्ययन किया था। ईश्वर-जीव-प्रकृति की एक दूसरे से भिन्न पृथक व स्वतन्त्र सत्ताओं को ही त्रैतवाद के नाम से जाना जाता है। ये तीनों मिलकर ही सृष्टि को बनाते व चलाते हैं। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि ईश्वर से अतिरिक्त जीव व प्रकृति पृथक हैं। कार्यक्रम अध्यक्ष आर्य प्रतिनिधि सभा हिमाचल के अध्यक्ष प्रबोध चंद्र सूद,एडवोकेट ने कहा कि महर्षि दयानन्द ने अपनी इन मान्यताओं को बिना किसी की चुनौती के स्वयं ही अपने ग्रन्थों में प्रस्तुत किया है। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि महर्षि दयानन्द ईश्वर को सृष्टि का धारणकर्ता, प्रलयकर्त्ता, जगत का स्वामी और जगत में व्यापक सत्ता बताते थे। इस अवसर पर अजय सहगल, सौरभ गुप्ता,आनन्द प्रकाश आर्य,आनन्द सूरी,डॉ रचना चावला,ओम सपरा,उर्मिला आर्या(गुरुग्राम),सुरेश आर्य आदि उपस्थित थे।