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महापंचायत में जुटे 50 गांव के किसान, कलक्ट्रेट पर होगा सामूहिक धरना-प्रदर्शन
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सदरपुर में हुई महापंचायत में जुटे 50 गांव के किसान
- फोटो : Amar Ujala
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सबहेडः एक समान मुआवजे को लेकर मधुबन बापूधाम के योजना से प्रभावित किसानों की हुई महापंचायत, किसान बोले, जीडीए ने 20 तक नहीं रोका काम, फिर 21 को होगा धरना-प्रदर्शन की तारीख का ऐलान
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- सभी गांव के किसानों ने एकजुट होकर लड़ाई लड़ने का किया आह्वान, महापंचायत में किसानों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे हुए शामिल
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। जीडीए के रवैए से नाराज एक समान बढ़े मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलनरत किसानों ने शुक्रवार को महापंचायत बुलाई। सदरपुर प्राथमिक विद्यालय में हुई महापंचायत में 50 गांव के किसानों ने एकजुटता का प्रदर्शन किया। पुलिस बल के साथ किसानों की जमीन पर कब्जा लेने की जिला प्रशासन और जीडीए की कार्रवाई का विरोध करते हुए किसानों ने 20 अक्टूबर तक जीडीए से काम रोकने की मांग की है। काम न रोकने पर किसान 21 अक्टूबर को सामूहिक रूप से कलक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लेंगे।
21 अक्टूबर को ही कलक्ट्रेट पर होने वाले सामूहिक धरना प्रदर्शन की तिथि का ऐलान किया जाएगा। सदरपुर गांव में हुई महापंचायत में सदरपुर, मैनापुर, नंगलापाट, याकूबपुर, मोरटा और दुहाई के साथ 50 गांव के किसानों, महिलाओं और बच्चों ने भाग लिया। महापंचायत को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से भी बंदोबस्त किए गए। महापंचायत स्थल के पास ही पुलिस के जवानों के साथ रैपिड रिस्पांस फोर्स के जवान तैनात दिखाई दिए। विभिन्न गांव के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ इकट्ठा होकर पहुंचे।
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आंदोलन के अध्यक्ष व किसान नेता सुदीप शर्मा ने कहा कि जीडीए अधिकारी उनकी बात सुनना तो दूर अब पुलिस बल के दम पर किसानों की जमीन पर कब्जा ले रहे हैं। एक समान बड़े हुए मुआवजे की मांग पर किसान अडिग हैं। महापंचायत में जीडीए से योजना में 20 अक्टूबर तक काम रोकने की मांग की गई है। फिर 21 अक्टूबर से 50 गांव के किसानों के जिला मुख्यालय पर सामूहिक धरना प्रदर्शन की तिथि का ऐलान किया जाएगा। कार्यक्रम के अध्यक्ष चौधरी धर्मवीर सिंह डायरेक्टर ने कहा कि प्राधिकरण अधिकारी अक्टूबर 2007 में किसानों के साथ हुए समझौते की लगातार अनदेखी कर रहे हैं। किसानों के साथ हुए समझौते में साफ था कि अधिसूचना के तहत अधिग्रहित की गई भूमि का भविष्य में सहमति के आधार पर यदि उपरोक्त निर्धारण प्रतिकर से अधिक प्रतिकर सक्षम अधिकारी द्वारा निर्धारित होता है तो बढ़े हुए प्रतिकार का लाभ इस करार में सम्मिलित भू-स्वामियों को भी देय होगा। लेकिन इससे समझौते का उल्लंघन करते हुए जीडीए अधिकारी किसानों की मांगों को अनदेखा कर रहे हैं।
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यह है विवाद
मधुबन बापूधाम योजना के लिए जीडीए ने 1234.13 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी। प्राधिकरण की ओर से किसानों को भू-अर्जन अधिनियम के तहत उस वक्त जमीन का 1100 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा दिया गया था। बाद में कई किसान बढ़े मुआवजे की मांग को लेकर कोर्ट चले गए। फिर कोर्ट के आदेश पर विभिन्न गांव के 76 किसानों को नई भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जीरे की ओर से मुआवजा दिया गया। ऐसे में बाकी किसान भी एक समान बढ़े हुए मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं।
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कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने दिया किसानों को समर्थन
शुक्रवार को सदरपुर प्राथमिक विद्यालय पर 50 गांव के किसानों की हुई महापंचायत में कांग्रेस, सपा, भारतीय किसान यूनियन के साथ तमाम पार्टियों और संगठनों के लोगों ने भाग लिया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बिजेंद्र यादव ने किसानों को हर स्तर पर पूरा समर्थन देने की बात कही। पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार मुन्नी ने भी मधुबन बापूधाम योजना से प्रभावित किसानों को अपना समर्थन दिया। महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन प्रदेश उपाध्यक्ष राजवीर चौधरी, पिंकी चौधरी, एमएमएच कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष भीष्म चौधरी, महेंद्र मुखिया, बॉस चौधरी, सुरदीप शर्मा, भूपेंद्र चौधरी, गौरीशंकर, संदीप चौधरी, आशु चौधरी सहित तमाम किसान मौजूद रहे।
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कोट्स: किसान
1. किसानों से हुए समझौते का उल्लंघन कर जीडीए जबरन जमीन पर कब्जा ले रहा है। किसानों की बात कोई सुनने को तैयार नहीं है। महापंचायत में किसानों ने एकजुट होकर हक की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। -- बॉस चौधरी, किसान
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2. चार माह से आंदोलनरत किसानों की बात गिरी अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है। एक समान मुआवजा किसानों का हक है। किसानों के साथ हुए समझौते से जीडीए पलट नहीं सकता है। -- मुखिया महेंद्र चौधरी, किसान
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3. प्राधिकरण के खिलाफ किसान एकजुट होकर आंदोलन शुरू करेंगे। महापंचायत में 50 गांव के किसानों ने एक साथ आने का निर्णय लिया है। जल्द संयुक्त रूप से आंदोलन शुरू किया जाएगा। -- धर्मवीर चौधरी, किसान
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4. जिला प्रशासन और जीडीए अधिकारी पुलिस के दम पर किसानों की जमीन पर कब्जा ले रहे हैं। प्राधिकरण की कार्रवाई का किसान पुरजोर रूप से विरोध करते हैं। नियुक्त रूप से कई गांव के किसान मिलकर अब आंदोलन को और तेज करेंगे। -- सुरदीप शर्मा, किसान
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