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छात्रों व शिक्षकों से गुलजार रहने वाले लक्ष्मी नगर-मुखर्जी नगर में पसरा है सन्नाटा, पढ़ें एजुकेशन हब का हाल

Tue, 04 Aug 2020 12:09 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 04 Aug 2020 12:09 PM IST
सार

- बिना छात्रों के सूना पड़ा है लक्ष्मी नगर का सीए कोचिंग हब
- यहां पीजी सेंटर चलाने वाले, किताब बेचने वाले, खाने पीने की दुकानें चलाने वाले लोग 4 महीने से खाली बैठे हैं

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Education hubs of delhi laxmi nagar mukherjee nagar are empty because of coronavirus pandemic
लक्ष्मी नगर और मुखर्जी नगर का हाल - फोटो : हिमांशु सोनी/विवेक निगम

विस्तार

छात्रों से गुलजार रहने वाला इलाके में इनदिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। वह चाय की दुकानों पर भी रौनक नहीं है जहां भारत ही नहीं पूरे विश्व की राजनीति पर बहस छिड़ी रहती थी। जी हां, हम बात कर रहे हैं कि सिविल सेवा के लिए देश के बड़े कोचिंग हब मुखर्जी नगर की, युवाओं के मिनी भारत के तौर पर मशहूर यह इलाका कोरोना वायरस के खौफ से फिलहाल सूनसान पड़ा है।

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कोरोना वायरस जनित लॉकडाउन ने सबसे पहले कोचिंग का शटर गिराया। इससे बच्चे अपने गांव व शहर चले गए। नतीजन, पीजी बंद हुए, ढाबों पर ताले लग गए, चाय की दुकानें वीरान हो गईं, प्राइवेट लाइब्रेरी बंद हो गई।
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कुल मिलाकर इसका असर तालाबांदी के तौर पर दिखा। अनलॉक के दो सीजन बीत जाने के बाद पुस्तकों की दुकानें खुलने के साथ रेहड़ी-पटरी वाले भी काम पर लौट आए हैं, लेकिन छात्रों की गैर-मौजूदगी कारोबार को रास्ते पर नहीं ला पाई है। अमर उजाला संवाददाता नवनीत शरण की रिपोर्ट...
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मुखर्जी नगर का बत्रा सिनेमा हॉल कॉम्प्लेक्स: सुबह 8 बजे
नींद से जगने के बाद आसपास के इलाके के छात्र यहां कुल्हड़ वाले चाय की दुकान पर जरूर पहुंच जाते है। यही से शुरू होती है उनकी दिनचर्या। यहां सुबह के वक्त ही अखबार पढने के साथ बहस छिड़ जाती है। बहस भी किसी ना किसी पढ़ाई से जुड़े विषय पर। गप्पे लड़ाते हुए छात्र कैरियर की ही चिंता जताते है तो अचानक से बहस भारत की विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय विषय पर शुरू हो जाती है। लेकिन यह चाय की दुकान इनदिनों गुलजार नहीं हो रही। चाय पहुंचाने वाला छोटू कहता है कि मुझे तो अखबार पढने की जरूरत ही नहीं होती। भईया लोग ही इतना बक-बक करते रहते है देश-दुनिया की जानकारी मिल जाती है।

लाइब्रेरी भी हुई बंद

नेहरू विहार इलाका: सुबह 9 बजे
मुखर्जी नगर के रिहायशी इलाके में जब से कोचिंग संस्थान बंद होने का फरमान आया तब से नेहरू विहार स्थित बर्धमान प्लाजा में रौनक आ गया था। पिछले साल ज्यादातर कोचिंग संस्थान इसी प्लाजा में पढ़ाई कराना शुरू कर दिए। लेकिन यह जगह भी सुनसान पड़ा है। सभी कोचिंग संस्थान के बाहर ताले लटक रहे तो कई कोचिंग वाले किराया नहीं देने की स्थिति में दुकान खाली कर रहे है।

प्राइवेट लाइब्रेरी भी बंद: सुबह 10 बजे
श्रवण कुमार इनदिनों खासे परेशान है। नेहरू विहार स्थित अपने लाइब्रेरी रोजाना जाते है। लाइब्रेरी की सीढिय़ों पर बैठकर रोजगार शुरू होने की बांट जोहते है। श्रवण कुमार की मुश्किल यह है कि प्राइवेट लाइब्रेरी को लेकर सरकार कोई बात ही नहीं करती। यही स्थिति रही तो शायद रोजगार ही छिन जाएगा। पिछले चार महीने से पांच लाख रुपया लाइब्रेरी के किराये का उधार हो गया है। ऐसे में बेहद ही मुश्किल है।

कंटेनमेंट जोन के कारण भी रोजगार प्रभावित: समय दोपहर 12 बजे
मुखर्जी नगर का व्यवसायिक इलाका कंटनेमेंट जोन में आ गया है। एक मिठाई की दुकान में जैसे ही ही कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या बढ़ी तो पूरे इलाके को सील कर दिया है। लिहाजा इस जोन स्थित ढाबा, दवाई की दुकान, कॉस्मेटिक दुकान, बेकरी समेत सभी दुकाने बंद है। यहां के एक अन्य मिठाई की दुकान वाले का कहना है कि एक व्यक्ति की वजह से पूरा ही व्यापार चौपट हो गया है। स्टेशनरी दुकान वाले का कहना है कि छात्रों के नहीं रहने से वैसे ही दुकान का रेंट देना भारी पड़ रहा है।

ऑनलाइन की तरफ मुड़ रहे कोचिंग वाले
कोचिंग चलाने वाले अब ज्यादातर ऑन लाइन की तरफ रूख कर रहे है। छोटे कोचिंग इंस्टीट्यूट तो लगभग बंद होने के कगार पर है। कोचिंग चलाने वाले सुनील सिंह का कहना है कि मुखर्जी नगर में कोचिंग के लिए जगह किराया लेने पर कम से कम एक लाख रुपया प्रतिमाह देना होता है। कोरोना वायरस कबतक प्रभावित करेगा कोई नहीं जानता। ऐसे में ऑनलाइन प्लेटफार्म पर आकर पढ़ाना ही बेहतर है। उन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई के फायदे को भी गिनाया। छात्र अनिश का कहना है कि कोचिंग बंद होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

लक्ष्मी नगर में सीए हब का बदल गया हाल

यह वही इलाका है, जो साल के 12 महीने और तकरीबन 24 घंटे गुलजार रहता था। यहां की गलियों में हमेशा छात्रों की रेलमपेल रहती थी। किताबों की दुकानों पर खड़े होने की  जगह नहीं रहती थी, लेकिन सोमवार करीब एक खंडेलवाल बुक शॉप पर सन्नाटा पसरा है। जी हां, हम बात कर रहे है कि लक्ष्मीनगर के सीए कोचिंग हब की, कोरोना की मार से जो अभी  तक नहीं उबर पाया है। अमर उजाला संवाददाता आदित्य पांडेय की रिपोर्ट...

समय: करीब एक बजे
स्थान: लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन
खंडेलवाल बुक शॉप के मालिक राधेश्याम खंडेलवाल ने बताया कि वह पिछले 4 महीने से केवल टाइम पास कर रहे हैं। दिसंबर से एक पैसे का धंधा नहीं हो रहा है। वो सीए और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित किताबें बेचते हैं। फरवरी में जो माल उन्होंने मंगाया था अब तक वही नहीं बिका है। सुबह से दोपहर तक उन्होंने कुल 120 रुपए की बिक्री की है। 

यहां की एक और बड़ी किताबों की दुकान सरस्वती किताबों का मेला के मालिक मनोज कुमार जैन अकेले अपने बेटे के साथ दुकान में बैठे मिले। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया की उनके पास सीए, कंपटीशन, एनसीईआरटी और इंटरनेट की वह किताबें उपलब्ध रहती हैं जो छात्रों को दूसरी जगहों पर मुश्किल से मिलती हैं। लेकिन लॉकडाउन के बाद से उनका व्यवसाय एक रुपए में केवल 10 पैसे ही रह गया है। वह तो औपचारिकता बस दुकान खोलकर रोजाना बैठते हैं। 

सारे पीजी खाली, गलियों में पसरा सन्नाटा:
शकरपुर गली नंबर दो
समय 1.30 बजे

लक्ष्मी नगर और शकरपुर की लगभग दर्जनभर गलियों के अंदर सैकड़ों पीजी हैं। लोग बताते हैं इनमें करीब ढाई लाख सीए और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र रहते थे। लेकिन मौजूदा समय लगभग सारे पीजी और छात्रावासों में ताला लगा हुआ है। शकरपुर लक्ष्मी नगर की गली नंबर 2 में लाइन से पीजी बने हुए हैं। करीब 50 मीटर अंदर घुसने पर श्याम जी गर्ल पीजी का गेट खुला मिला। अंदर जाकर इसके मालिक मनोज गुप्ता से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा इस समय उन्हें बिजली का बिल मार दे रहा है। पिछले 2 महीने में 80 हजार रुपए बिजली का बिल उन्होंने भरा है। पीजी के अंदर 50 में से केवल 4 बच्चे बचे हैं। उनका पूरा स्टाफ रोजाना आता है। छात्रों के पीजी छोड़कर चले जाने के कारण उन्हें इसका संचालन करना मुश्किल हो रहा है।

लोगों ने जूस पीना भी छोड़ा, ढाबे रहते बंद
शकरपुर गली नबर-3
समय: 2.30 बजे

लगभग डेढ़ घंटे लक्ष्मी नगर और शकरपुर की गलियों में घूमने पर केवल एक जूस की दुकान खुली दिखी। यह वही गलियां हैं जहां आम दिनों रात के 12 बजे भी खाना पीना उपलब्ध होता था। जूस की दुकान पर भी अकेले अतुल कुमार मक्खियां उड़ाते नजर आए। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के डर से लोगों ने जूस पीना छोड़ दिया है। पहले वह दिन भर में सौ-डेढ़ सौ गिलास जूस बेचा करते थे अब मुश्किल से 15 गिलास जूस बेच पाना मुश्किल है। इसका सीधा असर कमाई पर पड़ा है। उनका कहना था कि लगर सारे दुकानदारों का यही हाल है। ढाबे व होटल बंद पड़े हैं, रेहड़ी-पटरी की दुकानों पर लोग भी आने से अभी बच रहे हैं।

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