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सरकारी व्यवस्था पड़ रही हरियाली पर भारी

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2020 05:47 PM IST
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सबहेडः आठ माह बीते, दो बार निकाली निविदाएं, ठेकेदार काम लेने को नहीं तैयार, सूखने लगे हरित पट्टियों के पौधे और घास
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- महानगर में जीडीए के 140 छोटे बड़े हैं पार्क, 35 किलोमीटर है ग्रीन बेल्ट माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। कोरोना काल में जीडीए की हरित पटि्टयों, सेंट्रल वर्ज और पार्कों की बदहाल दशा लचर सरकारी व्यवस्था की कहानी बयां कर रही है। सही रखरखाव के अभाव में अधिकांश हरित पट्टियों और सेंट्रल वर्ज में लगे पौधे और घास सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं। बीते आठ माह से जीडीए को हरित पट्टियों और सेंट्रल वर्ज के रखरखाव के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। प्राधिकरण की ओर से कई निविदाएं निकाली गई, लेकिन काम लेने के लिए ठेकेदार आगे नहीं आ रहे हैं। रखरखाव के अभाव में जीडीए की करहेड़ा, हापुड़ रोड, राजनगर एक्सटेंशन सहित अन्य हरित पट्टियों का बुरा हाल है। मजदूरों की कमी के चलते ठेकेदार जीडीए का काम लेने से कतरा रहे हैं। ऐसे में बीते आठ माह से हरित पट्टिओं सेंट्रल वर्ज की देखरेख के लिए निविदाएं नहीं पूरी हो पाई हैं। प्राधिकरण की ओर से दो बार निविदा प्रक्रिया आयोजित की गई, लेकिन कोई ठेकेदार आगे नहीं आया। अब तीसरी बार टेंडर निकाले गए हैं। महानगर के बड़े सेंट्रल पार्क में खड़ी लंबी-लंबी घास और गंदगी का मुद्दा स्थानीय पार्षद राजेंद्र त्यागी ने उठाया था। इसके बाद प्राधिकरण उद्यान विभाग ने जैसे-तैसे मजदूरों की व्यवस्था कर घास को कटवाने का काम किया। राजनगर एक्सटेंशन के लोगों ने ग्रीन बेल्ट की बदहाली को लेकर कई बार शिकायत की है, लेकिन समस्या का अब तक समाधान नहीं हुआ है।ऐसे में निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही होने के बाद ही पार्को और ग्रीन बेल्ट की दशा सुधारने का काम शुरू हो पाएगा।
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------------- 35 किलोमीटर लंबी हरित पट्टी व 140 पार्कों का रखरखाव करता है जीडीएः महानगर में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के छोटे बड़े 140 पार्क हैं। इसके अलावा 35 किलोमीटर लंबी ग्रीन बेल्ट की देखरेख जीडीए उद्यान अनुभाग करता है। उद्यान से जुड़े कार्यों के टेंडर न होने और मजदूरों की कमी के चलते पार्कों और ग्रीन बेल्ट की खराब दशा अपनी कहानी खुद बयां कर रहे हैं। जीडीए सचिव संतोष कुमार राय ने बताया कि ध्यान से जुड़े कार्यों की करीब दो बार निविदा प्रक्रिया निकाली गई, लेकिन कोई आगे नहीं आया। वर्तमान में जारी प्रक्रिया जल्द पूरी होने के साथ ही उद्यान से जुड़े सभी काम विधिवत रूप से शुरू हो जाएंगे।
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