फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   छुट्टी का खेल अधिकारियों से स्कूल पहुंचने से पहले ही रजिस्टर में चढ़ जाती है सीएल

छुट्टी का खेल अधिकारियों से स्कूल पहुंचने से पहले ही रजिस्टर में चढ़ जाती है सीएल

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 17 Nov 2020 04:59 PM IST
विज्ञापन
- सीएल की तत्काल कर दी जाती है एंट्री, शिक्षा विभाग में छुट्टी को लेकर चल रहा बड़ा खेल
विज्ञापन
राहुल सक्सेना गाजियाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग में छुट्टी का बड़ा खेल सामने आया है। शिक्षक स्कूल से गायब रहते हैं। विद्यालय में अपने साथी शिक्षक को प्रार्थना पत्र देकर छुट्टी मार लेते हैं। जिले के कुछ ब्लाकों के स्कूलों में यह क्रम बारी-बारी चलता है। अधिकारी चेकिंग के लिए पहुंचता है तो प्रार्थना पत्र के साथ सीएल चढ़ा दी जाती है। जिससे अधिकारी को भी इसकी जानकारी न हो सके। कई ब्लाक के स्कूलों में बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारियों ने यह खेल पकड़ा है। बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालय में तैनात शिक्षक-शिक्षिकाएं छुट्टी के नाम पर खूब खेल कर रहे हैं। इस खेल में विभाग का पूरा सिस्टम दोषी है। कुछ ब्लाक को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर ब्लाक में अधिकारी शिक्षकों के इस खेल में शामिल हैं। अधिकारियों को भी जानकारी होती है कि इस विद्यालय में यह शिक्षक नहीं आएगा। एआरपी और एसआरजी भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो शिक्षकों की छुट्टी के नाम पर रकम तक वसूली जा रही है, जिससे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई न हो। शिक्षकों को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं होती है। क्योंकि वह दिल्ली, नोएडा, बुलंदशहर, हापुड़ और मेरठ से आकर नौकरी करते हैं। अगर, महीने में 10 दिन गायब रहने के लिए दो से पांच हजार रुपये देने पड़े तो उन्हें कोई फर्क भी नहीं पड़ता है। इससे ज्यादा का उनका पेट्रोल व अन्य खर्चे बच जाते हैं। सबसे ज्यादा शिक्षक रजापुर, मुरादनगर, भोजपुर और लोनी ब्लाक से गायब होते हैं। शिक्षकों की आपसी सेटिंग का जाल बहुत मजबूत है। पिछले दिनों बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मुरादनगर और भोजपुर में शिक्षकों का खेल पकड़ा था। उन्हें संदेह हुआ तो पता चला कि शिक्षक छुट्टी पर है। अधिकारी के पहुंचने पर शिक्षकों ने रजिस्टर में सीएल चढ़ा दी है, जिससे शिक्षक के खिलाफ कोई कार्रवाई न हो सके। इस तरह खंड शिक्षा अधिकारी रजापुर ने भी अपने ब्लाक में इस तरह के मामले पकड़े हैं। लोनी और मुरादनगर में भी कई केस सामने आए हैं, जिसमें खंड शिक्षा अधिकारियों ने कार्रवाई की है। अधिकारियों की कार्रवाई और कुछ अधिकारियों की सेटिंग के कारण यह खेल खूब चल रहा है। - अधिकारियों को ऐसे करते हैं गुमराह जब कोई अधिकारी ब्लाक में निरीक्षण करने पहुंचता है तो पहले वह सीएल एंट्री कर देते हैं। यदि नहीं कर पाते हैं तो एक प्रार्थना पत्र बनाकर रख लेते हैं और उसमें बीआरसी या बैंक का काम बताते हैं। इसके बाद कई बार अधिकारी इसका सत्यापन करा लेते हैं। जबकि कई बार शिक्षक बच जाते हैं। सत्यापन कराने पर सही बात पता चल जाती है। इस मामले में अधिकतर शिक्षक एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। - कुछ क्षण में हो जाती है सीएल की एंट्री पहले खंड शिक्षा अधिकारियों के पास गाड़ी नहीं थी तो वह किसी बाइक या अन्य वाहन से पहुंचते थे। अब विद्यालय में पहुंचने से पहले ही कई बार शिक्षकों को जानकारी हो जाती है। वह सीएल की एंट्री कर देते हैं। अधिकारी को इसे पकड़ना आसान नहीं होता है। एक स्कूल के शिक्षक बारी-बारी से छुट्टी करते हैं। वर्जन... शिक्षक छुट्टी मारने के लिए आपस में कई बार सेटिंग कर लेते हैं। पिछले दिनों कई मामले सामने आए। ऐसे शिक्षक और सहयोग करने वाले प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। विद्यालय में एंट्री करने के बाद शिक्षकों के व्यवहार से ही बहुत सारी चीजें पता चल जाती है। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को भी आदेश दिए गए हैं कि ऐसा करने वाले शिक्षकों की सूची उपलब्ध कराई जाए, जिससे इनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। ब्रजभूषण चौधरी, बीएसए
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed