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क्रॉसिंग रिपब्लिक की विभिन्न सोसायटी में की पूजा-अर्चना
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माई सिटी रिपोर्टर
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गाजियाबाद। क्रॉसिंग रिपब्लिक की विभिन्न सोसायटी में शुक्रवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा अर्चना की। सूर्य देव और छठ मैया से मन्नते मांगी। कोरोना संक्रमण के कारण महिलाओं ने सोसायटी में बनाई गई हौदी में खड़े होकर पूजा की और सोशल डिस्टेंसिंग का भी विशेष ध्यान रखा।
क्रॉसिंग रिपब्लिक की विभिन्न सोसायटी में छठ पूजा को लेकर तैयारियां चल रही थी। सोसायटी के एओए के पदाधिकारियों ने कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए सोसायटी की छत पर ही हौदी बना दी। शाम से ही महिलाएं जल में खड़े होकर पूजा अर्चना करने लगी। महिलाओं ने बताया कि छठ पूजा का बड़ा इतिहास है।
प्राचीन कथा के मुताबिक प्रियंवद नाम का एक राजा था। उनकी शादी मालिनी नाम की स्त्री से हुई। शादी के सालों बाद भी प्रियंवद को संतान की प्राप्ति नहीं हुई। इस वजह से वह बहुत दुखी रहा करते थे। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए महर्षि कश्यप से विचार विमर्श कर यज्ञ करवाने का निश्चय किया। यज्ञ की आहुति की खीर को महर्षि कश्यप ने राजा प्रियंवद की पत्नी को दिया और उस खीर के प्रभाव से उन्हें संतान के रूप में पुत्र की प्राप्ति हुई। लेकिन दुख की बात यह थी कि वह मरा हुआ पैदा हुआ। पुत्र वियोग में जब राजा ने अपने प्राण त्यागने का निश्चय किया तो तभी ब्रह्मा जी की मानस पुत्री देवसेना वहां प्रकट हुई और उन्हें पुत्र को जीवित करने के लिए छठ व्रत करने को कहा। इस व्रत के प्रभाव से राजा प्रियंवद का पुत्र जीवित हो गया। तब से ही छठ पूजा मनाई जा रही है। बताया जाता है कि यह ही छठी माता हैं। सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न होने की वजह से इन्हें छठी मैया कहकर पुकारा जाता है।
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रिवर हाइट्स सोसायटी में भी की गई छठ पूजा
गाजियाबाद।
रिवर हाइट्स सोसायटी राजनगर एक्सटेंशन में व्रतियों ने लगातार आठवीं वर्ष अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान सूर्य की आराधना की और छठ महापर्व मनाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। रिवर हाइट्स सोसाइटी में आयोजित की गई छठ पूजा की खासियत यह रही कि इस वर्ष कोविड-19 की वजह सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देश का पालन करने की पूरी कोशिश की गई। शुक्रवार शाम को सोसायटी में ही पूर्वांचल और बिहार के लोगों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। शनिवार सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस चार दिवसीय लोक पर्व का समापन होगा। महिला एवं लोगों ने छठ पूजा की मान्यता के बारे में विस्तार से बताया।
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