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बढ़ रहा प्रदूषण का लेवल, नहीं हो रहा पानी का छिड़काव

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 06 Nov 2020 06:02 PM IST
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सबहेडः पर्यावरण से जुड़ी संस्थाओं ने उठाए सवाल, बीते साल के मुकाबले पानी का छिड़काव कम, ग्रुप के नियमों की अवहेलना
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- नगर निगम के साथ जीडीए के पानी के टैंकर नहीं आते नजर माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। महानगर में बढ़ता प्रदूषण का स्तर लोगों की सांसो पर भारी पड़ रहा है। महानगर का लगातार बढ़ रहा एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) अब खतरे के निशान पर पहुंच गया है। बीते माह 15 अक्टूबर से ही शहर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू हुआ था, लेकिन नियमों का खास असर दिखाई नहीं दे रहा। बढ़ते प्रदूषण के बावजूद महानगर में टैंकरों से पानी का छिड़काव न के बराबर है। और न ही पानी से सड़कों की रात में धुलाई की जा रही है। नगर जिले की ओर से पानी के टैंकरों से छिड़काव के तमाम दावे किए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल उलट है। पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले विभिन्न संगठनों के लोग पानी के टैंकरों से छिड़काव की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। पर्यावरणविदों के मुताबिक महानगर के तमाम ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पानी के टैंकरों से छिडकाव जरूरी है, लेकिन सरकारी टैंकर पॉश कॉलोनियों में पानी का छिड़काव कर रहे हैं। प्रदूषण के स्तर को देखते हुए पानी के टैंकरों की संख्या बेहद कम है। लापरवाही के चलते विभिन्न मार्गों पर धूल का गुबार उड़ता हुआ देखा जा सकता है। पर्यावरणविद आकाश वशिष्ट ने बताया कि महानगर में तमाम ऐसे स्थान हैं कि जहां पानी का नियमित छिड़काव जरूरी है, लेकिन केवल पॉश कॉलोनियों में पानी का छिड़काव किया जा रहा है। प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए ग्रैप के नियमों का कड़ाई से लागू होना जरूरी है।
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------------- ग्रैप के नियमों का कड़ाई से नहीं हो रहा पालनः बढ़ते प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए ग्रैप के नियमों का कड़ाई से पालन जरूरी है। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन सड़कों की सफाई, रात में सड़कों की धुलाई, कंस्ट्रक्शन साइट पर निर्माण सामग्री को ढककर रखने, प्रतिबंधित ईंधन के प्रयोग पर रोक, बड़े जेनरेटर का मानकों के तहत संचालन, पीएनजी-सीएनजी का इस्तेमाल सहित कई अन्य नियम का कड़ाई से लागू होना जरूरी है।
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