अर्द्धकुंभ मेले के बीच शुरू हुआ योग महाकुंभ
सीएम ने की संस्कृतिभवन बनाने की घोषणा।
योग विज्ञान को जन जन तक पहुंचाने के लिए उत्तराखड से होंगे प्रयास।
राज्य के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में विकसित होंगे योग संस्थान।
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अर्द्धकुंभ मेले के साथ ही चार दिवसीय योग महाकुंभ का शुभारंभ मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया। मंगलवार को मेला प्रशासन, पर्यटन विभाग एवं परमार्थ निकेतन के संयुक्त तत्वावधान में योग महाकुंभ का आगाज हुआ।
इस दौरान मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि योग की धरती से योग विज्ञान को दुनिया के कोने-कोने तक, जन-जन तक पहुंचाने के प्रयास उत्तराखड से किए जायेंगे।
इसके लिए राज्य के पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों में अनेक संस्थान विकसित किए जाएंगे। उन्होंने देवप्रयाग में संस्कृतिभवन बनाने की घोषण की।
योग साधकों को चखाएं स्थानीय उत्पादों का स्वाद
मुख्यमन्त्री ने योगकुंभ जैसे अवसरों पर स्थानीय उत्पादों को योग साधकों के भोजन में सम्मिलित करने, गंगाजी को प्रदूषित नहीं करने की बात कही।
कार्यक्रम में शांतिकुंज के अधिष्ठाता डॉ. प्रणव पंड्या, जयराम आश्रम के संचालक ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, परमार्थनिकेतन के संचालक चिदानंद मुनि, स्वामी हरिचेतनानंद, रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा, सीएम के ओएसडी पुरुयोत्तम शर्मा आदि ने विचार रखे।
इसके पूर्व पर्यटन सचिव शैलेश बगौली ने मुख्यमन्त्री एवं सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय योग महोत्सव के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
अन्तरराष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक साध्वी भगवती सरस्वती ने सभामंच का संचालन किया। उद्घाटन सभा में गंगासभा के अध्यक्ष पुरुरूत्तम शर्मा गांधीवादी, निरंजनी अखाड़ाके मोहनदास, मथुरा के सन्त स्वामी परमाद्वैति, सतपाल ब्रह्मचारी, अध्यात्म चेतना संघ प्रमुख आचार्य डॉ0 करुणेश मिश्र, बौद्ध मत के भिक्षु संघसेना, स्वामी कमलदास समेत बड़ी संख्या में संत समाज और राजनीतिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।