फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   twenty percent management seats became problem for parents in delhi

मैनेजमेंट कोटे की 20 फीसदी सीटों में उलझे अभिभावक 

Thu, 04 Jan 2018 08:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 04 Jan 2018 08:28 AM IST
सार

मैनेजमेंट कोटे की 20 फीसदी सीटों में उलझे अभिभावक 

विज्ञापन
twenty percent management seats became problem for parents in delhi

विस्तार

निजी स्कूलों ने नर्सरी दाखिले के लिए इस बार भी मैनेजमेंट कोटे के तहत 20 फीसदी सीटें तय की हैं। सामान्य श्रेणी की सीटों से अलग इन सीटों को मैनेजमेंट कोटे के नाम पर आरक्षित किया है। यह कोटे की सीटें दाखिले में अभिभावकों को उलझा रही हैं।

विज्ञापन


स्कूलों ने मैनेजमेंट कोटे की सीटों से अलग स्टॉफ कोटे की सीटें तय की हैं। वहीं कई स्कूल मैनेजमेंट कोटे के अंक भी दे रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर सामान्य श्रेणी के अभिभावकों पर पड़ रहा है क्योंकि ऐसा होने से उनकी सीटें कम हो रही हैं।
विज्ञापन


नर्सरी की रेस में विद्यादीप पब्लिक स्कूल ने मैनेजमेंट कोटे के लिए 10 अंक, मोनॉर्क पब्लिक स्कूल ने 20 अंक तय किए हैं। अभिभावकों का सवाल है कि इन सीटों पर किनका दाखिला होता है। एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा ने बताया कि मैनेजमेेंट कोटे व स्टॉफ कोटे के कारण अभिभावक परेशान हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसा इसलिए है क्योंकि मैनेजमेंट कोटे में स्टॉफ शामिल नहीं है। कुछ स्कूलों ने पांच फीसदी सीटें स्टॉफ के लिए तय की हैं। इस तरह से सामान्य की सीटें कम हो रही हैं। मसलन किसी स्कूल में 100 सीटें हैं तो 25 फीसदी ईडब्लयूएस की निकाल कर बची 75 सीटें।

 इन सीटों में 20 फीसदी मैनेजमेंट की सीटें और फिर पांच फीसदी स्टॉफ कोटे की। इस तरह से सामान्य श्रेणी के लिए महज 50 फीसदी सीटें ही बच रही हैं। स्कूलों को मैनेजमेंट कोटे में ही स्टॉफ कोटे को शामिल करने के लिए कहा गया था। लेकिन स्कूलों ने मनमानी करते हुए स्टॉफ केलिए सीटें अलग से तय की हैं।


वहीं कुछ स्कूल मैनेजमेंट कोटे केलिए भी अंक दे रहे हैं। सुमित ने बताया कि ऐसा करके स्कूल सीधे तौर पर शिक्षा निदेशालय केनियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। अभिभावकों को राहत देते हुए शिक्षा निदेशालय को ऐसे स्कूलों के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed