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कोरोना के साथ ही स्वाइन फ्लू, डेंगू व टायफाइड का भय 

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 24 Nov 2020 06:37 PM IST
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कोरोना के साथ ही स्वाइन फ्लू, डेंगू व टायफाइड का भय 
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- बुखार होते ही लोग करा रहे हैं कोरोना की जांच, अधिकांश की रिपोर्ट निगेटिव माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण के अलावा लोगों में स्वाइन फ्लू, डेंगू व टायफाइड का भी भय सता राह है। अधिकांश मरीजों की डाक्टर जांच कराने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि पिछले चार महीने से स्वाइनफ्लू की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन डेंगू, टायफाइड व कोरोना की पुष्टि हो रही है। पिछले दो महीने में अब तक 2.40 लाख लोगों ने कोरोना की जांच कराई थी, इनमें सिर्फ7200 लोग कोरोना संक्रमित थे, जबकि अन्य मरीजों में वायरल एवं बुखार की चपेट में थे। बुखार की चपेट में आने वाले मरीजों में चालीस फीसद लोगो में टायफाइड की पुष्टि हुई है। गत वर्ष अक्टूबर के बाद वायरल व बुखार के मरीजों की संख्या में कमी आ जाती थी, लेकिन इस बार अब भी लगातार संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। हालांकि विभागीय आंकड़ा सिर्फ 28 पर ही रुका है। मलेरिया विभाग से मिली जानकारी के अनुसार डेंगू व मलेरिया के आंकड़े अपडेट भी नहीं किए जा रहे हैं। मलेरिया अधिकारी भी पिछले 15 दिन से कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से अस्पताल में भर्ती हैं। 
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आईएमए के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ फिजीशियान डा. वीबी जिंदल का कहना है कि इस तरह के मौसम में जिसके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें अधिक परेशानी होती है। जो स्वस्थ हैं उन्हें भी सावधानी की जरूरत है। किसी भी तरह के बुखार की चपेट में आने पर स्नायु तंत्र पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। इसलिए बुखार की चपेट में आने पर स्वतः दवाई न लें, क्योंकि हर बुखार में एंटी बायोटिक की जरूरत नहीं पड़ती है, लेकिन अधिकांश लोग मेडिकल स्टोर से दवाई खरीद कर ले लेते हैं जो बाद में शरीर के लिए हानिकारक होती है।
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वायरल बुखार होने के कारण आम तौर पर वायरल फीवर मौसम के बदलने पर प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने पर होता है, लेकिन इसके सिवा और भी कारण होते है जिनके कारण बुखार आता है। दूषित जल एवं भोजन का सेवन, प्रदूषण के कारण दूषित वायु में मौजूद सूक्ष्म कणों का शरीर के भीतर जाना, रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी, वायरल बुखार हुए रोगी के साथ रहना होता है।
लक्षण थकावट, खांसी, संक्रामक जुकाम, उल्टी, दस्त जैसे लक्षण देखने को मिलते है और तापमान अधिक होने के कारण डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। थकान, पूरे शरीर में दर्द होना, शरीर का तापमान बढ़ना, खांसी जोड़ो में दर्द, दस्त, त्वचा के ऊपर रैशेज होना, सर्दी लगना, गले में दर्द, सिर दर्द, आंखों में लाली तथा जलन रहना। उल्टी और दस्त का होना। वायरल बुखार ठीक होने में 5-6 दिन भी लग जाते है। शुरूआती दिनों में गले में दर्द, थकान, खांसी जैसी समस्या होती
 वायरल फीवर से बचाव के उपाय  कुछ सावधानियां बरतने पर यानि जीवनशैली में और खान-पान में बदलाव करके वायरल से बचाव कर सकते हैं।  - खाने में उबली हुई सब्जियां, हरी सब्जियां खाना चाहिए।  - दूषित पानी एवं बासी भोजन से बचें।  - पानी को उबाल कर थोड़ा गुनगुना ही पिएं। - वायरल बुखार से ग्रस्त रोगी के संपर्क में आने से बचें।  - मौसम में बदलाव के समय उचित आहार-विहार का पालन करें।  - रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने के लिए आयुर्वेदिक उपचार एवं अच्छी जीवन शैली को अपनाएं। -------------- बुखार होने पर हैवी डोज की दवाइयां या एंटीबायोटिक लेने से परहेज करें। आराम करने के साथ ही लोगों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। खाने-पीने में विशेष सावधानी बरतें। तीन से पांच दिन में बुखार समाप्त हो जाता है। तीन दिन से अधिक बुखार हो तो जांच अवश्य करानी चाहिए। घर से बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग जरूर करें, इससे कोरोना संक्रमण और प्रदूषण दोनों से बचाव होगा। डा. आरपी सिंह, फिजीशियन जिला एमएमजी अस्पताल ------------ आशुतोष यादव
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