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मुठभेड़ में शामिल पुलिस कर्मियों की दोबारा होगी जांच
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मुठभेड़ में शामिल पुलिस कर्मियों की दोबारा होगी जांच
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- साहिबाबाद में सितंबर में हुई मुठभेड़ में दो एसआई सहित आठ पुलिस कर्मी थे शामिल
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। साहिबाबाद थाना क्षेत्र में सितंबर में हुए मुठभेड़ मामले में अदालत ने दोबारा जांच का आदेश दिया है। पुलिस द्वारा दाखिल की गई अंतिम रिपोर्ट निरस्त करते हुए मुकदमा फिर से शुरू करने को कहा है। इस मामले में दो एसआई सहित आठ पुलिसकर्मी व मुकदमा दर्ज कराने वाले बिल्डर को आरोपी बनाया गया है।
वरष्ठि अधिवक्ता खालिद खान ने बताया कि साहिबाबाद थाने में निखिल कुमार ने 13 अगस्त को मोहसिन खान के भाई संजीद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद 21 अगस्त को निखिल ने नौकरानी की मदद से एक और मुकदमा मोहसिन के खिलाफ दर्ज कराया था। मामले की जानकारी होने पर संजीद अपने साथ निसार को लेकर थाने में समर्पण करने गया, लेकिन एसआई शैलेंद्र सिंह ने साजिश के तहत समर्पण लेने से इंकार कर दिया और कहा कि मुठभेड़ कर प्रमोशन लेंगे। इसके बाद संजीद वापस लौट गया और दूसरे दिन वह निसार के साथ कोर्ट में समर्पण करने के लिए जा रहा था। आरोप है कि एसआई शैलेंद्र सिंह व सलाउद्दीन, कांस्टेबल सौरभ सोलंकी ने दोनों का करहैड़ा कट से कार द्वारा अपहरण कर लिया। रात नौ बजे संजीद से मुठभेड़ दिखाते हुए पिंडली में गोली मार दी और निसार पर फर्जी मुकदमा दिखाकर जेल भेज दिया। इस मुठभेड़ में पुलिस ने निखिल व उसकी नौकरानी द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमें को आधार बनाते हुए 25 हजार का ईनामी घोषित कराया था। अदालत को बताया गया कि इस मुठभेड़ में कांस्टेबल शमशाद, ललित कुमार, संजय व संजीव गुप्ता भी शामिल रहे। आरोप है कि ईनामी घोषित करने के बाद न तो अदालत से वारंट जारी कराया था और ना ही कुर्की की कार्रवाई का आदेश हुआ था। इस मामले में विवेचना के दौरान आरोप लगाया गया कि विवेचक इंस्पेक्टर मुकेश कुमार ने गलत विवेचना कर अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रत्नेश दीप कमल आनंद ने मामले की दोबारा विवेचना का करने का आदेश जारी किया है।
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आशुतोष यादव
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