'किसी को नहीं सौंपूंगी जिगर का टुकड़ा'
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सरकार और सामाजिक संस्थाओं को आर्थिक मदद करना चाहे तो ठीक है, लकिन मैं अपने कलेजे के टुकड़े को किसी को नहीं सौंपूगी। हम अपने बलबूते बच्चों को पालेंगे। यह कहना है चार नवजात शिशुओं की मां पूर्णिमा ध्यानी का।
लालपुर दिव्यलोक निवासी पूर्णिमा का परिवार ‘अमर उजाला’ के पहले पेज पर प्रकाशित खबर से गदगद है। रविवार सुबह खबर छपने के बाद से ही उनके घर में बच्चों को देखने वालों और बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
लोग एक साथ जन्म लेने वाले चार बच्चों को देखने के लिए पहुंच रहे थे जिसके कारण उन्हें अनेक परेशानियों का सामना भी करना पड़ा।
दिन भर मीडिया कर्मियों को इंटरव्यू देते-देते वे थक गए। उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता था कि पत्र में प्रकाशित बच्चों की खबर का इतना असर पड़ेगा।
गोद लेने के लिए लोग कर रहे फोन
अमर उजाला से भेंट में पूर्णिमा ने बताया कि उनके बच्चों की न्यूज उन्हें बहुत अच्छी लगी। सुबह से ही फोन की घंटियां बजनी शुरू हो गई थी लेकिन, जान पहचान और बाहर से बच्चे गोद लेने के आने वाले फोन काल्स से वह परेशान है।
बताया कि उन्हें बच्चा गोद लेने को लेकर कई फोन आए, उन्होंने साफ मना कर दिया। कहा कि वे अपने चार बच्चों में से किसी को अपने से दूर नहीं कर सकती।
हमने आर्थिक सहायता के लिए कहा है न कि बच्चा किसी और को देने के लिए। बताया कि वे कहीं से आर्थिक सहायता नहीं मिलने पर भी अपने दम पर बच्चों का पालन पोषण करेंगी।